द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणकर्णौ च संय़त्तौ पश्य युद्धे महारथौ ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणकर्णौ प्रतीय़ातां यदि भीष्मोऽपि वा रणे |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणकर्णौ प्रतीय़ातां यदि वीरौ नरर्षभौ |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणकर्णौ महेष्वासावेतौ पार्षतसात्यकी |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणकर्णौ महेष्वासौ सव्यतः पर्यवर्तत ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणकर्णौ रणे पूर्वं हन्तव्याविति मे मतिः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणकर्णौ समासाद्य धिष्ठितौ रणमूर्धनि ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणगम्भीरपातालं कृतवर्ममहाह्रदम् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणग्राहह्रदान्मुक्तौ शक्त्याशीविषसङ्कटात् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणग्राहाद्दुराधर्षाद्धार्दिक्यमकरालय़ात् |
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणचापविमुक्तेन शरौघेणासुहारिणा |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणदुर्योधनकृपाः कर्णमद्रेशवाह्लिकाः |
७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणद्रुपदशल्यैश्च ज्वलद्भिरिव पावकैः ||
२१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
द्रोणद्रौणाय़नी चोभौ यैरसि व्यसनीकृतः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणद्रौणिकृपान्वीरान्कम्पय़न्तो महारथान् |
६८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
काक उवाच
द्रोणद्रौणिकृपैर्गुप्तो भीष्मेणान्यैश्च कौरवैः |
५६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
द्रोणद्रौणिकृपैश्चैव गन्ता पार्थो यमक्षय़म् ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
द्रोणपर्व ततश्चित्रं वहुवृत्तान्तमुच्यते |
१६० क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
द्रोणपर्वणि ये शूरा निर्दिष्टाः पुरुषर्षभाः ||
१६६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपाञ्चाल्ययो राजन्महानासीत्समागमः ||
७० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपाण्डवपर्जन्यां खड्गशक्तिगदाशनिम् |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपाण्डवय़ोर्घोरं वृत्रवासवय़ोरिव ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपार्थौ महेष्वासौ सर्वय़ुद्धविशारदौ ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्रं च कर्णं च भूरिश्रवसमेव च |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं च पाञ्चाल्यः शिखण्डी समवारय़त् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं चतुःषष्ट्या मद्रराजं शतेन च ||
८० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं त्रिभिर्वाणैराजघान महाय़शाः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं त्रिषष्ट्या तु राजन्विव्याध पत्रिणाम् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं भय़ाद्राजन्दिक्षु सर्वासु मेनिरे ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं महाराज समन्तात्पर्यवारय़न् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणपुत्रं महेष्वासं गाय़ना नर्तकाश्च ये |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणपुत्रं महेष्वासं पुत्राणां मे पराय़णम् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रं शिनेर्नप्ता धृष्टकेतुस्तु पौरवम् |
२७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्रः स कल्याणि वनं दूरमितो गतः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रः स्थितो राजन्प्रत्यादेशान्महात्मनः ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रमवच्छाद्य सिंहनादममुञ्चत ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्ररथस्याशु यय़ौ मार्गेण वीर्यवान् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रश्च शैनेय़ं सर्वतः पर्यवारय़न् |
६४ क
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्रसहाय़ेन पापेन कृतवर्मणा |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रस्तु शिरसि ग्रीवाय़ां सर्वसोदराः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रस्य विक्रान्तं राधेय़स्यैव चोभय़ोः |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्रस्य सहजं मणिमादाय़ सत्वराः |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
द्रौपद्यु उवाच
द्रोणपुत्रस्य सहजो मणिः शिरसि मे श्रुतः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रादृते वीरात्तथैव कृतवर्मणः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्राद्भय़ं कर्तुं नार्हस्यमितविक्रम ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणपुत्रास्त्रनिर्दग्धं जीवय़ैनं ममात्मजम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्राय़ चिक्षेप कालदण्डमिवापरम् |
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रेण निहतान्राक्षसांश्च सहस्रशः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रेण शल्येन कृपेण च महात्मना |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
द्रोणपुत्रो महेष्वासः सर्वेषामति धन्विनाम् |
३ क