वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
ते हेमनिष्काभरणाः कुण्डलाङ्गदधारिणः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ते हेमपुङ्खैरिषुभिराचिता हेममालिनः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
ते हेममालिनः शूराः सर्वे युद्धविशारदाः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
ते हेमविकचा भूय़ो युक्ताः पर्वतधातुभिः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
ते ह्यकस्माज्जीवितं पाण्डवानां; न मृष्यन्ते धार्तराष्ट्राः पदस्थाः ||
८६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
ते ह्यन्योन्यमवेक्षन्त तस्मिन्वीरसमागमे |
६४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
ते ह्यस्य साक्षिणो नित्यं षष्ठ आत्मा तथैव च ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ा नरसिंहेन चोदिता वातरंहसः |
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ा निशितैर्विद्धा ज्वलद्भिरिव पन्नगैः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ा वह्वशोभन्त मिश्रिता वातरंहसः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ा वासुदेवस्य दारुकेण प्रचोदिताः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ा वासुदेवस्य दारुकेण प्रचोदिताः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ा साध्वशोभन्त विमिश्रा वातरंहसः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ाः काञ्चनापीडा नानावर्णा मनोजवाः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ाः काञ्चनापीडा रुक्मभाण्डपरिच्छदाः |
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ाः पाण्डुरा राजन्वहन्तोऽर्जुनमाहवे |
५२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ाः पुरुषव्याघ्र चोदिता वातरंहसः |
२९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
ते हय़ाः सहसोत्पेतुर्गृहीत्वा स्यन्दनोत्तमम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
ते हय़ान्मे रथं चैव तदा दारुकमेव च |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ान्रथचक्रे च रथेषाश्चापि भारत |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
ते हय़ाश्चन्द्रसङ्काशाः केशवेन प्रचोदिताः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
ते हय़ाश्चोदितास्तेन सूतेन परमाहवे |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
तेज आदास्यसे पश्यन्वलवांश्च भविष्यसि ||
६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
नारद उवाच
तेज इत्यभिविख्यातं स्वय़म्भासावभासितम् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
तेजः कर्मणि पाण्डित्यं वाक्षक्तिस्तत्त्ववुद्धिता |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३८
श्रीभगवानु उवाच
तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
तेजः क्षमा शान्तिरनामय़ं शुभं; तथाविधं व्योम सनातनं ध्रुवम् |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
तेजः समाप्नुहि विभो देवराज्यं प्रशाधि च ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
तेजः सूर्यसहस्रस्य अपश्यं दिवि भारत ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
तेजसः प्रतिघातार्थं वारुणेन समावृणोत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०
सूत उवाच
तेजसः प्रतिसंहारमात्मनः स चकार ह ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९
द्रौपद्यु उवाच
तेजसश्चागते काले तेज उत्स्रष्टुमर्हसि ||
३४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४१
व्रह्मो उवाच
तेजसश्चेतना धातुः प्रजासर्गः प्रजापतिः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
६५
मेनको उवाच
तेजसस्तपसश्चैव कोपस्य च महात्मनः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८
भीष्म उवाच
तेजसस्तपसश्चैव नित्यं विभ्येद्युधिष्ठिर |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
तेजसा केन वा युक्तः सर्वमेतद्व्रवीहि मे ||
६७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
तेजसा च सुदृष्टां त्वां न करिष्यति कश्चन ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
तेजसा तपसा चैव दीप्यमानं यथानलम् |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसा तपसा चैव विक्रमेणौजसा तथा ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९३
उत्तङ्क उवाच
तेजसा तव तेजश्च विष्णुराप्याय़यिष्यति ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
तेजसा तस्य गर्भस्य गङ्गा विह्वलचेतना |
५४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
तेजसा तस्य गर्भस्य भास्करस्येव रश्मिभिः |
७० क
वन पर्व
अध्याय
२०६
व्याध उवाच
तेजसा तस्य हीनस्य पुरुषार्थो न विद्यते ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
तेजसा तु तदा व्याप्ते दुर्निरीक्ष्ये समन्ततः |
११३ क
आदि पर्व
अध्याय
१७२
गन्धर्व उवाच
तेजसा दिवि दीप्यन्तं द्वितीय़मिव भास्करम् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
तेजसा दीप्यमानस्तु वारणोत्तममास्थितः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
तेजसा धर्षिताः सर्वा लज्जावत्यो वराङ्गनाः ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
तेजसा नाशय़िष्यामि स्थिरीभवत पाण्डवाः ||
१७ ग
आदि पर्व
अध्याय
६५
मेनको उवाच
तेजसा निर्दहेल्लोकान्कम्पय़ेद्धरणीं पदा |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
तेजसा प्रज्ञय़ा चैव युक्तो धर्मार्थतत्त्ववित् ||
८२ ख