chevron_left  आच्छिद्यन्तोत्तमाङ्गानिarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
आच्छिद्यन्तोत्तमाङ्गानि भल्लैः संनतपर्वभिः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
आच्छिनत्तरसा मध्ये सोममभ्यद्रवत्ततः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
आच्छिनत्ति च रत्नानि विविधान्यपकारिणाम् ||
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
आच्छिन्नं राज्यमाक्रम्य कोपं कस्य न दीपय़ेत् ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
आच्छिन्ने गोधनेऽस्माकमपि देवेन वज्रिणा |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
आच्छेत्तुं वा वलाद्राजन्स कथं दातुमिच्छसि |
५८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
आजं गव्यं च यन्मांसं माय़ूरं चैव वर्जय़ेत् |
८५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
आजगाम किरीटी तु हारकेय़ूरभूषितः ||
९० ख
आदि पर्व
अध्याय १२०
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम गृहानेव मम पुत्राविति व्रुवन् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
आजगाम ततः पार्थो गाण्डीवं विक्षिपन्धनुः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम ततः शुभ्रा दुःषन्तविदिताद्वनात् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
आजगाम ततस्तत्र यत्र राजा स नैषधः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ३०
सूत उवाच
आजगाम ततस्तूर्णं सुपर्णो मातुरन्तिकम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
आजगाम ततो मृत्युः पन्नगं चाव्रवीदिदम् ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय २९०
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम ततो राजंस्त्वरमाणो दिवाकरः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम ततो व्यासो ज्ञात्वा दिव्येन चक्षुषा |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १०१
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम ततोऽपश्यंस्तमृषिं तस्करानुगाः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १३७
लोमश उवाच
आजगाम तदा रैभ्यः स्वमाश्रममरिन्दम ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम तरीं धीमांस्तरिष्यन्यमुनां नदीम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
आजगाम द्विजश्रेष्ठः कृष्णद्वैपाय़नस्तदा ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
आजगाम नरश्रेष्ठ वसिष्ठस्याश्रमं प्रति ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
आजगाम परं मोहं मोहय़न्केशवं रणे ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २७८
मार्कण्डेय़ उवाच
आजगाम पितुर्वेश्म सावित्री सह मन्त्रिभिः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
आजगाम पुनर्द्वीपं स्पर्धय़ा पेततुर्यतः ||
५३ ख
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम पुनर्वीरः शक्रप्रस्थं पुरोत्तमम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय ५३
वृहदश्व उवाच
आजगाम पुनस्तत्र यत्र देवाः समागताः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम पुरं वीरः सव्यसाची परन्तपः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय ११५
अकृतव्रण उवाच
आजगाम भृगुश्रेष्ठः पुत्रं दृष्ट्वा ननन्द च ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महातेजा नगरं नागसाह्वय़म् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
आजगाम महाप्राज्ञः कृष्णद्वैपाय़नस्तदा ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महाभागा तत्र पुण्या सरस्वती ||
१७ ग
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महाभागा सरिच्छ्रेष्ठा सरस्वती ||
२४ ग
वन पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महाभागो वृहदश्वो महानृषिः ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
आजगाम महाराज तव पुत्रवधाय़ वै ||
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
आजगाम महाराज निघ्नञ्शत्रून्सहस्रशः ||
७४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महावाहुरुत्तङ्कश्चैनमव्रवीत् ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महासत्त्वः कृपः शस्त्रभृतां वरः |
१ ख
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
आजगाम महासेनः क्रोधात्सूर्य इव ज्वलन् ||
६२ ख
वन पर्व
अध्याय २४५
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महाय़ोगी पाण्डवानवलोककः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम महाय़ोगी व्यासः सत्यवतीसुतः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय १९८
मार्कण्डेय़ उवाच
आजगाम यतो विप्रः स्थित एकान्त आसने ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा कन्याभिः सह भारत ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा दृष्ट्वा दिव्येन चक्षुषा ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा पाण्डवानवलोककः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा पुनर्गावल्गणिस्तदा ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा पूजय़िष्यंस्तिलोत्तमाम् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा भगवान्स वृहस्पतिः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १६३
गन्धर्व उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा वसिष्ठो भगवानृषिः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम विशुद्धात्मा सह रामेण केशवः |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
आजगाम सभां कर्तुं राजकार्याणि सर्वशः ||
४ ख