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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
नावध्यो यस्य लोकेऽस्मिन्व्रह्मविष्णुसुरेष्वपि |
१३० क
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
नावनीतं हि हृदय़ं विप्राणां शाम्य भार्गव |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
नावनीतं हृदय़ं व्राह्मणस्य; वाचि क्षुरो निहितस्तीक्ष्णधारः |
१३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
नावभोत्स्यन्ति संमूढा विष्णुमव्यक्तदर्शनम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
नावमंस्था हि सदृशान्नावराञ्श्रेय़सः कुतः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १६८
राजो उवाच
नावमंस्याम्यहं व्रह्मन्कदाचिद्व्राह्मणर्षभान् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
श्रीरु उवाच
नावमन्या ह्यहं सौम्यास्त्रैलोक्ये सचराचरे ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
गाव ऊचुः
नावमन्यामहे देवि न त्वां परिभवामहे |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
नावमन्ये च ते वुद्धिं नावमन्ये च पौरुषम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
नावमन्ये जय़ामीति जितवद्वर्ततां भवान् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
नावमन्ये न गर्हे च धर्मं पार्थ कथञ्चन |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
हिडिम्वो उवाच
नावमन्ये नरव्याघ्र त्वामहं देवरूपिणम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
नावमन्येदभिगतं न प्रणुद्यात्कथञ्चन |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
नावमानं कुलस्यास्य गुडाकेशः प्रय़ुक्तवान् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
नावमानात्कृतवती तवाहं प्रतिवोधनम् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
पितामह उवाच
नावमान्यास्त्वय़ा राजन्नवरोत्कृष्टमध्यमाः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
नावरत्वे वरार्हाय़ाः स्थित्वा चानघ नित्यदा ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
नावर्तते व्रतं स्वप्ने शुक्रमोक्षे कथञ्चन |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
नावर्तन्ते पुनः पार्थ मुक्ताः संसारदोषतः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
भीष्म उवाच
नावर्तेय़ं यथा भूय़ो योनिसंसारसागरे ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
भीष्म उवाच
नाववुध्यति तत्त्वेन वुध्यमानोऽजरामरः ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
धृतराष्ट्र उवाच
नाववुध्यत्पुरा मोहात्तस्य प्राप्तमिदं फलम् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
नाववुध्यसि यद्राजन्वार्यमाणः सुहृज्जनैः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय १९३
धृतराष्ट्र उवाच
नाववुध्येत विदुरो ममाभिप्राय़मिङ्गितैः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
नावश्याय़ोऽपि रात्र्यन्ते कुत एवाभ्रराजय़ः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
नावसीदितुमर्हन्ति उद्वहन्तः सतां धुरम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
नावहास्या भविष्यामो न च लाघवमास्थिताः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
नावहास्या यथा वीर भवेम परमाहवे |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
नावहास्याः कथं लोके कर्मणानेन संय़ुगे |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
नावा चापि यथा प्राज्ञो विभागज्ञस्तरित्रय़ा |
२७ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
नावा तु शुभय़ा वीर महोर्मिणमरिन्दम ||
३४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १
मृत्युरु उवाच
नावां दोषेण गन्तव्यौ त्वय़ा लुव्धक कर्हिचित् ||
६१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
मृत्युरु उवाच
नावां दोषेण गन्तव्यौ यदि सम्यक्प्रपश्यसि ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
नावारय़िष्यं गच्छन्तमहं सिन्धुपतिं गृहान् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
नावारय़िष्यः सङ्ग्रामे न स्म द्रोणो व्यनङ्क्ष्यत ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
नावासुदेवभक्ताय़ त्वय़ा देय़ं कथञ्चन ||
११३ ख
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
नावि नौरिव सम्वद्धा यथान्धो वान्धमन्विय़ात् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
नकुल उवाच
नाविद्यत तदा विप्राः सञ्चय़स्तान्निवोधत |
५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
नाविध्यत्परवीरघ्नो रक्षमाणोऽस्य गौरवम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २९५
वैशम्पाय़न उवाच
नाविध्यन्पाण्डवास्तत्र पश्यन्तो मृगमन्तिकात् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
वृहदश्व उवाच
नाविभ्यत्सा नृपसुता भैमी तत्राथ कस्यचित् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
नाविशन्ति शरीरं ते तावत्संशाम्य पाण्डवैः ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
नाविशेत्स्वर्गमतुलं रणानन्तरमव्ययम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
व्रह्मदत्त उवाच
नाविश्वासाच्चिन्वतेऽर्थान्नेहन्ते चापि किञ्चन |
७१ क
वन पर्व
अध्याय १६५
अर्जुन उवाच
नाविषह्यं तवाद्यास्ति त्रिषु लोकेषु किञ्चन ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
नावीजं जाय़ते किञ्चिन्न वीजेन विना फलम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
नावीजाज्जाय़ते किञ्चिन्नाकृत्वा सुखमेधते |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७
युधिष्ठिर उवाच
नावुद्धय़ो नातपसः सर्वं वुद्धौ प्रतिष्ठितम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
नावुधास्तारय़न्त्यन्यानात्मानं वा कथञ्चन ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
श्वपच उवाच
नावृत्तमनुकार्यं वै मा छलेनानृतं कृथाः ||
७० ख