वन पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
ते स्मरन्तः परिक्लेशान्वर्षे पूर्णे त्रय़ोदशे |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
ते स्मान्योन्यञ्चराः सर्वे प्राणिनः सप्त सप्त च |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
ते स्वपक्षक्षय़ं तं तु ज्ञात्वा दुर्योधनस्य वै |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
ते स्वभावेन तिष्ठन्ति विय़ुज्यन्ते स्वभावतः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
ते स्वर्गभाजो राजेन्द्र भवन्त्विति महामते |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४
नारद उवाच
ते स्वय़ं त्वरय़न्तोऽश्वान्याहि याहीति वादिनः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
ते हता न्यपतन्भूमौ धृष्टद्युम्नस्य वाजिनः |
१४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
ते हता न्यपतन्भूमौ वज्रभग्ना इव द्रुमाः ||
२४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
ते हता न्यपतन्भूमौ वातनुन्ना इव द्रुमाः ||
१९ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ते हता न्यपतन्भूमौ स्यन्दनेभ्यो महारथाः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ते हता वसुधां पेतुर्भग्नाश्चान्ये विदुद्रुवुः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
ते हता हन्यमानाश्च न्यगृह्णंस्तं रथोत्तमम् |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
ते हताः प्रत्यपद्यन्त वसुधां विगतासवः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
ते हताः समरे राजन्पार्थेनाक्लिष्टकर्मणा |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
ते हतास्तत्र भीष्मेण शूराः सर्वेऽनिवर्तिनः ||
९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ते हत्वा सर्वपाञ्चालान्द्रौपदेय़ांश्च सर्वशः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
ते हनिष्यन्ति पार्थानां समासाद्य महारथान् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२
व्यास उवाच
ते हनिष्यन्ति सङ्ग्रामे समासाद्येतरेतरम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमाना द्रोणेन पाञ्चालाः प्राद्रवन्भय़ात् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमाना द्रोणेन पाञ्चालाः प्राद्रवन्भय़ात् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमाना भीमेन नाराचैस्तैलपाय़ितैः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
ते हन्यमाना भीमेन सिंहव्याघ्रतरक्षवः |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमाना वीरेण म्लेच्छाः सात्यकिना रणे |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः पार्थेन त्वदीय़ा व्यथिता भृशम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः पार्थेन भीष्मं शान्तनवं यय़ुः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः शूरेण प्रवरैः साय़कैर्दृढैः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः समरे तावकाः पुरुषर्षभ |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः समरे पाञ्चालाः सृञ्जय़ास्तथा |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाः समरे रथिनः सादिनस्तथा |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
ते हन्यमानाश्च तथा नानालिङ्गैः शितैः शरैः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
ते हस्तलाघवोपेतं विज्ञाय़ नृप दारुकिम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
नारद उवाच
ते हि जानन्ति वाय़ोश्च वलमात्मन एव च ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
ते हि दुर्योधनादिष्टास्तदा पार्थनिवर्हणे |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
ते हि नित्यं महाराज भीमसेनस्य लुव्धकाः |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२१
व्यास उवाच
ते हि प्राणस्य दातारस्तेषु धर्मः प्रतिष्ठितः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ते हि यत्ता महेष्वासाः पाण्डवं युद्धदुर्मदम् |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
ते हि लोकानिमान्सर्वान्धारय़न्ति मनीषिणः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
ते हि वीरा महात्मानः कृतास्त्रा दृढय़ोधिनः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
ते हि वैतस्तिका नाम शरा आसन्नय़ोधिनः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
ते हि शीघ्रतमान्वातान्सहन्तेऽन्योन्यसंश्रय़ात् ||
६१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
ते हि शूरा महेष्वासाः क्षिप्रमेष्यन्ति पाण्डवाः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
ते हि सर्वे नरव्याघ्राः शूरा विक्रान्तय़ोधिनः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
११९
जनमेजय़ उवाच
ते हि सर्वे महात्मानः सर्वशास्त्रविशारदाः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ते हि सर्वे महात्मानश्चत्वारोऽतिरथा भुवि |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०९
जनमेजय़ उवाच
ते हि सर्वे महात्मानो देवराजपराक्रमाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९५
भीष्म उवाच
ते हि सर्वे स्थिता धर्मे सर्वे चैवैकचेतसः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२२
मैत्रेय़ उवाच
ते हि स्वर्गस्य नेतारो यज्ञवाहाः सनातनाः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२५
दुर्योधन उवाच
ते हित्वा वसुधैश्वर्यं वसुधामधिशेरते ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ते हित्वा समरे पार्थं वध्यमानाश्च साय़कैः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
९९
लोमश उवाच
ते हेमकवचा भूत्वा कालेय़ाः परिघाय़ुधाः |
६ क