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आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
ततस्ते ऋत्विजस्तस्य शास्त्रतो द्विजसत्तम |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
ततस्ते कथय़ामासुः कथास्तास्ता मनोरमाः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
ततस्ते काल्यमुत्थाय़ तस्मै राज्ञे न्यवेदय़न् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते कुरवः सर्वे साधु साध्विति चाव्रुवन् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते कोपितास्तेन शरैराशीविषोपमैः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते क्षत्रिय़ा राजन्समाजह्रुः समन्ततः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते क्षत्रिय़ाः सर्वे प्रशंसन्ति स्म कौरवान् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते क्षत्रिय़ानेव पप्रच्छुर्द्विजसत्तमाः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते खड्गमुद्यम्य जिह्वां छेत्स्यामि दुर्मते ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते खेचराः सर्वे चित्रसेने न्यवेदय़न् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्ते जलदा घोरा राविणः पुरुषर्षभ |
७१ क
विराट पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते जवना धुर्या जानुभ्यामगमन्महीम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते जातसंरम्भाः परस्परकृतागसः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते तं महात्मानं शुद्धात्मानमकल्मषम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय २१२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते तद्वचः श्रुत्वा ग्राह्यरूपं हलाय़ुधात् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११
शकुनिरु उवाच
ततस्ते तद्वचः श्रुत्वा तस्य धर्मार्थसंहितम् |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तमसा सर्वे हृता ह्यासन्महीतले |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
ततस्ते तान्समासाद्य क्रूरा जघ्नुरिति श्रुतिः ||
४५ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसाः सर्वे कार्यवन्तोऽभवंस्तदा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसाः सर्वे तपसे धृतनिश्चय़ाम् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसाः सर्वे पूजय़न्ति स्म तं नृपम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७९
भीष्म उवाच
ततस्ते तापसाः सर्वे भार्गवस्यानुय़ाय़िनः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
भीष्म उवाच
ततस्ते तामुषित्वा तु रजनीं तत्र तापसाः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तावका योधा धृष्टद्युम्नमुपाद्रवन् |
४२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तावका वीरा राजपुत्रा महारथाः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तावकाः शूराः पाण्डवं रभसं रणे |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तावकाः सर्वे माय़या विमुखीकृताः |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते तावकाः सर्वे हृष्टा युद्धाय़ भारत |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते तु महावीर्या राजानः पर्यवारय़न् |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते तु यथाकालं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् |
४३ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते तूत्तरेणैव तीरेण लवणाम्भसः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्ते त्रिदशाः सर्वे मरुतश्च महावलाः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
ततस्ते त्वरिता राजञ्श्रुत्वा शोकमघोद्भवम् |
११६ क
विराट पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते दक्षिणं तीरमन्वगच्छन्पदातय़ः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते ददृशुर्भीष्मं शरप्रस्तरशाय़िनम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
ततस्ते दानवाः सर्वे तेन शव्देन भीषिताः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १६६
अर्जुन उवाच
ततस्ते दानवास्तत्र योधव्रातान्यनेकशः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते धर्मनिरताः सम्यक्तैरभिपूजिताः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते धृतराष्ट्रस्य भीष्मस्य च महात्मनः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते धृतसङ्कल्पा युद्धाय़ सहसैनिकाः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते नरशार्दूला भ्रातरः पञ्च पाण्डवाः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
जनमेजय़ उवाच
ततस्ते नास्थिता मार्गं ध्रुवमक्षय़मव्ययम् ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वासुदेव उवाच
ततस्ते निधनं प्राप्ताः सर्वे ससुतवान्धवाः |
१६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
ततस्ते निहताः सर्वे तव पुत्रा महारथाः |
२५ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते निय़तात्मान उदीचीं दिशमास्थिताः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पञ्च पाण्डवाः कुन्त्या सहिता हास्तिनपुरमानीय़ तापसैर्भीष्मस्य विदुरस्य च निवेदिताः ||
७७ क
आदि पर्व
अध्याय ४२
सूत उवाच
ततस्ते पन्नगा ये वै जरत्कारौ समाहिताः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पर्यवर्तन्त सर्वे द्रोणरथं प्रति |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवा दूरादवतीर्य पदातय़ः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पाण्डवा राजञ्शिखण्डी च ससात्यकिः |
८१ क