chevron_left  तोत्त्रादय़श्चarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
तोत्त्रादय़श्च राजेन्द्र वषट्कारस्तथैव च |
८२ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
तोत्त्रैरिव तदान्योन्यं गदाग्राभ्यां निजघ्नतुः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
तोत्त्रैरिव महानागं कशाभिरिव वाजिनम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
तोत्त्रैरिव महानागं द्रोणं व्राह्मणपुङ्गवम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
तोमरं तु ततो गृह्य स्वर्णदण्डं दुरासदम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
तोमरं तु त्रिभिर्वाणैर्द्रोणश्छित्त्वा महामृधे |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
तोमरं प्रेषय़ामास स्वर्णदण्डं महाधनम् ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
तोमरं व्यसृजत्तूर्णं शक्तिं च कनकोज्ज्वलाम् ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
तोमरं व्यसृजत्तूर्णं सात्यकिं प्रति मारिष ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
तोमरं स द्विधा चक्रे क्षुरप्रेणानिलात्मजः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
तोमरं सैन्धवो राजा पट्टिशं च महाभुजः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
तोमरप्रासनाराचगजाश्वरथय़ोधिनाम् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
तोमराः सोमकलशाः पवित्राणि धनूंषि च ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७४
वैशम्पाय़न उवाच
तोमरानग्निसङ्काशाञ्शलभानिव वेगितान् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
तोमरान्गजिभिर्मुक्तान्प्रतीपानास्थितान्वहून् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
तोमरान्प्राहिणोच्छीघ्रं चतुर्दश शिलाशितान् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
तोमराभिहताः केचिद्वाणैश्च परमद्विपाः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय १७
सूत उवाच
तोमराश्च सुतीक्ष्णाग्राः शस्त्राणि विविधानि च ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
तोमरैः सूर्यरश्म्याभैर्भगदत्तोऽथ सप्तभिः |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
तोमरैरसिभिश्चापि गदामुसलकर्पणैः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
तोरणप्रतिमं शुभ्रं किरीटं मूर्ध्न्यशोभत ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
तोरणस्तारणो वाय़ुः परिधावति चैकतः ||
११५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
तोरणानि च यूपांश्च घटाः पात्रीस्तथेष्टकाः |
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
तोषितो भगवान्यत्र दुर्वासा मे वरं ददौ |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २४५
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़न्प्रणिपातेन व्यासं पाण्डवनन्दनः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास गान्धारी व्यासस्तस्यै वरं ददौ ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास तपसा सा किलोग्रेण शङ्करम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
तोषय़ामास तपसा सा किलोग्रेण शङ्करम् |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास देवेन्द्रं स्वर्गं लेभे ततः प्रभुः ||
२ ख
विराट पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास नकुलो राजानं राजसत्तम ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
तोषय़ामास पितरं शीलेन स्वजनं तथा ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास युद्धेन देवदेवमुमापतिम् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २८९
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ामास शुद्धेन मनसा संशितव्रता ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
तोषय़ित्वा महादेवं निर्मलः स्वर्गमाप्नुय़ात् ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
तोषय़ित्वा शुभान्कामान्प्राप्नुवंस्ते जनार्दन ||
५० ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तोषय़ित्वोपचारेण राजनीतिमधीतवान् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
भीष्म उवाच
तोषय़िष्याम्यहं विप्रं यथा तुष्टो भविष्यति ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५०
नाग उवाच
तोय़ं सृजति वर्षासु किमाश्चर्यमतः परम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
तोय़कर्मणि यं कुन्ती कथय़ामास सूर्यजम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
तोय़कर्मणि सर्वेषां राज्ञामुदकदानिके ||
१८७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
तोय़देषु यथा राजन्भ्राजमानाः शतह्वदाः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
तोय़दो मनुजव्याघ्र स्वर्गं गत्वा महाद्युते |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
तोय़पूर्णैर्विषाणैश्च द्वीपिखड्गमहर्षभैः |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
तोय़पूर्वं प्रदाय़ान्नमतिथिभ्यो विशां पते |
८९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
तोय़प्रदानात्प्रभृति कार्याण्यहमथारभम् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
उत्तङ्क उवाच
तोय़मिच्छामि यत्रेष्टं मरुष्वेतद्धि दुर्लभम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ११२
ऋश्यशृङ्ग उवाच
तोय़ानि चैवातिरसानि मह्यं; प्रादात्स वै पातुमुदाररूपः |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
तोय़ेप्सां तव दुर्धर्ष करिष्ये सफलामहम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
तोय़ेषु भीमं गङ्गाय़ाः प्रक्षिप्य पुरमाव्रजत् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
तौ कथं मद्धिते यत्नं प्रकुर्यातां द्विजोत्तम ||
१५ ख