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भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं कुरूणां पाण्डवैः सह |
४४ क
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं कुरूणां पाण्डवैः सह |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं कुरूणां भय़वर्धनम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं कुरूणां सात्वतस्य च |
५४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं कौरवाणां भय़ावहम् |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं भय़ानकम् |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं भय़ानकम् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं भय़ावहम् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं भय़ावहम् ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं विशां पते |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तत्र तत्र महात्मनाम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तव तेषां च भारत |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तव तेषां च भारत |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तव तेषां च भारत |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तव तेषां च भारत ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तावकानां परैः सह ||
६५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तावकानां परैः सह |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं रोमहर्षणम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तेषां तस्य च भारत |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं त्वरतां सर्वधन्विनाम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं तय़ोरत्यद्भुतं नृप |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं द्रौणिराक्षसय़ोर्मृधे |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं नरवारणवाजिनाम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं परस्परवधैषिणाम् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं पुनरेव विशां पते |
५० क
विराट पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रववृते युद्धं पृथिव्यामेकवीरय़ोः |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं भीरूणां भय़वर्धनम् |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं मध्यं प्राप्ते दिवाकरे |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं रात्रौ तद्भरतर्षभ |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
ततः प्रववृते युद्धं वृत्रवासवय़ोः पुनः |
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२७
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं व्यतिषक्तरथद्विपम् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं व्यतिषक्तरथद्विपम् |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं व्यतिषक्तरथद्विपम् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धं श्रान्तवाहनसैनिकम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते युद्धमर्जुनस्य परैः सह ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते राजन्नस्तं गच्छति भास्करे |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रववृते रौद्रः सङ्ग्रामः शोणितोदकः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रविव्यथे सेना पाण्डवी भरतर्षभ |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
ततः प्रविव्यथे सेना पाण्डवी भृशमाकुला |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
ततः प्रविश्य नगरं कृत्वा सर्वाह्णिकक्रिय़ाः |
६७ क
वन पर्व
अध्याय १६९
अर्जुन उवाच
ततः प्रविश्य नगरं दानवांश्च निहत्य तान् |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रविश्य भवनं प्रसुप्तो मधुसूदनः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रविश्य विदुरो धृतराष्ट्रनिवेशनम् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रविश्यानुमते नृपस्य; महद्वेश्म प्राज्ञशूरार्यगुप्तम् |
६ क