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शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज धर्मराजं युधिष्ठिरम् |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज धृष्टद्युम्नस्य संय़ुगे |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज निर्विद्धस्तैर्महारथैः |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज सर्वांस्तान्दशभिः शरैः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज स्वस्रीय़ौ रथिनां वरौ |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो रणे क्रुद्धः पीने वक्षसि तोमरम् |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्दः समभवत्तव सैन्यस्य मारिष |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शव्दः समभवत्समुद्रस्येव पर्वणि |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्देन महता प्रचकम्पे वसुन्धरा ||
४४ ख
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शव्देन महता भर्त्सय़न्तौ परस्परम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय २७०
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः शव्दो महानासीत्तुमुलो लोमहर्षणः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्दो महानासीत्पुत्राणां तव भारत |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शव्दो महानासीत्सर्वेषामेव भारत |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्दो महानासीत्सेनय़ोरुभय़ोरपि |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्दो महानासीत्सैन्यानां तव भारत |
७५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
ततः शव्दो महानासीद्युय़ुधानरथं प्रति ||
५ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शव्दो महानासीद्वसुदेवस्य वेश्मनि |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शव्दो महाराज दशाशाः प्रतिपूरय़न् |
११ क
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
ततः शशाप तान्कोपात्ते शप्ताश्चेतनां जहुः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
ततः शस्त्रं समुत्सृज्य निर्ममो गतचेतनः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शस्त्रभृतां श्रेष्ठ पृथिवीं पालय़िष्यसि ||
३१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
ततः शस्त्राणि ते सर्वे समुत्सृज्य महीतले |
५९ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
ततः शाकम्भरीत्येव नाम तस्याः प्रतिष्ठितम् ||
१३ ग
सभा पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शाकलमभ्येत्य मद्राणां पुटभेदनम् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शान्तनवं भीष्मं प्राञ्जलिर्धृतराष्ट्रजः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवः क्रुद्धः शरैः संनतपर्वभिः |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शान्तनवो धीमान्सत्यवत्यामजाय़त |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मः कृपश्च रथिनां वरः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मः श्रुत्वा तं निनदं रणे |
९७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मः सैन्यं दृष्ट्वाभिविद्रुतम् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो दुराधर्षः प्रतापवान् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो दुर्योधनममर्षणम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो निर्ययौ सेनय़ा सह |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो भरतानां पितामहः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो रथघोषेण नादय़न् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो वीभत्सुं नाभ्यवर्तत |
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततः शान्तनवो भीष्मो वीभत्सुं नाभ्यवर्तत ||
४९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३८
कुन्त्यु उवाच
ततः शापभय़ाद्विप्रमवोचं पुनरेव तम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
ततः शारद्वतं राजा सव्रीडमिदमव्रवीत् |
९६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
ततः शारद्वतीपुत्रः प्रेषय़ामास भारत |
९५ क
विराट पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शारद्वतो वाक्यमित्युवाच कृपस्तदा |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
ततः शारद्वतोऽष्टाभिः प्रत्यविध्यद्युधिष्ठिरम् |
८४ क
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
ततः शार्ङ्गं धनुःश्रेष्ठं करात्प्रपतितं मम |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
ततः शालूकिनीं गत्वा तीर्थसेवी नराधिप |
११ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
ततः शाल्वं गदां गुर्वीमाविध्यन्तं महाहवे |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः शाल्वः स्वनगरं प्रय़यौ भरतर्षभ ||
३९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
ततः शास्त्रार्थतत्त्वज्ञो वुद्धिसामर्थ्यमात्मनः |
१९१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
ततः शिखण्डिनो माता यथातत्त्वं नराधिप |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
ततः शिखण्डी कुपीतः शरैः सप्तभिराहवे |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
ततः शिखण्डी गाङ्गेय़मय़ुध्यन्तं महाहवे |
११ क