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विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
तेजसा प्रज्वलन्तो वै नकुलस्यैतदाय़ुधम् ||
४५ ख
विराट पर्व
अध्याय ३८
उत्तर उवाच
तेजसा प्रज्वलन्तो हि कस्यैतद्धनुरुत्तमम् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
तेजसा प्रेर्यमाणश्च युय़ुधे सोऽतिमानुषम् ||
१२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसा भास्कराकारो गाधिजः समपद्यत ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२३
वासुदेव उवाच
तेजसा यशसा वुद्ध्या नय़ेन विनय़ेन च |
८ क
वन पर्व
अध्याय ६१
वृहदश्व उवाच
तेजसा यशसा स्थित्या श्रिय़ा च परय़ा युता |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १७०
व्राह्मण्यु उवाच
तेजसा यस्य दिव्येन चक्षूंषि मुषितानि वः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १६८
गन्धर्व उवाच
तेजसा रञ्जय़ामास सन्ध्याभ्रमिव भास्करः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
च्यवन उवाच
तेजसा वपुषा चैव गावो वह्निसमा भुवि |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
तेजसा वपुषा लक्ष्म्या भ्राजते रश्मिवानिव ||
१२२ ख
वन पर्व
अध्याय ११५
भृगुरु उवाच
तेजसा वर्चसा चैव युक्तं भार्गवनन्दनम् ||
२८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
तेजसा वह्निसदृशो वाय़ुवेगसमो जवे |
५९ क
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसा व्याक्रमद्रोषाच्चेतस्तस्य विमोहय़न् ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९७
भीष्म उवाच
तेजसा शक्यते प्राप्तुमुपाय़सहचारिणा |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसा सूर्यसङ्काशा व्रह्मलोकप्रभावनाः ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसा सूर्यसङ्काशो वाय़ुवेगसमो जवे |
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
तेजसा सूर्यसदृशः क्षमय़ा पृथिवीसमः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
तेजसां तपसां चैव निधिः स भगवानिह |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
तेजसां भास्करं चक्रे नक्षत्राणां निशाकरम् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसादित्यसदृशं वृहस्पतिसमं मतौ ||
४४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
तेजसादित्यसदृशः क्षमय़ा पृथिवीसमः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसादित्यसदृशो महर्षिप्रतिमो दमे |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
तेजसाभिपरीताङ्ग्यो न क्वचिच्छर्म लेभिरे ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३०
भीष्म उवाच
तेजसाभिप्रवर्धन्ते वलवन्तो युधिष्ठिर ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसाभ्यधिकौ सूर्यात्सर्वलोकविरोचनात् |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
तेजसामपि यत्तेजस्तपसामपि यत्तपः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तेजसाल्पेन संय़ुक्ताः क्रोधनाः पुरुषा नृप |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
तेजसावृत्य लोकांस्त्रीन्यशः प्राप्स्यति केवलम् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसैव हि ते शक्या निहन्तुं नात्र संशय़ः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
तेजसैवार्थलिप्साय़ां यतस्व पुरुषर्षभ ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०
शल्य उवाच
तेजसोर्हि द्वय़ोर्देवाः सख्यं वै भविता कथम् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
तेजसोऽर्धेन पुत्रस्ते भवितेति वृषध्वजः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १९३
उत्तङ्क उवाच
तेजस्तं वैष्णवमिति प्रवेक्ष्यति दुरासदम् ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
नारद उवाच
तेजस्तत्स्वं निजग्राह पुनरेवान्तरात्मना ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १७३
वैशम्पाय़न उवाच
तेजस्तवोग्रं न सहेत राज; न्समेत्य साक्षादपि वज्रपाणिः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
तेजस्तु तेज आसाद्य प्रशमं याति भारत ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
तेजस्तेजसि सम्पृक्तमित्येवं विस्मय़ं यय़ुः ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
वसिष्ठ उवाच
तेजस्तेजसि सम्पृक्तमेकय़ोनित्वमागतम् ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय १३७
लोमश उवाच
तेजस्वितां च रैभ्यस्य तथेत्युक्त्वा जगाम सा ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
तेजस्विदेशवासाच्च तस्मान्मृत्युभय़ं न नः ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
तेजस्विनं कृष्णमत्यन्तशूरं; युद्धेन यो वासुदेवं जिगीषेत् ||
६५ ख
वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
तेजस्विनं तं विद्वांसो मन्यन्ते तत्त्वदर्शिनः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
तेजस्विनः कुमारस्य शराः परमदारुणाः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
तेजस्विनः सोमय़ुजो विपापा विगतक्लमाः ||
८ ग
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
तेजस्विनस्तव पिता तथैव च तपस्विनः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
तेजस्विनो वीर्यवन्तो न तेषां ज्वलनाद्भय़म् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०
इन्द्र उवाच
तेजस्वी च महात्मा च युद्धे चामितविक्रमः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
तेजस्वी च यशस्वी च नृपेभ्योऽभ्यधिकोऽभवत् ||
५९ ग
वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
तेजस्वीति यमाहुर्वै पण्डिता दीर्घदर्शिनः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
तेजांसि रिपुसैन्यानां मृद्नन्पुरुषसत्तमः |
९ क