द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्य शरवर्षैस्तु शरवर्षाणि भागशः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणस्य समतिक्रान्तावनीकमपराजितौ |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्य समरे राजन्पार्ष्णिग्रहणकारणात् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणस्य समरे वीराः केऽकुर्वन्त परां धृतिम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्य सैन्यं ते सर्वे शरवर्षैरवाकिरन् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्य सोमकैः सार्धं सङ्ग्रामो लोमहर्षणः ||
४५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणस्य सोमदत्तस्य वाह्लीकस्य च धीमतः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्य स्तवसंय़ुक्ताः पार्थस्य च महात्मनः |
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
द्रोणस्य हि समं युद्धे न पश्यामि नराधिपम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणस्याथ विकर्णस्य वाह्लिकस्य कृपस्य च ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्यान्तकरं घोरं व्यसृजत्साय़कं ततः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्याभावभावेषु प्रसक्तानां यथाभवत् ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणस्याभिमुखाः शीघ्रमगच्छन्वातरंहसः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रोणस्यासीदविरतो गृहे तन्न शृणोम्यहम् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणहन्तारमुग्रेषुं ससाराभिमुखं रणे ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणहन्तारमुग्रेषुः पुनर्विव्याध सप्तभिः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणहार्दिक्ययोः कृष्णौ न मोक्ष्येते इति प्रभो ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
द्रोणाज्जज्ञे महाराज द्रौणिश्च परमास्त्रवित् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणात्कस्तं नरव्याघ्रं युय़ुत्सुं प्रत्यवारय़त् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणात्कृपाच्च रामाच्च सोऽस्त्रग्रामं चतुर्विधम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
द्रोणादनन्तरं यत्तो भगदत्तः प्रतापवान् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२
अर्जुन उवाच
द्रोणादस्त्रभृतां श्रेष्ठात्सर्वशस्त्रभृतामपि ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणादाशीविषाकाराज्ज्वलितादिव पावकात् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
द्रोणाद्विशिष्टमासाद्य भवन्तं व्रह्मवित्तमम् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणानीकं महाराज भोजानीकं च दुस्तरम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणानीकं विनिर्भिद्य भोजानीकं च दुस्तरम् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
द्रोणानीकं विशाम्येष क्रुद्धो झष इवार्णवम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणानीकमतिक्रान्तं भोजानीकं च दुस्तरम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणानीकमसम्वाधं मम प्रिय़चिकीर्षय़ा |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
द्रोणान्तकमहं पुत्रं लभेय़ं युधि दुर्जय़म् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणान्तहेतोरुत्पन्नो य इद्धाञ्जातवेदसः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणान्तिकमनुप्राप्ता दीप्तास्या पन्नगी यथा ||
३१ ग
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
द्रोणाभिषेकः पर्वोक्तं संशप्तकवधस्ततः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणास्त्रमग्निसंस्पर्शं प्रविष्टाः क्षत्रिय़र्षभाः |
५७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
द्रोणास्त्रमभिहत्यैष विमर्दे मधुसूदन |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
द्रोणास्त्रमेघान्निर्मुक्तौ सूर्येन्दू तिमिरादिव ||
२७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
द्रोणास्त्रशरसङ्कृत्तं शय़ानं रुधिरोक्षितम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणास्त्रेण महाराज वध्यमानाः परे युधि |
५९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ चिक्षेप गदां यमदण्डोपमां रणे ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
द्रोणाय़ दर्शय़ामासुर्वद्ध्वा ससचिवं तदा ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ धृतराष्ट्राय़ विदुराय़ कृपाय़ च |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ निहतं शंस राजञ्शारद्वतीसुतम् |
१०४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ प्रापय़ामास काम्वोजैर्जवनैर्हय़ैः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ प्रेषय़ामास गिरिसारमय़ीं वली ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ शक्तिं चिक्षेप सर्वपारशवीं शुभाम् ||
५० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़नेः शिरः काय़ाद्धर्तुमैच्छत्पतत्रिवत् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं याताञ्शरवर्षैरवारय़त् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं कुन्तिभोजमवारय़त् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं के वीराः पर्यवारय़न् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ाभिमुखं यान्तं के वीराः पर्यवारय़न् ||
४५ ख