द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थस्य विज्ञाय़ वरार्थे वचनं प्रभुः |
६३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्था महेष्वासाः सात्वताभिसृतं नृपम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
२५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थाः पञ्च पञ्चेन्द्रकल्पा; स्त्यक्त्वा त्रस्तान्प्राञ्जलींस्तान्पदातीन् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२५
शल्य उवाच
ततः पार्थेन सङ्ग्रामे युध्यमानस्य तेऽनघ |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो धनुर्गृह्य दिव्यं जलदनिस्वनम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो धनुर्गृह्य दिव्यं जलदनिस्वनम् |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो धनुश्छित्त्वा विव्याधैनं स्तनान्तरे |
६५ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो धनुस्तस्य भल्लेन निशितेन च |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो महातेजा विशिखानग्नितेजसः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो महानादं मुञ्चन्वै माधवश्च ह |
२७ क
विराट पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो महावाहुः कर्णस्य धनुरच्छिनत् |
२० क
विराट पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो महावाहुः प्रहस्य स्वनवत्तदा |
८ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो महावाहुरवतीर्य रथोत्तमात् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो महावाहुरसम्भ्रान्तो महामनाः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थो महेष्वासो दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम् |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्थोऽप्यसम्भ्रान्तस्तदस्त्रं प्रतिजघ्निवान् |
४६ क
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थोऽभ्यनुज्ञातो विराटेन महात्मना |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्श्वाद्वृषाङ्कस्य व्रह्मचारी न्यवर्तत |
७४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ततः पार्ष्ण्यङ्कुशाङ्गुष्ठैः कृतिना चोदितो द्विपः |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पावकमव्रूतां प्रहृष्टौ कृष्णपाण्डवौ |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
ततः पाशैस्तदात्मानं गाढं वद्ध्वा महामुनिः |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पास्यसि पानीय़ं हरिष्यसि च भारत ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः पितरमाविश्य पुप्लुवेऽहं महार्णवम् |
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ततः पिता तव क्रुद्धो निशितैः साय़कोत्तमैः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
ततः पितामहः श्रुत्वा सर्वेषां तद्वचस्तदा |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
ततः पितामहः साक्षादभिगम्य महासुरौ |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१७२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पितामहश्चैव लोकपालाश्च सर्वशः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
ततः पितामहस्तत्र सह देवैर्महर्षिभिः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
ततः पितामहो दत्त्वा वरमेतत्तदा तय़ोः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
ततः पितामहो विष्णुं भगवन्तं सनातनम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पितृनिय़ुक्तात्मा पुत्रलोभान्महाय़शाः |
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
ततः पितृवधामर्षाद्रामः परममन्युमान् |
४४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पितॄणां पौत्राणां भ्रातॄणां स्वजनस्य च ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पितॄन्यथान्याय़ं तर्पय़ित्वा यथाविधि |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
ततः पित्रा चिरं स्तुत्वा चिरं चाघ्राय़ मूर्धनि |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
ततः पिनाकी योगात्मा ध्यानय़ोगं समाविशत् |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
१२७
लोमश उवाच
ततः पिपीलिका जन्तुं कदाचिददशत्स्फिजि |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
ततः पिवत्सु तत्कालं देवेष्वमृतमीप्सितम् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
ततः पिष्टं समालोड्य तोय़ेन सह माधव |
७८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
ततः पिष्टरसं तात न मे प्रीतिमुदावहत् ||
७९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
ततः पीत्वा वलभित्सोममग्र्यं; ये चाप्यन्ये सोमपा वै दिवौकसः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२९४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुण्यं द्वैतवनं नृवीरा; निस्तीर्योग्रं वनवासं समग्रम् ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
१०८
लोमश उवाच
ततः पुण्यजला रम्या राज्ञा समनुचिन्तिता |
६ क
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
ततः पुण्यतमं नास्ति त्रिषु लोकेषु भारत |
७४ क
वन पर्व
अध्याय
८७
धौम्य उवाच
ततः पुण्यतमा राजन्सततं तापसाय़ुता |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
ततः पुण्याहघोषेण स्वस्तिवादस्वनेन च |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुण्याहघोषोऽभूद्दिवं स्तव्ध्वेव भारत |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुण्ये शिवे देशे शान्तिं कृत्वा महारथाः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः पुत्रशतं जज्ञे गान्धार्यां जनमेजय़ |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१२७
ऋत्विगु उवाच
ततः पुत्रशतं श्रीमद्भविष्यत्यचिरेण ते ||
१९ ख