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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः समेत्य राजानं धृतराष्ट्रमरिन्दमौ |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततः समेय़तुः सङ्ख्ये त्वरितौ नरराक्षसौ |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
ततः सम्पद्यतेऽन्येषु लोकेष्वप्रतिमः सदा |
६४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ततः सम्पातिनो हंसास्त्वरिता मानसौकसः |
९१ क
वन पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
ततः सम्पीड्यमानास्ते क्रोधाविष्टा महासुराः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्पीड्यमानास्ते वलेन महता तदा |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
ततः सम्पूजितः सर्वैः सम्प्रहृष्टतनूरुहः |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
अश्व उवाच
ततः सम्पूजितो नागैस्तत्रोत्तङ्कः प्रतापवान् |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
ततः सम्पूज्य तौ विप्रं विश्वस्तौ जग्मतुर्गृहान् ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्पूज्यमानः स विवेश भवनं शुभम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
ततः सम्पूजय़ामास काश्यपो हरिवाहनम् |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततः सम्प्रद्रुतं सङ्ख्ये रथं दृष्ट्वा महारथः |
४० क
वन पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्रस्थितो राजा कौन्तेय़ो भूरिदक्षिणः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्राप्य शैलाग्रं वीक्षमाणा महारथाः |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्रेक्ष्य तं क्रुद्धं कालान्तकय़मोपमम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
ततः सम्प्रेषय़द्यन्ता सैन्धवांस्तान्महाजवान् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास दशार्णाधिपतेर्नृप |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास द्रुपदोऽपि महात्मने |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास मित्राणाममितौजसाम् |
४ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास रत्नानि विविधानि च |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामास विराटः सह वान्धवैः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
ततः सम्प्रेषय़ामासुर्यादवं नागसाह्वय़म् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
ततः सम्प्रेषय़ेद्राष्ट्रे राष्ट्राय़ाथ च दर्शय़ेत् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
ततः सम्भवपर्वोक्तमद्भुतं देवनिर्मितम् |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
ततः सम्भूय़ विवुधास्तान्हन्तुं कृतनिश्चय़ाः |
१४३ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
ततः सम्भूय़ सर्वाभिः क्षत्रिय़ाभिः समन्ततः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वा भीष्मद्रोणपुरोगमाः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वा समकम्पत वाहिनी |
६८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वाः कुरवः कुरुसत्तम |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वाः पाण्डवाः पाण्डुपूर्वज |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वाः पाण्डवाः पाण्डुपूर्वज |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वाः पुत्रास्तव विशां पते |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
ततः सरथनागाश्वाः समकम्पन्त सृञ्जय़ाः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सरस्वती शप्ता विश्वामित्रेण धीमता |
३७ क
वन पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सरस्वतीकूले समेषु मरुधन्वसु |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १६३
गन्धर्व उवाच
ततः सराष्ट्रं मुमुदे तत्पुरं परय़ा मुदा |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
ततः सर्पाः समापेतुः प्रदीप्ते हव्यवाहने |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १०
शल्य उवाच
ततः सर्वं करिष्यामि यदूचुर्मां द्विजर्षभाः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय ७५
दमय़न्त्यु उवाच
ततः सर्वं यथावृत्तं दमय़न्त्या नलस्य च |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ४८
सूत उवाच
ततः सर्वं यथावृत्तमाख्याय़ भुजगोत्तमः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
ततः सर्वं समानीय़ तच्च शय़्यासनं मुनिः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वमहीपानां क्षोभय़ित्वा वरूथिनीम् |
२४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
ततः सर्वमिदं स्वस्थं वभूव पुनरेव ह |
२३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्ववलेनापि यच्चैतन्न शशाक सः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वस्य रङ्गस्य समुत्पिञ्जोऽभवन्महान् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सर्वस्य रङ्गस्य हाहाकारो महानभूत् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वस्य सैन्यस्य तावकस्य विशां पते |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वस्य सैन्यस्य तावकस्य विशां पते |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वस्य सैन्यस्य नादः समभवन्महान् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वस्य सैन्यस्य निस्वनस्तुमुलोऽभवत् |
२८ क