वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
ततः ससर्ज तं रामः शरमप्रतिमौजसम् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
ततः सस्यानि रोहन्ति येन वर्तय़ते जगत् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सहस्रं विप्राणां चतुर्वेदविदां तथा |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
ततः सहस्रं विप्राणां विदुषां समलङ्कृतम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सहस्रशो राजन्नरा नगरवासिनः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सहस्राणि गवां प्रदाय़; तीर्थेषु तेष्वम्वुधरोत्तमस्य |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
ततः सहाय़ान्पक्षं च सर्वमेवानुसारय़ेत् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
ततः सहाय़ान्सोत्साहाँल्लप्स्यसेऽव्यसनाञ्शुचीन् ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सहैव कन्याभिर्द्रौपदी राजवेश्म तत् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
ततः सा कथय़ामास नहुषस्य विचेष्टितम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
७२
वृहदश्व उवाच
ततः सा केशिनी गत्वा दमय़न्त्यै न्यवेदय़त् |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा चारुसर्वाङ्गी तमुपेत्योरगात्मजा |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
ततः सा चिन्तय़ामास मत्कृते दुःखितावुभौ |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
ततः सा जनय़ामास जमदग्निं सुतं शुभम् ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा जनय़ित्वा तौ विशस्ता मत्स्यघातिना |
५३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा तपसोग्रेण पीडय़ित्वात्मनस्तनुम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
ततः सा तीव्रशोकार्ता प्रदीप्तेव च मन्युना |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
ततः सा त्वरितं गत्वा तत्सर्वं प्रत्यवेदय़त् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
ततः सा दर्शनीय़ानि महार्हाणि तनूनि च |
९ क
वन पर्व
अध्याय
६६
वृहदश्व उवाच
ततः सा नचिरादेव विदर्भानगमच्छुभा |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा नर्तनागारे धनञ्जय़मपश्यत |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सा नारदवचो विमृशन्ती तपस्विनी |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
ततः सा निय़ता भूत्वा ऋतुकाले मनस्विनी |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१०३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा पट्टमादाय़ कृत्वा वहुगुणं शुभा |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
ततः सा पश्यतां तेषां महर्षीणामनिन्दिता |
१६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा पुण्डरीकाक्षमामन्त्र्य पुरुषोत्तमम् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
ततः सा पुनरेवाथ कन्या रुद्रमुवाच ह |
९ क
वन पर्व
अध्याय
९५
लोमश उवाच
ततः सा प्राञ्जलिर्भूत्वा लज्जमानेव भामिनी |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
ततः सा भरती सेना वध्यमाना किरीटिना |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
ततः सा भारती सेना मणिहेमविभूषिता |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
ततः सा भारती सेना वध्यमाना किरीटिना |
४२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
ततः सा मन्युनाविष्टा ज्येष्ठा काशिपतेः सुता |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
ततः सा महती सेना कलिङ्गानां जनेश्वर |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
ततः सा महती सेना प्राद्रवन्निशि भारत |
३२ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
ततः सा राक्षसी राजन्विस्मय़ोत्फुल्ललोचना |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
ततः सा राममभ्येत्य जननी मे महानदी |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
ततः सा वाष्पकलय़ा वाचा दुःखेन कर्शिता |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
ततः सा वाष्पकलय़ा वाचा दुःखेन कर्शिता |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
२०
सूत उवाच
ततः सा विनता तस्मिन्पणितेन पराजिता |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ततः सा विप्रहाय़ाथ पूर्वरूपं हि योगतः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा विह्वलेवासीत्कन्या सूर्यस्य तेजसा |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा व्रीडिता वाला तदा सूर्यमथाव्रवीत् |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
ततः सा शुशुभे सेना निश्चेष्टावस्थिता नृप |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
ततः सा शोकसन्तप्ता भर्तृव्यसनदुःखिता |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा समितिः सर्वा राज्ञाममिततेजसाम् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा सर्वमाचष्ट यथावृत्तं प्रवेपती |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सा सहसा वाला तच्छ्रुत्वा दारुणं वचः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
ततः सा सहसा वाहांस्तव पुत्रस्य संय़ुगे |
५४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
ततः सांनिध्यमध्यापि माहिष्मत्यां विभावसोः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ततः सांय़मनिः क्रुद्धः पार्षतं परवीरहा |
३५ क