शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
जनकस्त्वभिसंरक्तः कापिलेय़ानुदर्शनात् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
जनकस्य च संवादं सुलभाय़ाश्च भारत ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
जनकस्य तु राजर्षेः कूपस्त्रिदशपूजितः |
९५ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
जनकस्येह विप्रर्षे विकर्मस्थो न विद्यते |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
जनको जनदेवस्तु ज्ञापितः परमर्षिणा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
जनको जनदेवस्तु मिथिलाय़ां जनाधिपः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
जनको मैथिलो राजा महात्मा सर्वतत्त्ववित् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५३
भीष्म उवाच
जनको युवनाश्वश्च वृषादर्भिः प्रसेनजित् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
जनकोऽप्युत्स्मय़न्राजा भावमस्या विशेषय़न् |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
जनक्षय़ोऽय़ं नृपते कृतो दैववलात्कृतैः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
जननी च किमर्थं ते रणभूमिमुपागता |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
जननी निर्ययौ भीता पुरस्कृत्यार्घ्यमुत्तमम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
जननीषु च वर्तन्ते ये न सम्यग्युधिष्ठिर |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
जननो जनजन्मादिर्भीमो भीमपराक्रमः ||
११४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
जनन्या समुपाघ्राताः परिष्वक्ताश्च ते नृपम् |
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
३५
सूत उवाच
जनन्याः शापजं देव ज्ञातीनां हितकाङ्क्षिणः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
जनन्यास्तद्वचः श्रुत्वा तदाप्रभृति शत्रुहन् |
८५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
जनन्यास्तव कल्याणि मा भूद्वै प्रणय़ोऽन्यथा ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
जनप्रवादान्सुवहूनिति शृण्वन्नराधिपः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
जनमेजय़ं च विख्यातं पुत्रांश्चास्यानुशुश्रुमः |
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
जनमेजय़ं तं भिक्षामो यज्ञस्ते न भवेदिति ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
जनमेजय़ः खल्वनन्तां नामोपय़ेमे माधवीम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
३४
सूत उवाच
जनमेजय़ः पाण्डवेय़ो यतोऽस्माकं महाभय़म् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
जनमेजय़ः पारिक्षितः सह भ्रातृभिः कुरुक्षेत्रे दीर्घसत्रमुपास्ते |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
जनमेजय़ः प्रसन्नात्मा सम्यक्सम्पूज्य तं मुनिम् ||
१८२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़ः शिखण्डी च दौर्मुखिश्च यशोधनः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़ः शिखण्डी च प्रवीराश्च प्रभद्रकाः ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़ः शिनेर्नप्ता वहवश्च प्रभद्रकाः ||
६६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़श्च पाञ्चाल्यः कर्णं विव्याध साय़कैः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
जनमेजय़स्तु राजर्षिर्दृष्ट्वा तमृषिमागतम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
४८
शौनक उवाच
जनमेजय़स्य के त्वासन्नृत्विजः परमर्षय़ः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
जनमेजय़स्य तं यज्ञं सर्वैः समुदितं गुणैः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
जनमेजय़स्य तनय़ा भुवि ख्याता महावलाः |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय
११
डुण्डुभ उवाच
जनमेजय़स्य धर्मात्मन्सर्पाणां हिंसनं पुरा ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
जनमेजय़स्य भ्रातृभिरभिहतोऽस्मीति ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
ऋषय़ ऊचुः
जनमेजय़स्य यां राज्ञो वैशम्पाय़न उक्तवान् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१८
सूत उवाच
जनमेजय़स्य राजर्षेः पाण्डवेय़स्य धीमतः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
जनमेजय़स्य राजर्षेः स तद्यज्ञसदस्तदा |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
जनमेजय़स्य राजर्षेः सर्पसत्रे महात्मनः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
जनमेजय़स्य वो यज्ञे धक्ष्यत्यनिलसारथिः ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
जनमेजय़स्य वो यज्ञे धक्ष्यत्यनिलसारथिः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़स्य समरे त्वराय़ुक्तो महारथः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३३
वासुकिरु उवाच
जनमेजय़स्य सर्पाणां विनाशकरणाय़ हि ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
जनमेजय़ात्तु वपुष्टमाय़ां द्वौ पुत्रौ शतानीकः शङ्कुश्च ||
९४ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
जनमेजय़ादय़ः सप्त तथैवान्ये महावलाः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
जनमेजय़ेन पृष्टः सन्व्राह्मणैश्च सहस्रशः |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय
५३
शौनक उवाच
जनमेजय़ेन यत्पृष्टः कृष्णद्वैपाय़नस्तदा ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़ो गदाय़ोधी पार्वतीय़ः प्रतापवान् |
७० क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
जनरूपिणय़ोर्ज्येष्ठमृक्षमाहुर्जनाधिपम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१३
भीष्म उवाच
जनवादमृषावादस्तुतिनिन्दाविवर्जनम् |
११ क