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द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं पाञ्चालतनय़ो वाग्भिरातर्जय़त्तदा ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं प्रति महाराज जलं जलधरा इव ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं प्राच्छादय़द्वाणैः स्वर्भानुरिव भास्करम् ||
४३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं राज्ञो निय़ोगेन सेनापत्येऽभ्यषेचय़त् ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं विव्याध सप्तत्या वाह्वोरुरसि चार्दय़त् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं विव्याध समरे त्रिभिरेव शिलीमुखैः ||
१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं षष्ट्या महाराज वाह्वोरुरसि चार्पय़त् ||
४४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिं ह्यपश्यत्सङ्ग्रामे फल्गुनं च मुहुर्मुहुः ||
१२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिः क्रोधेन जज्वाल यथा वह्निर्जगत्क्षय़े ||
३१ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिः परमसंरव्धः प्रत्युवाचेदमुत्तरम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिः पाञ्चालदाय़ादमभ्यवर्षदथेषुभिः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिः पाञ्चालराजानं भारद्वाजश्च सृञ्जय़ान् |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
धृतराष्ट्र उवाच
द्रौणिकर्णकृपास्तात तेऽप्यकुर्वन्किमाहवे ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
द्रौणिद्वैपाय़नादीनां शापाश्चान्योन्यकारिताः |
१८७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिना निहताः सर्वे मम पुत्रा महारथाः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिना रक्ष्यमाणं च मय़ा दुःशासनेन च |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिपर्जन्यमुक्तां तां वाणवृष्टिं सुदुःसहाम् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिपाण्डवय़ोरेवं वर्तमाने महारणे |
१२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिपार्षतय़ोर्युद्धं घोररूपं भय़ानकम् |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमभ्यद्रवत्क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमभ्यद्रवत्क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी ||
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमभ्यपतत्तूर्णं शरजालैरनेकधा ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमासाद्य विविशुर्वल्मीकमिव पन्नगाः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमित्यव्रवीद्वाक्यं दृष्ट्वा योधान्निपातितान् ||
२२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमुक्ताञ्शरांस्तांस्तु तद्भूतं महदग्रसत् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिमेवाभिदुद्राव कृत्वा मृत्युं निवर्तनम् ||
३९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिरप्यथ सम्प्रेक्ष्य तावृषी पुरतः स्थितौ |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिरभ्यद्रवत्क्रुद्धः सात्वतं रणमूर्धनि ||
२४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिरव्यथितो दिव्यैरस्त्रवर्षैरवाकिरत् ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिरेकोऽभ्ययात्तूर्णं भीमसेनं महावलम् ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिरेवमथाभाष्य पार्षतं परवीरहा |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्गाण्डीवधन्वानं भीमधन्वा महारथः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्दक्षिणतो राजन्सूतपुत्रश्च वामतः ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्ददाह समरे कक्षमग्निर्यथा वने ||
२७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिर्दीनमना राजन्द्वैपाय़नमभाषत ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्दुर्योधनश्चैव विकर्णश्च तवात्मजः |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्द्रुपदपुत्रस्य फल्गुनस्य च पश्यतः |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्भूरिश्रवाः शल्यश्चित्रसेनश्च मारिष |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्मन्युपरीतात्मा शिविरद्वारमासदत् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्मानं पितुः कुर्वन्मार्गणैः समवारय़त् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिर्युधिष्ठिरं दृष्ट्वा शैनेय़ेनाभिरक्षितम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रौणिर्वापि महेष्वासो विकर्णो वा महावलः ||
१२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
द्रौणिर्वैकर्तनः कर्णः सोमदत्तोऽथ वाह्लिकः ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिश्च कृतवर्मा च तथैवान्ये महारथाः |
७२ क
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिश्च सौवलश्चैव तथा दुःशासनः प्रभुः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिश्चाभ्यद्रवत्पार्थं रथमास्थाय़ फल्गुनम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिश्चिच्छेद विहसन्विव्याध च शरैस्त्रिभिः ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिश्चिच्छेद सहसा तत उच्चुक्रुशुर्जनाः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिश्चुकोप पार्थाय़ कृष्णाय़ च विशेषतः ||
१३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तदपि राजेन्द्र भल्लैः क्षिप्रं महारथः |
३६ क