आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
ततः सञ्जाय़ते निष्ठा जन्मैतत्सप्तधा विदुः ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
ततः सञ्जाय़ते रूपं ततः स्पर्शोऽभिजाय़ते ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
ततः सञ्जाय़ते शव्दः संशय़स्तत्र जाय़ते |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सञ्जीवनीं विद्यां प्रय़ुज्य कचमाह्वय़त् |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
ततः सञ्जीवितस्तेन वकराजस्तदानघ |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सञ्ज्ञां पुनर्लव्ध्वा स राजा वभ्रुवाहनः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सञ्ज्ञाप्य तुरगं विधिवद्याजकर्षभाः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ततः सञ्जय़यानाख्यं पर्व ज्ञेय़मतः परम् |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्कृत्य वार्ष्णेय़ं विराटः पृथिवीपतिः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
ततः सत्त्वं जहौ धीमांस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्त्वान्युपाक्रामन्वहूनि च महान्ति च |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८१
भृगुरु उवाच
ततः सत्यं च धर्मं च तपो व्रह्म च शाश्वतम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
ततः सत्यजितं तीक्ष्णैर्दशभिर्मर्मभेदिभिः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
ततः सत्यजितश्चापं छित्त्वा द्रोणो वृकस्य च |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
ततः सत्यप्रतिज्ञो वै स पक्षी प्रहसन्निव |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सत्यवतः काय़ात्पाशवद्धं वशं गतम् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्यवती काले वधूं स्नातामृतौ तदा |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्यवती चिन्तय़ामास |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्यवती दीना कृपणा पुत्रगृद्धिनी |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
ततः सत्यवती पुत्रं जनय़ामास भार्गवम् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्यवती भीष्मं वाचा संसज्जमानय़ा |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
ततः सत्यवती हृष्टा मातरं प्रत्यभाषत |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सत्यवतीं भीष्मः कौसल्यां च यशस्विनीम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
ततः सदश्वांश्चतुरः कुलशीलसमन्वितान् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सदारः सामात्यः सपुत्रः ससुहृज्जनः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
ततः सन्तापितो लोको मत्प्रसूतेन तेजसा |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
मतङ्ग उवाच
ततः सन्तापय़ामास विवुधांस्तपसान्वितः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
ततः सन्दर्शनेऽतिष्ठं रामस्यातितपस्विनः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सन्दर्शय़ामास कन्याय़ै रूपमात्मनः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सन्दर्शय़ामास स्वरूपं भगवान्हरः |
४० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सन्धाय़ ते सर्वे वाक्यान्यथ समासतः |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ नवतिं निमेषान्नतपर्वणाम् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ नाराचं रुक्मपुङ्खं शिलाशितम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ विमलान्भल्लान्कर्मारपाय़ितान् |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ विशिखान्पञ्च भारत दुःसहान् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्धाय़ वै तीक्ष्णं शरं परमदारुणम् |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सन्धाय़ शक्रेण पप्रच्छुर्नृपतिं वसुम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
ततः सन्ध्यां समासाद्य विद्यातीर्थमनुत्तमम् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ततः सन्ध्यामुपास्यैव वीरौ वीरावसादने |
८ क
वन पर्व
अध्याय
९२
लोमश उवाच
ततः सपत्नाञ्जय़ति समूलस्तु विनश्यति ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सपुत्रः सिद्धार्थो भुङ्क्ष्व भोगान्परन्तप ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
ततः सप्त रथान्वीरः स्यालानां तव भारत |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सभां करिष्यामि पाण्डवाय़ यशस्विने |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सभां समासाद्य केशवस्यानुय़ाय़िनः |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
ततः सभार्यं नृपतिं सामात्यं सपुरोहितम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
ततः सभार्यः प्रणतस्तमुवाच वृहद्रथः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सभाय़ा निर्गम्य मन्त्रय़ामास कौरवः |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सभ्याः कुरुराजस्य तत्र; वाक्यं सर्वे प्रशशंसुस्तदोच्चैः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१९
भीष्म उवाच
ततः समतिचक्राम मलय़ं नाम पर्वतम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
ततः समन्तात्पश्यामि शरजालेन वेष्टितम् |
१२ क