द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे युय़ुधानेन तावकाः |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे युय़ुधानेन तावकाः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे संशप्तकगणाः प्रभो |
७७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे सूतपुत्रेण सृञ्जय़ाः |
४४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे सूतपुत्रेण सृञ्जय़ाः |
११७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाः समरे हार्दिक्येन स्म पाण्डवाः |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
ते वध्यमानाश्च नरेन्द्रमुख्या; निर्भिन्ना वै भीमसेनप्रवेकैः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
ते वध्यमानास्तु तदा पार्थेनामिततेजसा |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
ते वध्यमानास्त्रिदशैर्दानवा भीमनिस्वनाः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
ते वध्यमानास्त्रिदशैर्महात्मभि; र्महावलैर्वेगिभिरुन्नदद्भिः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
९९
लोमश उवाच
ते वध्यमानास्त्रिदशैस्तदानीं; समुद्रमेवाविविशुर्भय़ार्ताः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
ते वनेन वनं वीरा घ्नन्तो मृगगणान्वहून् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
ते वराश्वरथव्रातैर्वारणैः सपदातिभिः |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
ते वरेणाभिसंमत्ता वलेन च मदेन च ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
ते वर्धय़ित्वा नृपतिं पाण्डुपुत्रं युधिष्ठिरम् |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
ते वर्म भित्त्वा तस्याशु प्राविशन्मेदिनीतलम् ||
३३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
ते वर्म भित्त्वा पुरुषोत्तमस्य; सुवर्णचित्रं न्यपतन्सुमुक्ताः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
ते वर्म भित्त्वा सुदृढं द्विषत्पिशितभोजनाः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
ते वर्म हेमविकृतं भित्त्वा तस्य महात्मनः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
ते वर्म हेमविकृतं भित्त्वा राज्ञः शिलाशिताः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
ते वलान्यवमृद्नन्तः प्राचरंस्तस्य नैरृताः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९४
कर्ण उवाच
ते वलेन वय़ं राजन्महता चतुरङ्गिणा |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ते वा गावो न पश्यन्ति यदि व स्युः पराजिताः |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय
६६
दुर्योधन उवाच
ते वा द्वादश वर्षाणि वय़ं वा द्यूतनिर्जिताः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
कृष्ण उवाच
ते वा युधि दुराधर्षा भवन्त्वेकस्य सैनिकाः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
ते वाचय़ित्वा पुण्याहमीहय़ित्वा च तं विधिम् |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ते वाणाः समसज्जन्त क्षिप्तास्ताभ्यां तु भारत |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
ते वार्यमाणा गन्धर्वैः साम्नैव वसुधाधिप |
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ते वार्यमाणाः समरे मद्रराज्ञा महारथाः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४८
वासुदेव उवाच
ते वाला धृतराष्ट्रस्य भीष्मस्य विदुरस्य च |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
ते विंशतिपदं गत्वा सम्प्रहारं प्रचक्रिरे |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
ते विंशतिपदे यत्ताः सम्प्रहारं प्रचक्रिरे |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
ते विकर्णं समासाद्य कङ्कवर्हिणवाससः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१७८
वैशम्पाय़न उवाच
ते विक्रमन्तः स्फुरता दृढेन; निष्कृष्यमाणा धनुषा नरेन्द्राः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
ते विक्षिप्तास्ततो देवाः प्रजग्मुर्गरुडार्दिताः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ते विदेहाः कलिङ्गाश्च दाशेरकगणैः सह |
१०८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
ते विद्ध्वा धन्विना तेन धृष्टद्युम्नं पुनर्मृधे |
१९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
ते विधूमाः प्रदीप्ताश्च दीप्यमानाश्च पावकाः |
४१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
ते विनीय़ तमाय़ासं कुरुराजविय़ोगजम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
ते विभिन्नशिरोदेहाः प्रच्यवन्ते दिवौकसः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
ते विभिन्नशिरोदेहाश्चक्रवेगाद्गतासवः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
ते विमानैर्महात्मानो ज्वलितैर्ज्वलनप्रभाः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
५
वासुदेव उवाच
ते विवाहार्थमानीता वय़ं सर्वे यथा भवान् |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ते विवाहुशिरस्त्राणाः प्रहताः कर्णसाय़कैः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
ते विवृद्धा महावीर्याः पृथिवीपतय़ोऽभवन् ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ते विशीर्णरथाश्वेभाः प्राय़शश्च पराङ्मुखाः |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
शम्वर उवाच
ते विश्रव्धाः प्रभाषन्ते संय़च्छन्ति च मां सदा |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
ते विस्मिताः प्रहृष्टाश्च पुत्रसञ्जीवनात्पुनः |
११५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
प्रह्राद उवाच
ते विस्रव्धाः प्रभाषन्ते संय़च्छन्ति च मां सदा |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
ते वीरा रथवेगेन परिवव्रुर्नरोत्तमम् |
४७ क