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शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
सप्त वातांस्तथा शेषान्सप्तधा विधिवत्पुनः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
सप्त विप्रांस्ततो भोज्ये युगपत्समुपानय़त् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
सप्त वीरान्महेष्वासानग्रानीके व्यपोथय़त् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
सप्त व्रह्माण इत्येष पुराणे निश्चय़ो गतः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सप्त श्लोकसहस्राणि तथा नव शतानि च |
९६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
सप्त सप्त च नागांस्तान्वैजय़न्तीश्च सध्वजाः |
७३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
सप्त सप्तर्षय़ः सिद्धा वसिष्ठप्रमुखाः सह ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
सप्त स्त्रिय़स्तत्र वसन्ति सद्यो; अवाङ्मुखा भानुमत्यो जनित्र्यः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
सप्तकः पितृवंशस्तु पूर्वदृष्टः स्वय़म्भुवा ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
सप्तकृत्सोमवर्चाश्च विश्वकृत्कविरेव च ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
सप्तगङ्गे त्रिगङ्गे च इन्द्रमार्गे च तर्पय़न् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
सप्तगङ्गे त्रिगङ्गे च शक्रावर्ते च तर्पय़न् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
सप्तगोदावरे स्नात्वा निय़तो निय़ताशनः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
सप्तजातिषु मुख्यत्वाद्योगानां सम्पदं गतः ||
३९ ग
आदि पर्व
अध्याय २२३
द्रोण उवाच
सप्तजिह्वोऽनलः क्षामो लेलिहानोपसर्पति ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
सप्ततन्तून्वितन्वाना यमुपासन्ति याजकाः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
सप्ततिं च सहस्राणि वर्षाणां दिवि मोदते ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
सप्तत्या विशिखानां वै दुर्योधनमपीडय़त् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
सप्तत्या सात्यकिं विद्ध्वा तुरगांश्च त्रिभिस्त्रिभिः |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
सप्तदशेमान्राजेन्द्र मनुः स्वाय़म्भुवोऽव्रवीत् |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
सप्तधा प्रविभागं तु कलशस्थं जगाम ह |
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
सप्तप्रकृति चाष्टाङ्गं शरीरमिह यद्विदुः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
सप्तभिर्दिवसैः खात्वा दृष्टो धुन्धुर्महावलः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
सप्तभिर्द्रौपदेय़ांश्च त्रिभिर्विव्याध सात्यकिम् |
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
सप्तभिर्निशितैर्वाणैरनय़द्यमसादनम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
सप्तभिश्च शितैर्वाणैः पौरवं द्रौणिरार्दय़त् |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४५
व्यास उवाच
सप्तभिस्त्वन्वितः सूक्ष्मैश्चरिष्णुरजरामरः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सप्तमं कापिलं वर्षं सप्तैते वर्षपुञ्जकाः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
सप्तमं भारते पर्व महदेतदुदाहृतम् |
१६६ क
वन पर्व
अध्याय २२१
स्कन्द उवाच
सप्तमं मारुतस्कन्धं पालय़िष्याम्यहं प्रभो |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
सप्तमं मारुतस्कन्धं रक्ष नित्यमतन्द्रितः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
याज्ञवल्क्य उवाच
सप्तमं सर्गमित्याहुरेतदैन्द्रिय़कं स्मृतम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
सप्तमाच्चापि दिवसादमावास्या भविष्यति |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
सप्तमातृगणाश्चैव समाजग्मुर्विशां पते |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २०१
व्याध उवाच
सप्तमी तु भवेद्वुद्धिरहङ्कारस्ततः परम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
सप्तमी वुद्धिरित्याहुः क्षेत्रज्ञः पुनरष्टमः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३९
व्यास उवाच
सप्तमीं वुद्धिमेवाहुः क्षेत्रज्ञं पुनरष्टमम् ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
सप्तमीमपराह्णे वै तथा नस्तैः समाहितम् |
११ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
सप्तमे दिवसे चैव रवौ विमल उद्गते |
१२ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
सप्तमे दिवसे प्राय़ाद्रथमारुह्य सत्वरः |
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
सप्तमेन च भल्लेन नीलं विव्याध वक्षसि |
३३ क
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
सप्तमेऽव्दे गते चापि प्राच्यवत्स महाकविः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ३७
सूत उवाच
सप्तमेऽहनि तं पापं तक्षकः पन्नगोत्तमः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
सप्तरात्रदशाहारो द्वादशाहार एव च |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
सप्तरात्रादितः पापं पश्य मे तपसो वलम् ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय ३७
शृङ्ग्यु उवाच
सप्तरात्रादितो नेता यमस्य सदनं प्रति |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
सप्तरात्रेण नाभागः पृथिवीं प्रतिपेदिवान् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
सप्तर्षिपत्न्यः षड्देव्यस्तत्सकाशमथागमन् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २२४
मन्दपाल उवाच
सप्तर्षिमध्यगं वीरमवमेने च तं मुनिम् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
सप्तर्षींश्च वहूञ्ज्ञात्वा राजर्षींश्च परन्तप ||
२८ ख