अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
अवक्षुतावरुदितं तथा श्राद्धेषु वर्जय़ेत् ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
अवक्षेपं तु तं दृष्ट्वा पुत्रस्तव विशां पते |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अवक्षेपोऽसिनिर्ह्रादः शस्त्रान्तरनिदर्शनम् |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाढमथो द्रोणं सलिले सलिलेचरः |
६९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अवगाढश्च सरसि स्त्रीभूतो व्राह्मणोत्तम |
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
अवगाढा मज्जय़न्त्यः क्षत्रस्याजनय़न्भय़म् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४१
व्यास उवाच
अवगाढा ह्यविद्वांसो विद्धि लोकमिमं तथा ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाढा ह्युभय़तः समुद्रौ पूर्वपश्चिमौ ||
२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अवगाढे रथे भूमौ जानुभ्यामगमन्हय़ाः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
अवगाह्य ततः स्नातो राजा स्त्रीत्वमवाप ह ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
अवगाह्य ततो भूमिमुभौ मातलिनारदौ |
६ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
अवगाह्य तस्मिन्सरसि मानुषत्वमुपागताः ||
५३ ग
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाह्य तु तां राजा तनुं तत्याज मानुषीम् ||
३९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाह्य महात्मानः पुण्यां त्रिपथगां नदीम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
अवगाह्य सुविद्वंसो विद्धि ज्ञानमिदं तथा ||
५२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाह्याजुहावाथ सर्वाँल्लोकान्महामुनिः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
अवगाह्यापगां पुण्यामुदकार्थं प्रचक्रमे ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अवगाह्यावमज्जन्तो नैव मोहं प्रचक्रिरे ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
अवगाह्यैव विचितौ न च मे रोचते वरः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
अवघुष्टं च यद्भुक्तमव्रतेन च भारत |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
अवघुष्टं पुरे चापि तदर्थं वदतां वर ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
अवच्छन्नौ ततः कृष्णौ दृष्ट्वा तत्र महारथाः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
अवजानन्ति नूनं त्वां तेनासि हरिणः कृशः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
अवजानन्महात्मानं घोरे तमसि मज्जति ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
अवजित्य ततः सङ्ख्ये यय़ौ स्वशिविरं प्रति ||
४७ ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
अवजित्य धनं चापि विराटो वाहिनीपतिः |
१ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
अवजित्य सुशर्माणं धनं चादाय़ सर्वशः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२२
भीष्म उवाच
अवज्ञातः सुखं शेते इह चामुत्र चोभय़ोः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१४६
व्राह्मण्यु उवाच
अवज्ञाता च लोकस्य तथात्मानमजानती |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७४
अम्वो उवाच
अवज्ञाता भविष्यामि वान्धवानां न संशय़ः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
अवज्ञाता भविष्यामि सर्वलोकेषु मानदाः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
अवज्ञाता भविष्यामो लोकस्य जगतीपते ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
अवज्ञातावधूताश्च निर्दहन्त्यधमान्नरान् ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
अवज्ञातास्त्वय़ा नित्यं गावो वलनिसूदन ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२९
प्रह्लाद उवाच
अवज्ञानं हि लोकेऽस्मिन्मरणादपि गर्हितम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८४
भृगुरु उवाच
अवज्ञानमहङ्कारो दम्भश्चैव विगर्हितः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
अवज्ञानसहस्रैस्तु दोषाः कष्टतराधने |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९०
भीष्म उवाच
अवज्ञानेन कुरुते न तुष्यति न शोचति |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अवज्ञापूर्वकं वीरः सौभद्रस्य रणाजिरे ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
अवज्ञास्यन्ति मां लोका वीर्येण तव विस्मिताः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
अवज्ञाय़ च मां नूनं नृशंसेन दुरात्मना ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
गरुड उवाच
अवज्ञाय़ तु यत्तेऽहं भोजनाद्व्यपरोपितः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
भीष्म उवाच
अवज्ञाय़ नशक्यो वा किञ्चिद्वा तेन वः कृतम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९
प्रह्लाद उवाच
अवज्ञाय़ हि तं भृत्या भजन्ते वहुदोषताम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
अवज्ञय़ा दीय़ते यत्तथैवाश्रद्धय़ापि च |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२६०
मार्कण्डेय़ उवाच
अवतर्तुं महीं सर्वे रञ्जय़ामासुरञ्जसा ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अवतर्तुं महीं स्वर्गादंशतः सहितः सुरैः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
अवतस्थे महाप्राज्ञो धैर्येण परमेण ह ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
अवतानैस्तथा गुल्मैः पुष्पमञ्जरिधारिभिः ||
३ ख