शान्ति पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
तेन क्रीतेन धर्मेण ततो यज्ञः प्रताय़ते ||
१३ ग
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
तेन खल्वसि न व्यापन्नस्तस्मिन्नागभवने |
१७५ क
आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन गच्छामहे व्रह्मन्पथा शीघ्रतरं वय़म् ||
७ ग
आदि पर्व
अध्याय
४६
मन्त्रिण ऊचुः
तेन गत्वा नृपश्रेष्ठ नगरेऽस्मिन्निवेदितम् |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
तेन गन्धवतीत्येव नामास्याः प्रथितं भुवि |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
तेन गर्जसि देवेन्द्र पूर्वं कालहते मय़ि ||
६८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन गोप्यो हि नृपतिः सर्वावस्थो विशां पते ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तेन चक्रे महद्युद्धमभिमन्युररिन्दमः ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७०
व्राह्मण्यु उवाच
तेन चक्षूंषि वस्तात नूनं कोपान्महात्मना |
२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
तेन चाकाशवर्णेन तदाचरत सोऽसिना ||
८० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
तेन चात्मानुशिष्टो मे पुत्रत्वे मुनिसत्तमाः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
तेन चाभ्यर्दितास्त्रासाद्भवेम हि पराङ्मुखाः ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
तेन चास्मि वृता पूर्वं रहस्यविदिते पितुः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
तेन चास्मि वृता पूर्वमेष कामश्च मे पितुः ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
तेन चिच्छेद नृपतेर्भीमः कार्मुकमुत्तमम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
तेन चेन्द्रत्वमापेदे देवानामिति नः श्रुतम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
तेन चैव प्रहस्तादिर्महान्नः स्वजनो हतः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय
४४
शकुनिरु उवाच
तेन चैव मय़ेनोक्ताः किङ्करा नाम राक्षसाः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
तेन चैव विनिष्पिष्टो वेपमानो नृपात्मजः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
तेन चैवातिकोपेन स यज्ञः सन्धितस्तदा |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
तेन चैवातिकोपेन स यज्ञः सन्धितोऽभवत् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
तेन चोत्क्रुष्टशव्देन ज्यानिनादेन तेन च |
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
तेन छन्ने रणे राजन्वाणजालेन भास्वता |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२९
श्रीभगवानु उवाच
तेन जगद्धार्यते ||
५० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
तेन जीवसि राजंस्त्वं निहतास्त्वनुगास्तव ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
तेन जीवसि राजंस्त्वमपराद्धोऽपि मे रणे ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५५
च्यवन उवाच
तेन जीवसि राजर्षे न भवेथास्ततोऽन्यथा ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय
५५
अर्जुन उवाच
तेन जीवसि राधेय़ निहतस्त्वनुजस्तव ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
तेन ज्ञानेन विज्ञाय़ गतिं चाशुभकर्मणाम् |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
तेन ज्यातलघोषेण सर्वे लोकाः समाकुलाः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
तेन ज्यातलघोषेण सर्वे लोकाः समाकुलाः |
४४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तच्च वचः सम्यग्गृहीतं सुमहात्मना ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
तेन तज्जलमादत्तं जरय़त्यग्निमारुतौ |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तत्र प्रदीपः स दीप्यमानो निवापितः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तत्संवृतं दृष्ट्वा ते राजपरिचारकाः |
२१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४७
नारद उवाच
तेन तद्वनमादीप्तमिति मे तापसाव्रुवन् ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तस्थौ स कौरव्य लोकवीरस्य दर्शने ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
तेन तस्मिन्कुमारेण क्रीडता निहतेऽसुरे |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
तेन तस्मिन्विचरता पुरुषेण विशां पते |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
तेन तस्य रथो भाति मय़ूरेण महात्मनः |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तस्याभवत्प्रीतो वृत्तेन स नराधिपः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
तेन तस्याभवत्सख्यं राघवस्य महात्मनः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
तेन ता जातय़ः क्षुद्राः सदानवनिशाचराः |
४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६४
उत्तर उवाच
तेन ता निर्जिता गावस्तेन ते कुरवो जिताः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तिष्ठन्तु नगरे पाण्डवाः शरदां शतम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
तेन तीर्थानि यज्ञाश्च सेवितव्याविपश्चिता ||
१०१ ख
वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन ते क्रिय़तामद्य लाङ्गलं नृपसत्तम |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
तेन ते देवय़ानेन पथा यान्ति महामुने ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३३
भीष्म उवाच
तेन ते देहजालानि रमय़न्त उपासते ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
तेन ते निर्जिताः सर्वे पृथिव्यां सर्वपार्थिवाः |
१५ क