वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीं कर्ण पश्येय़ं काषाय़वसनां वने ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीं च समासाद्य पर्यपृच्छत दुःखिता |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
द्रौपदीं चाप्यदुःखार्हां पञ्चपुत्रविनाकृताम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीं धर्मराजस्तु दृष्ट्वा धौम्यपुरस्कृताम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदीं परिकर्षद्भिः कोपय़द्भिश्च पाण्डवान् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीं परिपप्रच्छ क्व भीम इति भारत ||
४६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीं सान्त्वय़ित्वा च आमन्त्र्य च जनार्दनः ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीप्रमुखाश्चापि स्त्रीसङ्घाः शिविकागताः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमनुशोचद्भिर्व्राह्मणैस्तैः समागतैः |
४९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमभ्यधावन्त प्राय़ोपेतां मनस्विनीम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमवदत्प्रेम्णा पृथाशीर्वचनं स्नुषाम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमार्ष्टिषेणाय़ प्रदाय़ तु महारथाः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमाश्रमे न्यस्य तृणविन्दोरनुज्ञय़ा |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीमुत्तरां चैव पृथां चाप्यवलोककः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
द्रौपदीवचनाद्यत्र भीमो भीमपराक्रमः |
१८४ क
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीवाक्यपाथेय़ो भीमः शीघ्रतरं यय़ौ ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३७
द्रोण उवाच
द्रौपदीसहितं पार्थं साय़ुधैर्भ्रातृभिर्वृतम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदीसहिता वीरास्तैश्च विप्रैर्महात्मभिः |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
द्रौपदीहरणं पर्व सैन्धवेन वनात्ततः |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
द्रौपदीहरणे पूर्वं परिक्लिष्टः स पाण्डवैः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदीहरणे यत्तद्भीमसेनेन निर्जितः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ं नरव्याघ्रं श्रुतकर्माणमावहन् ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
द्रौपदेय़ा धार्तराष्ट्राञ्शिष्टान्सह शिखण्डिना |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदेय़ा नरव्याघ्राः समुद्रमिव सिन्धवः |
४७ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ा नरेन्द्रांश्च भूय़िष्ठं समवारय़न् |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदेय़ा महाराज द्रुपदस्यात्मजैः सह |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
द्रौपदेय़ा महाराज सर्वे पञ्च महारथाः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ा महेष्वासा राक्षसश्च घटोत्कचः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ा महेष्वासाः सुवर्णविकृतध्वजाः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ा रणे क्रुद्धा दुर्योधनमवारय़न् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
द्रौपदेय़ा विराटश्च द्रुपदश्च महारथः |
४० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ा हताः सर्वे धृष्टद्युम्नस्य चात्मजाः |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ांश्च पञ्चभ्यस्त्रिगर्तेभ्यः समादिशत् ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ांश्च शकुनिर्यमौ च द्रौणिरभ्ययात् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ांस्ततः पञ्च पञ्चभिः समताडय़त् |
६९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ांस्तथा वीरानेकैकं दशभिः शरैः |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ांस्तथा सर्वान्माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ाः शिखण्डी च कुन्तिभोजश्च वीर्यवान् |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ाः सत्यधृतिः क्षत्रदेवश्च मारिष ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदेय़ाः ससौभद्राः पार्वतीय़ान्महीपतीन् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ाः ससौभद्राः पृष्ठगोपास्तरस्विनः ||
२० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ानभिद्रुत्य खड्गेन व्यचरद्वली ||
४९ ग
वन पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदेय़ानुपादाय़ प्रय़यौ स्वपुरं तदा ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ान्नरव्याघ्रान्मुञ्चतः साय़कोत्तमान् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
द्रौपदेय़ान्महेष्वासानभिमन्युं च पाण्डवः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ान्महेष्वासान्सौमदत्तिर्महाय़शाः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ान्युधामन्युं सात्यकिं च महारथम् |
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ान्युधामन्युमुत्तमौजसमेव च |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ाभिमन्युश्च परिवव्रुर्धनञ्जय़म् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
द्रौपदेय़ाभिमन्युश्च माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ ||
१८ ख