आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
दय़ार्थं वालखिल्यानां न च स्थानमविन्दत ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
दय़ावतामिमे लोकाः परे चापि तपस्विनाम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
दय़ावानप्रमत्तश्च करान्सम्प्रणय़न्मृदून् ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
दय़ावान्सर्वभूतेषु यथार्हं प्रतिपद्यते ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
दय़ावान्सर्वभूतेषु हितो रक्तोऽनसूय़कः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
दय़ावान्सर्वभूतेषु ह्रीनिषेधो महास्त्रवित् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
४०
अर्जुन उवाच
दय़ितं तव देवेश तापसालय़मुत्तमम् ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
दय़ितं देवराजस्य माधवं नाम भारत ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७७
वैशम्पाय़न उवाच
दय़ितं भ्रातरं वीरमिदं वचनमव्रवीत् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
दय़ितं स्थानमव्यग्रं शूलपाणेर्महात्मनः ||
५४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
अर्जुन उवाच
दय़ितश्चक्रहस्तस्य वाल एवास्त्रकोविदः ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
दय़ितस्य पितुर्नित्यमकरोदौर्ध्वदेहिकम् ||
२ ख
विराट पर्व
अध्याय
१३
द्रौपद्यु उवाच
दय़िताः प्राणिनां दारा धर्मं समनुचिन्तय़ ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
दय़िताश्च नरास्ते स्युर्नित्यं पुरुषसत्तम |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
दय़ितो वासुदेवस्य वाल्यात्प्रभृति चाभवत् |
६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६७
व्यास उवाच
दय़ितोऽसि राजन्कृष्णस्य धृतराष्ट्र निवोध मे |
११ क