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सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणपुत्रो महेष्वासस्तन्मे शंसितुमर्हसि ||
१४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणप्रेप्सुरनीकानि धृष्टद्युम्नः प्रकर्षति ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणभीष्मकृपद्रौणिकर्णार्जुनजनार्दनान् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणभीष्माभिसङ्गुप्तं गुप्तं च कृतवर्मणा ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६
शल्य उवाच
द्रोणभीष्मावति विभो सूतपुत्रं च संय़ुगे |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणभीष्मौ रणे यत्तौ धर्मराजस्य वाहिनीम् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणभीष्मौ रणे शूरौ प्रत्युद्ययुररिन्दमौ ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्यद्रवन्क्रुद्धाः सहिताः पाण्डुसृञ्जय़ाः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्यद्रवन्राजन्महावेगपराक्रमाः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्यद्रवन्रात्रौ पाण्डवाः सहसैनिकाः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्यपतद्राजन्वैनतेय़ इवोरगम् ||
१४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्यर्दय़द्वाणैर्घोररूपैर्महत्तरैः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्युद्यतं दृष्ट्वा पाण्डवाः सह सृञ्जय़ैः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमभ्युपपद्यन्त सपत्नैः परिवारितम् ||
५१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २३
गान्धार्यु उवाच
द्रोणमाधाय़ गाय़न्ति त्रीणि सामानि सामगाः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमावारितं दृष्ट्वा भृशाय़स्तस्तवात्मजः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमावारय़िष्यामो यदि त्वां प्रति यास्यति ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणमाश्रित्य तिष्ठन्तः प्राकारमकुतोभय़ाः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमासादय़ां चक्रुः पाञ्चालाः पाण्डवैः सह ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय २२३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणमाह प्रतीतात्मा मन्दपालप्रतिज्ञय़ा ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमुत्सृज्य गच्छामः कृत्यमेतन्महत्तरम् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमुत्सृज्य तरसा प्रय़यौ यत्र सौवलः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेघः पार्थशैलं ववर्ष शरवृष्टिभिः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेघमनावार्यं हय़मारुतचोदितम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेवान्वपद्यन्त केचित्तत्र महारथाः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेवाभ्ययुर्युद्धे मोहय़न्तो महारथम् ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेवाभ्यवर्तन्त नदन्तो भैरवान्रवान् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणमेवाभ्यवर्तन्त पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणवैकर्तनाभ्यां वा रथः संय़ातुमर्हति ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
द्रोणवैराभिसन्तप्तं त्वं ह्लादय़ितुमर्हसि ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणशत्रुं महेष्वासो विव्याध निशितैः शरैः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
एकलव्य उवाच
द्रोणशिष्यं च मां वित्त धनुर्वेदकृतश्रमम् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च कृतवर्मा च सैन्धवश्च जय़द्रथः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च द्रुपदं विद्ध्वा शरैः संनतपर्वभिः |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च पञ्चविंशत्या कृपः पञ्चाशता शरैः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणश्च विदुरश्चैव कृपश्चान्ये च कौरवाः ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणश्च व्राह्मणो यत्र सर्वशस्त्रास्त्रपारगः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
द्रोणश्च शतशृङ्गश्च वक्रद्वारश्च पर्वतः |
१८३ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणश्च सत्यवागासीन्नान्योऽभ्यभवदर्जुनम् ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च समरे क्रुद्धः पुत्रस्य प्रिय़कृत्तव |
३८ क
विराट पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणश्च सह पुत्रेण कृपश्चातिरथो रणे ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च सह पुत्रेण सर्वास्त्रविधिपारगः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणश्च सोमदत्तश्च वाह्लिकश्च जय़द्रथः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणश्रवाः कपिस्कन्धः काञ्चनाक्षो जलन्धमः |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणसाय़कनुन्नानां भग्नानां मधुसूदन |
२७ क
स्त्री पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणसूर्योपरागं च हृदय़ं मे विदीर्यते ||
१६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणसृष्टाः सुवहवः कङ्कपत्रपरिच्छदाः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणस्तथोक्तः कर्णेन सापेक्षः फल्गुनं प्रति |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्तदप्रिय़ं श्रुत्वा सहसा न्यपतद्रथात् ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
द्रोणस्तव महेष्वासः सह पुत्रेण धीमता |
१० क