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वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
तेजांसि समुपादत्ते निवृत्तः सन्विभावसुः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
तेजांस्येकेन सर्वेषां देवराज हृतानि मे ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
तेजेपुर्वलवान्धीमान्सत्येपुश्चेन्द्रविक्रमः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २१३
भीष्म उवाच
तेजो दमेन ध्रिय़ते न तत्तीक्ष्णोऽधिगच्छति |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
तेजो धैर्यं क्षमा शौचमनुराग स्थितिर्धृतिः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
तेजो माहेश्वरं स्कन्नमग्नौ प्रपतितं पुरा |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
तेजो लौक्यं स सङ्गृह्य तस्मिन्देशे समाविशत् ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय २०२
नारद उवाच
तेजो वलं च देवानां वर्धय़न्ति श्रिय़ं तथा ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
तेजो वाय़ौ तु संसक्तं वाय़ुं नभसि चाश्रितम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
तेजो विग्रहवत्तात शरीरमजहात्तदा ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
तेजो विदधतुश्चोग्रं विस्रव्धौ रणमूर्धनि ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
तेजो वृषो द्युतिधरः सर्वशस्त्रभृतां वरः |
९४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
द्रोण उवाच
तेजो हृतं नो वृत्रेण गतिर्भव दिवौकसाम् ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
तेजोंशानां च सङ्घाताद्भीष्मस्याप्यत्र सम्भवः |
७९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
तेजोघ्नं सर्वभूतानां वरदानाच्च दुःसहम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
तेजोनिवासः स द्वीप इति वै मेनिरे वय़म् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
तेजोपहारी वलहा मुदितोऽर्थो जितो वरः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं; भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
तेजोभिरुदिताः सर्वे महर्षिसमतेजसः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
तेजोमन्युश्च विद्वंस्त्वं जातो रौद्रो महामते ||
८२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
वासुदेव उवाच
तेजोमय़ं दुराधर्षं गाण्डीवं यस्य कार्मुकम् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
श्रीभगवानु उवाच
तेजोमय़ं विश्वमनन्तमाद्यं; यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम् ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
तेजोमय़ो नित्यतनुः पुराणो; लोकाननन्तानभय़ानुपैति |
३४ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैश्रवण उवाच
तेजोराशिं दीप्यमानं हुताशनमिवैधितम् ||
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
तेजोराशिं महात्मानं वलौघममितौजसम् |
२७ क
विराट पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
तेजोराशिरसङ्ख्येय़ो गृह्णीय़ादपि चक्षुषी ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
तेजोवधं सूतपुत्रस्य सङ्ख्ये; प्रतिश्रुत्वाजातशत्रोः पुरस्तात् |
९५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
तेजोवधनिमित्तं तु परुषाण्यहमुक्तवान् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८
शल्य उवाच
तेजोवधनिमित्तं मां सूतपुत्रस्य संय़ुगे ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
तेजोवधमिमं कुर्याद्विभेदय़िषुराहवे |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८
युधिष्ठिर उवाच
तेजोवधश्च ते कार्यः सौतेरस्मज्जय़ावहः |
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
तेजोवधो नः क्रिय़ते प्रत्यक्षेण विशेषतः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
तेजोवलजवोपेता नानारत्नविभूषिताः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
तेजोवलसमाय़ुक्तान्कुलशीलसमन्वितान् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
तेजोवीर्यवलैर्भूय़ाञ्शिखण्डी द्रुपदात्मजः ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
तेजोवीर्यवलोपेतं मनोमारुतरंहसम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
तेजोवीर्यवलोपेता महावलपराक्रमाः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६
वृहस्पतिरु उवाच
तेजोहरं दृष्टिविषं सुघोरं; मा त्वं पश्येर्नहुषं वै कदाचित् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
तेजोऽग्निः पवनः श्वास आपस्ते स्वेदसम्भवाः ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भृगुरु उवाच
तेजोऽग्निश्च तथा क्रोधश्चक्षुरूष्मा तथैव च |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
तेजोय़ुक्तं कृतास्त्रेण शंस तच्चाप्यशेषतः ||
७४ ख
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
तेजोय़ुक्तमपृच्छन्त कस्त्वमाख्यातुमर्हसि ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
तेन कर्णेन ते तात कथमासीत्समागमः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
तेन कामः कृतो मिथ्या व्राह्मणेभ्य इति श्रुतिः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
तेन कार्मुकमुख्येन वाहुवीर्येण चात्मनः |
६ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
तेन कार्यं महत्कार्यमस्माकं द्विजसत्तम |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
तेन कीर्तिमता गुप्तमनीकं दृढधन्वना |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन कूलापहारेण मैत्रावरुणिरौह्यत |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
तेन केतुश्च मे छिन्नो हतौ च पार्ष्णिसारथी |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन कोपाद्वय़ं शप्ता योनौ सम्भवतेति ह |
१३ क