कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैर्द्रौणिमर्दय़ामास पाण्डवः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैर्भूय़ः संशप्तकगणान्वशी |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैः कर्णोऽप्याकर्णनिःसृतैः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैर्भारद्वाजः प्रतापवान् |
११३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैर्मद्रराजो महावलः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैर्मर्मभेदिभिराशुगैः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरशतैस्तीक्ष्णैस्तानरीञ्श्वेतवाहनः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि कर्णमुक्तानि मारिष |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि तैर्विमुक्तानि भस्मसात् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रमुञ्चन्पाण्डवो युधि |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रादुरासन्विशां पते ||
२२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रादुरासन्समन्ततः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रापतन्नर्जुनं प्रति |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रेषय़ामास पाण्ड्यतः |
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि वहूनि भरतर्षभ |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्राणि विमुञ्चन्विवभौ तदा |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण क्षिप्रकारी निशाचरः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण तावुभौ पुरुषर्षभौ |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण द्रोणं विव्याध पार्थिवः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण धनुर्मुक्तेन भारत |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शरसहस्रेण रथं पार्थस्य वीर्यवान् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण शतचन्द्रमपातय़त् |
१४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण संनिवार्य महारथान् |
१०१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण सुप्रय़ुक्तेन पाण्डवः |
४२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रेण सुप्रय़ुक्तेन पाण्डवः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
ततः शरसहस्रैस्तां पाण्डवानां महाचमूम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
ततः शराः प्रापतन्रुक्मपुङ्खाः; शक्त्यः प्रासा मुसलान्याय़ुधानि |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
ततः शराणां नवतीर्नवार्जुनः; ससर्ज कर्णेऽन्तकदण्डसंनिभाः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
ततः शराणां षष्ट्या तु द्रौणिः पार्थमवाकिरत् |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
ततः शरानापततो महात्मा; चिच्छेद वाणैस्तपनीय़पुङ्खैः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरान्वै सृजतो महारणे; योधांश्च राजन्नय़तो यमाय़ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शरीरं लोकस्थं स्थापय़ित्वा पितामहः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः शरीरात्स्कन्दस्य पुरुषः काञ्चनप्रभः |
२४ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शरीरे रामस्य वासुदेवस्य चोभय़ोः |
३१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२१
गान्धार्यु उवाच
ततः शरेणापहृतं शिरस्ते; धनञ्जय़ेनाहवे शत्रुमध्ये ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
ततः शरैर्दीप्तमुखैः पत्रितैरनुमन्त्रितैः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
ततः शरैर्भीमतरैरविध्यत्त्रिभिराहवे |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
ततः शरैर्महाराज रुक्मपुङ्खैः शिलाशितैः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
ततः शरैर्हेमपुङ्खैः सगदं रथिनां वरम् |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
ततः शरौघैः प्रदिशो दिशश्च; रविप्रभा कर्णरथश्च राजन् |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ततः शरौघैर्निशितैः किरीटिना; नृदेहशस्त्रक्षतलोहितोदा |
१२१ क
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
ततः शर्यातिसैन्यस्य शकृन्मूत्रं समावृणोत् ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यः कृपश्चैव चित्रसेनश्च भारत |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यः परिष्वज्य सुतं ते वाक्यमव्रवीत् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यरथं तूर्णमास्थाय़ हतवाहनः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यस्य तनय़ं सहदेवोऽसिनावधीत् ||
३८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यास्थितं राजन्कर्णः स्वरथमुत्तमम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्ये निपतिते मद्रराजानुजो युवा |
५९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शल्यो महाराज कृत्वा कदनमाहवे |
१० क