कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सर्वय़ुद्धानि चैतस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वय़ोधेषु चैवास्य सदा वृत्तिरनुत्तमा |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
सर्वय़ोनिषु कौन्तेय़ मूर्तय़ः सम्भवन्ति याः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
सर्वय़ोषिद्वरा कृष्णा क्षय़ं क्षत्रं निनीषति ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
सर्ष्टिचर्मासिनखराः समुद्गरपरश्वधाः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
सरय़ूर्गण्डकी चैव लोहित्यश्च महानदः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
सरय़्वां जनय़त्सिद्धिं भानुं भाभिः समावृणोत् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
सरय़्वां वाहुदाय़ां च गङ्गाय़ामथ नैमिषे |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
सलिलं विप्रमुख्येभ्यो मातङ्गस्रोतसा विभो ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
सलिलादुत्थितो वह्निर्येन व्याप्तं चराचरम् |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
सलिलान्तर्गतः शेते दुर्दर्शः कस्यचित्प्रभो |
५५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
सलिलान्तर्गतः श्वभ्रे महानाग इव श्वसन् ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
सलिलान्तर्गतो राजा धुन्वन्हस्तौ पुनः पुनः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
सलिलावर्तसञ्जातैः पुष्पितैश्च महीरुहैः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
सलिलाशी भवेद्यश्च सदाग्निः संस्कृतो द्विजः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
सलिले जनिते तस्मिन्कौन्तेय़ेन महात्मना |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
सलिलेशदिदृक्षार्थमहमप्युद्यतो दिवः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
सलिलैकार्णवं तात पुरा सर्वमभूदिदम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
सलिलैर्हिमसंस्पर्शैर्हंसकारण्डवाय़ुतैः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१२१
लोमश उवाच
सलोकतां तस्य गच्छेत्पय़ोष्ण्यां य उपस्पृशेत् ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
सलोकतामनुप्राप्तमपश्यत ततोऽसितः ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
सलोहिता दिशश्चासन्खरवाचो मृगद्विजाः |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
सलोहितो रक्तगभस्तिमण्डलो; दिवाकरोऽस्ताभिमुखो यथा तथा ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सवङ्गाङ्गान्सपौण्ड्रोड्रान्सचोलद्रविडान्धकान् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
सवज्रं स्तम्भय़ामास तं वाहुं परिघोपमम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
सवज्रमथ फेनं तं क्षिप्रं वृत्रे निसृष्टवान् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
सवज्रमुद्यतं वाहुं दृष्ट्वा पाशांश्च वारुणान् |
८९ क
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
सवज्राय़सगर्भं तु कवचं तप्तकाञ्चनम् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
सवत्सां पीवरीं दत्त्वा शितिकण्ठामलङ्कृताम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
सवत्सानां महातेजा गतो लोकाननुत्तमान् ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
सवत्साय़ाः पदानि स्म दृश्यन्तेऽद्यापि भारत ||
७७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
सवनान्घनांश्च ||
६० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
सवनान्यानुपूर्व्येण चक्रुः शास्त्रानुसारिणः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
सवरूथै रथैर्भग्नै रथिभिश्च निपातितैः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
सवर्णस्तं च पोषेत सवर्णस्तस्य जाय़ते ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
सवर्णासु तु जातानां समान्भागान्प्रकल्पय़ेत् ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
सवर्णो हि सवर्णानां पशुसञ्ज्ञां करिष्यति |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
सवर्मध्वजशस्त्रैश्च पतितैः संवृतां महीम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
सवर्मभिर्भूषणैस्ते द्राग्भ्राजद्भिरितस्ततः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सवर्मा केकय़ो राजन्द्विधा छिन्नो महाहवे |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
सवलाकाः सखद्योताः सैरावतशतह्रदाः |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
सवस्त्रफेनरत्नौघो मृदङ्गनिनदस्वनः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
सवस्तय़ः सशृङ्गाश्च सप्रासविविधाय़ुधाः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सवाजिरथनागाश्च मृत्युलोकमितो गताः ||
२५ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
सवाजिसूतेष्वसनस्तथापत; द्यथा महावातहतो महाद्रुमः ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
सवाजिसूतेष्वसनान्सकेतना; ञ्जघान नागाश्वरथांस्त्वरंश्च सः |
६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
सवाणः सधनुश्चाहं ससुरासुरमानवान् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
सवाणवर्माभरणाः सगदाः साङ्गदा रणे |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११९
कीट उवाच
सवान्धवः सहामात्यश्चाश्नामि पिशितौदनम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
सवालवृद्धाः कूर्दन्तस्तेषु वृत्तं कथं भवेत् ||
३३ ख