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द्रोण पर्व
अध्याय २१
धृतराष्ट्र उवाच
असेवितां कापुरुषैः सेवितां पुरुषर्षभैः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
असेश्च पूजा कर्तव्या सदा युद्धविशारदैः ||
८५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६४
इन्द्र उवाच
असैनिकोऽधर्मपरश्चरेथाः; परां गतिं लप्स्यसे चाप्रमत्तः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
असौ कर्णः सुसंरव्धः पाञ्चालानभिधावति |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
असौ कृष्ण महेष्वासः काम्यके मामुपस्थितः |
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
असौ गच्छति कौरव्य द्रौणिरस्त्रभृतां वरः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
असौ चासौ च जानीते राजकोशस्त्वय़ा हृतः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
असौ तिष्ठति कौरव्यो रणमध्ये महारथः ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
असौ तिष्ठति पाञ्चाल्यः श्रिय़ा परमय़ा युतः |
६ क
स्त्री पर्व
अध्याय २४
गान्धार्यु उवाच
असौ तु भूरिश्रवसो माता शोकपरिप्लुता |
३ क
वन पर्व
अध्याय २४९
कोटिकाश्य उवाच
असौ तु यः पुष्करिणीसमीपे; श्यामो युवा तिष्ठति दर्शनीय़ः |
८ क
वन पर्व
अध्याय २४९
कोटिकाश्य उवाच
असौ तु यस्तिष्ठति काञ्चनाङ्गे; रथे हुतोऽग्निश्चय़ने यथैव |
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
असौ दुर्योधनः पार्थ वाजिमध्ये व्यवस्थितः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
असौ दुर्योधनो राजन्विज्ञातो मम लुव्धकैः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
असौ द्रोणो महेष्वासो युय़ुधानेन संय़ुगे |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
असौ धनञ्जय़ाग्निर्हि कोपमारुतचोदितः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
असौ धावति राधेय़ो भीमसेनरथं प्रति |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
असौ निवृत्तो राधेय़ो दृश्यते वानरध्वज |
४२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
असौ भिमो महावाहुः संनिवृत्तश्चमूमुखे |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
असौ भीमो महेष्वासः संनिवृत्तो रणं प्रति ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
असौ मतिमतां श्रेष्ठो य एष जगतः प्रभुः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
असौ मध्ये कृतः षड्भिर्धार्तराष्ट्रैर्महारथैः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
असौ मन्ये न जानीते समय़प्रतिपादनम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १६७
गन्धर्व उवाच
असौ मृत्युरिवोग्रेण दण्डेन भगवन्नितः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३८
श्रीभगवानु उवाच
असौ मय़ा हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
असौ रोषात्प्रचलितो महान्नृपतिसागरः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
असौ वैश्रवणो राजा स्वय़माय़ाति तेऽन्तिकम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
असौ सागरपर्यन्तां भूमिमावृत्य तिष्ठति |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
असौ सुवलपुत्रो नो जघनं पीड्य दंशितः |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
असौ हि चन्द्रमाः क्षीणः किञ्चिच्छेषो हि लक्ष्यते |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४४
व्राह्मण उवाच
असौ हि भगवान्सूर्यो मन्दरश्मिरवाङ्मुखः ||
६ ग
आदि पर्व
अध्याय २०
सूत उवाच
असौ हि राशिः सुमहान्समिद्धस्तव सर्पति ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
असौ हि श्रूय़ते शव्दः शूराणामनिवर्तिनाम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
युधिष्ठिर उवाच
असौम्याः सौम्यरूपेण सौम्याश्चासौम्यदर्शिनः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
असौहृदं परित्यज्य सौहृदे पर्यवस्थिताः ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
अस्कन्दितमनाश्चैव लघ्वाशी देवताश्रय़ः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
अस्तं गच्छति सूर्येऽभूत्सन्ध्याकाले च वर्तति ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
अस्तं गच्छन्यथादित्यः प्रभामादाय़ गच्छति |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
अस्तं गतमिवादित्यं तप्त्वा भारतवाहिनीम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २८०
सावित्र्यु उवाच
अस्तं गते मय़ादित्ये भोक्तव्यं कृतकामय़ा |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
अस्तं गन्तुं यथाकालमिति मे हृदि वर्तते ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
अस्तं गिरिमथारूढे नप्रकाशति भास्करे ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १५९
वैशम्पाय़न उवाच
अस्तं गिरिवरश्रेष्ठं प्रय़यौ गुह्यकाधिपः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६३
राजधर्मो उवाच
अस्तं च सविता यातः सन्ध्येय़ं समुपस्थिता ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
अस्तं पर्वतराजानमेतमाहुर्मनीषिणः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
अस्तं प्राप्य ततः सन्ध्यामतिक्रम्य दिवाकरः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
अस्तं महीधरश्रेष्ठं यिय़ासति दिवाकरः |
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ३९
सूत उवाच
अस्तमभ्येति सविता विषादद्य न मे भय़म् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
अस्तमेति महावाहो त्वरमाणो दिवाकरः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
अस्तमेति हि गाङ्गेय़ो भानुमानिव भारत ||
८ ख