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उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणिस्तु दशरात्रेण प्रतिजज्ञे महास्त्रवित् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९४
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तु दशरात्रेण प्रतिजज्ञे वलक्षय़म् |
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तु दृष्ट्वा राजेन्द्र धृष्टद्युम्नं रणे स्थितम् |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तु रथवंशेन महता परिवारितः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तु रभसः शूरस्त्रिगर्तादनु भारत |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिस्तु समरे दृष्ट्वा पाण्डवस्य पराक्रमम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणिहस्तस्थितं चापं चिच्छेदाशु घटोत्कचः ||
९३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेः पाञ्चालदाय़ादः शितैर्दशभिराशुगैः ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणेः पापोऽस्त्यभिप्राय़स्तेनास्मि सहसोत्थितः |
६८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेः सकाशमभ्येत्य रोषात्प्रचलिताङ्गदः ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेः सकाशात्सम्भ्रान्तस्त्वपनिन्ये त्वरान्वितः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेः सकाशाद्राजेन्द्र अपनिन्ये रथान्तरम् ||
१३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणेः सङ्कल्पितं भावमन्ववुध्यत केशवः ||
६६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेरनन्तरं प्राय़ात्सोदर्यैः परिवारितः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेरास्यमनुप्राप्तं मृत्योरास्यगतं यथा ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेरिषूनर्जुनः संनिवार्य; व्याय़च्छतस्तद्द्विगुणैः सुपुङ्खैः |
५४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणेर्वुद्ध्वा महावाहुरर्जुनं प्रत्यभाषत ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौणेश्च राज्ञश्च तथैव नीले; वस्त्रे समादत्स्व नरप्रवीर ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेस्तत्कर्म दृष्ट्वा तु सर्वभूतान्यपूजय़न् |
१०६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
द्रौणेस्तु धनुषः शव्दमहितत्रासनं रणे |
११७ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
उत्तर उवाच
द्रौपदी क्व च पाञ्चाली स्त्रीरत्नमिति विश्रुता |
४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी च तथा कृष्णा व्याजेन नरकं गताः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च परामृष्टा सभामानीय़ शत्रुभिः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च परिक्लिष्टा तथाधर्मेण सात्यके ||
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च परिक्लिष्टा सभामध्ये रजस्वला |
३८ क
शल्य पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च परिक्लिष्टा सभाय़ां यद्रजस्वला |
२९ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी च सभामध्ये पाञ्चाली धर्मचारिणी |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ४६
दुर्योधन उवाच
द्रौपदी च सह स्त्रीभिर्व्यथय़न्ती मनो मम ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च सुभद्रा च पश्यन्ति सह वन्धुभिः ||
६१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी च सुभद्रा च याश्चान्याः पाण्डवस्त्रिय़ः |
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी च सुभद्रा च याश्चाप्यन्या ददुः स्त्रिय़ः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी च सुभद्रा च वासांस्याभरणानि च |
२२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी चान्वय़ाच्छ्वश्रूं विषण्णवदना तदा |
३० क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
द्रौपदी चाव्रवीद्भीममभिप्रेक्ष्य युधिष्ठिरम् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी चेत्तथावृत्ता नाश्नुते सुखमव्ययम् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी चैव दुःखार्ते ते च वक्ष्यामि किं न्वहम् ||
५३ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी त्वरिता गत्वा वैराटीं वाक्यमव्रवीत् ||
८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी द्रौपदेय़ाश्च इत्येवं ते विचुक्रुशुः ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय २००
जनमेजय़ उवाच
द्रौपदी धर्मपत्नी च कथं तानन्ववर्तत ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३९
व्यास उवाच
द्रौपदी पञ्च पुत्रांश्च पितॄन्भ्रातॄंस्तथैव च ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
कर्ण उवाच
द्रौपदी पाण्डुपुत्राणां कृष्णा शान्तिरिहाभवत् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
द्रौपदी पुत्रशोकार्ता पितृभ्रातृवधार्दिता |
१८३ क
सभा पर्व
अध्याय ६१
विदुर उवाच
द्रौपदी प्रश्नमुक्त्वैवं रोरवीति ह्यनाथवत् |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३७
द्रोण उवाच
द्रौपदी यस्य चाशास्ते विजय़ं सत्यवादिनी |
१८ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी योषितां श्रेष्ठा यत्र चैव प्रिय़ा मम ||
३६ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी योषितां श्रेष्ठा यय़ौ भरतसत्तम ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी सत्यभामा च तथाहं परमं वचः ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी सत्यभामा च विविशाते तदा समम् |
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदी हतपुत्रा च सुभद्रा चैव भामिनी |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
द्रौपदी हतपुत्रेय़ं कृपणा हतवान्धवा |
१७ क