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कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पाण्डवा राजन्कौरवाश्च महारथाः |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पाण्डवा राजन्पाञ्चालाश्च यशस्विनः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पाण्डवा राजन्समन्तान्निशिताञ्शरान् |
२० क
वन पर्व
अध्याय २४४
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवाः शीघ्रं प्रय़युर्धर्मकोविदाः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवाः सर्वे पाञ्चाल्यश्च महाय़शाः |
१ क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवाः सर्वे सभार्याः सपुरोहिताः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवाः सर्वे सह कुन्त्या नरर्षभाः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पाण्डवास्तत्र गत्वा कृष्णपुरोगमाः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पाण्डुपुत्रस्य स्मृत्वा तद्भाषितं तदा |
२९ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पापकर्माणो लोभोपहतचेतसः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १९६
द्रोण उवाच
ततस्ते पार्थिवश्रेष्ठ पूज्यमानाः सदा त्वय़ा |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पार्थिवाः क्रुद्धाः फल्गुनं वीक्ष्य संय़ुगे |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे जग्मुः स्वानालय़ान्पुनः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे तच्छ्रुत्वा राजशासनम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे प्रगृहीतशरासनाः |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे भीष्मद्रोणपुरोगमाः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे शिरसा जननीं तदा |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे श्रुत्वा पार्थस्य भाषितम् |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे समुत्पेतुरमर्षिताः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पार्थिवाः सर्वे सर्वतः परिवारय़न् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
ततस्ते पितरः प्रीता राममूचुर्महीपते ||
२३ ग
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
ततस्ते पितुराज्ञाय़ दिक्षु सर्वासु तं हय़म् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पुनरुत्थाय़ योधय़ां चक्रिरे सुरान् ||
७ ग
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पुरुषव्याघ्रा गत्वा स्त्रीभिस्तु संविदम् |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते पुरुषव्याघ्राः सदश्वैरनिलोपमैः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय १३४
लोमश उवाच
ततस्ते पूजिता विप्रा वरुणेन महात्मना |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
ततस्ते पृथिवीपालाः प्रय़युः सहसैनिकाः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
ततस्ते पृथिवीपालाः समुत्पेतुरुदाय़ुधाः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
ततस्ते प्रत्यवुध्यन्त ऋषय़ः सनराधिपाः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्रद्रुता वाहा राजंस्तस्य महात्मनः ||
५६ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्राद्रवञ्शूराः पराङ्मुखरथेऽर्जुने ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्राद्रवन्भीताः पुत्रास्ते विह्वलीकृताः |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्राद्रवन्भीताः प्रतीपं प्रहिताः पुनः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्राद्रवन्सर्वे त्वरिता युद्धदुर्मदाः |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते प्रार्थितं चक्रं देवदानवपूजितम् |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्राविशन्पार्था हतत्विट्कं हतेश्वरम् |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते प्रीय़माणा वै कर्णेन सह पाण्डवाः |
५ क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
ततस्ते प्रेक्षकाः सर्वे रङ्गवाट इव स्थिताः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
ततस्ते प्रेक्षमाणानां तेषामक्लिष्टकर्मणाम् |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते प्रेषय़ामासुर्धृतराष्ट्रस्य नागराः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते प्रय़युः सर्वे निवासाय़ महीक्षितः |
१ क
वन पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते प्रय़युः सर्वे पाण्डवा धर्मचारिणः |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते प्रय़युर्हृष्टाः प्रहृष्टनरवाहनाः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते फल्गुनेनाजौ शरैः संनतपर्वभिः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
ततस्ते भरतश्रेष्ठ काशिराजसुते शुभे |
४९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते भरतश्रेष्ठाः समाजग्मुः परस्परम् |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते भविता देवि भारस्य युधि नाशनम् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते भीष्ममामन्त्र्य पाण्डवांश्च महर्षय़ः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते भ्रातरः पञ्च राक्षसेन्द्रं महाहवे |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
ततस्ते भ्रातरः पञ्च शरैर्विद्धा महात्मना |
६ क