द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं समभवन्नागय़ोर्भीमरूपय़ोः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
तय़ोर्युद्धमभूद्घोरं हरिराक्षसवीरय़ोः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धमभूद्राजन्दिनार्धं चित्रमद्भुतम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
तय़ोर्ये त्वन्वय़े जाता भविष्यन्ति वनौकसः |
८० क
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
तय़ोर्वधं समुद्दिश्य विश्वकर्माणमाह्वय़त् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्वलवतोस्तत्र गन्धर्वकुरुमुख्ययोः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्वलात्परित्रातुं तं दावं तु यदा सुराः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
तय़ोर्विज्ञानविदुषोर्द्वय़ोर्जम्वुकपत्रिणोः |
१०४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
प्रह्राद उवाच
तय़ोर्विवदतोः प्रश्नं कथमस्मद्विधो वदेत् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
तय़ोर्विवदतोरेवं समीपमुपचक्रमे |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्विषक्तय़ोः सङ्ख्ये पाञ्चाल्यकुरुमुख्ययोः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्विसृजतोस्तत्र शरजालानि मारिष |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
तय़ोर्विस्पर्धतोरेवं शपथोऽय़मभूत्तदा |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्वेगेन महता पृथिवी समकम्पत |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्व्याससमासाभ्यां शमोपाय़मिमं शृणु ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
तय़ोर्व्रह्मास्त्रय़ोरासीदन्तरा वै समागमः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्हि वीरोत्तमय़ोर्न कश्चि; द्ददर्श तस्मिन्समरे विशेषम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
तय़ोर्हि सर्वमाय़त्तं यत्किञ्चिज्जगतीगतम् ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
नारद उवाच
तय़ोश्च देव्योरुभय़ोर्दृष्टानि भरतर्षभ ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
तय़ोश्च द्रवतोर्विप्रं जगृहे नृपतिर्वलात् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
तय़ोश्च नामनी चक्रुर्द्विजाः सम्पूर्णमानसाः ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
तय़ोश्चकार समय़ं मिथः स पुरुषर्षभः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
तय़ोश्चक्षूंषि रजसा सुपर्णस्तूर्णमावृणोत् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोश्चटचटाशव्दो वभूव सुमहात्मनोः ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
तय़ोश्चाप्यतुला प्रीतिर्वाल्यात्प्रभृति भारत ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
तय़ोश्चाप्यभवत्प्रीतिरतुला मातृकारणात् ||
४४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोश्चिन्ता समभवत्त्रितं गृह्य परन्तप |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोश्चिन्ता समभवद्दृष्ट्वा पशुगणं महत् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोश्चैतदवज्ञानं यत्सा कृष्णा सभां गता |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
तय़ोश्चैतदवज्ञानं यत्सा कृष्णा सभागता |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तत्र शरैर्मुक्तैर्यमदण्डनिभैः शुभैः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तदभवद्युद्धं घोररूपं सुदारुणम् ||
५१ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोस्तदभवद्युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तदभवद्युद्धं रक्षोग्रामणिमुख्ययोः |
५८ क
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
तय़ोस्तपःप्रभावेण दीर्घकालं प्रतापितः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तस्य च तद्युद्धमत्यद्भुतमिवाभवत् |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२७
श्रीभगवानु उवाच
तय़ोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मय़ोगो विशिष्यते ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तु त्वां संनिधौ तद्वदेय़ं; कृत्स्नं मतं वासुदेवार्जुनाभ्याम् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तु धनुषी चित्रे छित्त्वा शौरिर्महाहवे |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तु धनुषी चित्रे भल्लाभ्यां श्वेतवाहनः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
तय़ोस्तु प्रेक्षतोरेव भार्गवाणां कुलोद्वहः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोस्तु भृशसङ्क्रुद्धः शराभ्यां पाण्डुनन्दनः |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोस्तु सेनय़ोरासीदद्भुतः स समागमः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोस्ते वचनाज्जग्मुः सह सर्वैः सुहृज्जनैः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोस्त्वं न समो राजन्भवितासि कदाचन ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोस्त्वमन्तरं विद्धि श्रेय़ांस्ताभ्यां क उच्यते ||
२३ ख