शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
हेमपट्टपरिक्षिप्तामुल्कां प्रज्वलितामिव |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
हेमपुङ्खा महाराज भीमसेनधनुश्च्युताः |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
हेमपुङ्खाञ्शिलाधौतान्कर्णचापच्युताञ्शरान् |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
हेमपुङ्खान्सुनिशिताञ्शरांस्तान्हि ववर्ष सः ||
३२ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
हेमपुङ्खास्त्रिपर्वाणो राज्ञ एते महाशराः ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
हेमपुङ्खैः शिलाधौतैः कङ्कवर्हिणवाजितैः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
हेमपृष्ठं धनुश्चास्य ददृशे चरतो दिशः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
हेमपृष्ठेन धनुषा हस्तिकक्ष्येण केतुना ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
हेमभाण्डपरिच्छन्नान्सुमृष्टमणिकुण्डलान् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
हेममाली ततो वाली तारां ताराधिपाननाम् |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
हेममाली रुक्मकण्ठः प्रदीप्त इव पावकः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
हेमरूप्यप्रमृष्टानां वाससां शिल्पिनिर्मिताः |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
हेमरूप्यमय़ैः शृङ्गैर्नानौषधिविदीपितान् |
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
हेमवर्णमुपासीनं यय़ातिमिव नाहुषम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
हेमशृङ्गी रूप्यखुरा दत्त्वा चक्रे प्रदक्षिणम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
हेमो हेमकरो यज्ञः सर्वधारी धरोत्तमः ||
६२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
हेमोत्तमप्रतिच्छन्नैर्हय़ैर्वातसमैर्जवे |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
हेलमाना नरव्याघ्र स्वस्थास्तस्योपशृण्वते |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
हेषता कम्पिता भूमिर्लोकाश्च सकलास्त्रय़ः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
हेषतां चैव शव्देन न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||
१५ ग
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
हेषितस्वनमिश्रैश्च क्ष्वेडितास्फोटितस्वनैः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
हेहय़स्तालजङ्घश्च वत्सेषु जय़तां वर ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
हेहय़स्य तु पुत्राणां दशसु स्त्रीषु भारत |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वं च सहामात्यं हन्तुमभ्यागतः स्वय़म् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वं निहतं दृष्ट्वा विकीर्णमिव पर्वतम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वः प्रममाथैको महावातोऽम्वुदानिव ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वः प्राप्तवान्मृत्युं सूतपुत्रेण सङ्गतः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वः प्रय़यौ तूर्णं विव्याध च शितैः शरैः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
हैडिम्वश्चाप्युपाय़ेन शक्त्या कर्णेन घातितः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वस्तु ततो राजन्दुर्मुखं शत्रुतापनम् |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वस्याभिघातेन मोहो मामाविशन्महान् ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
हैडिम्वेय़ परिश्रान्ता तव मातापराजिता |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वो भरतश्रेष्ठ शरैर्विव्याध सप्तभिः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वो युध्यते नूनं राज्ञा दुर्योधनेन ह ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वो राक्षसं विद्ध्वा युद्धे पञ्चाशता शरैः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
हैडिम्वो राक्षसेन्द्रस्तु भगदत्तं समाद्रवत् |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
हैमं चन्द्रार्कसङ्काशं कवचं यस्य दृश्यते |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
ऋषय़ ऊचुः
हैमानीमानि जानीमः प्रतिवुद्धाः स्म जागृमः ||
२४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
हैरण्यांस्त्रिनलोत्सेधान्पर्वतानेकविंशतिम् |
१३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
हैरण्यान्पतितान्दृष्ट्वा मत्स्यान्मकरकच्छपान् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
हैरण्यान्योजनोत्सेधानाय़तान्दशय़ोजनम् |
८५ क
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
हैरण्यौ भवतो वाहू श्रुतिर्भवति पार्थिव |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१८२
वैशम्पाय़न उवाच
हैहय़ानां कुलकरो राजा परपुरञ्जय़ः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
हैहय़ानां कुले जातः सुमित्रो मित्रनन्दनः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
हैहय़ानां कुले जातास्ते संरक्षन्तु मां मुने ||
६६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
हैहय़ानामुदावर्तो नीपानां जनमेजय़ः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
हो हि विश्वासमर्थेषु शरीरे वा शरीरभृत् |
९१ क
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
होता च यत्तः स जुहाव मन्त्रै; रथो इन्द्रः स्वय़मेवाजगाम ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
होता चैवात्र वीभत्सुः संनद्धः स कपिध्वजः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
होता वाक्यं नातिहृष्टान्तरात्मा; कर्मण्यस्मिंस्तक्षको नैति तावत् ||
३ ख