उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
दक्षिणा त्वस्य यज्ञस्य धृष्टद्युम्नः प्रतापवान् |
४४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
गौतम उवाच
दक्षिणा परितोषो वै गुरूणां सद्भिरुच्यते |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
दक्षिणा ये च पाञ्चालाः पूर्वाः कुन्तिषु कोशलाः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
इन्द्र उवाच
दक्षिणा सर्वय़ज्ञानां दातव्या भूतिमिच्छता |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०४
नारद उवाच
दक्षिणां कां प्रय़च्छामि भवते गुरुकर्मणि |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणां दक्षिणाचारो दिशं येनाजय़त्प्रभुः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणां दिशमाजग्मुस्त्रासिता दृढधन्वना ||
५१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणां दिशमास्थाय़ चारय़ामास तं हय़म् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणां पितरो गुप्तां यमेन शुभकर्मणा ||
७६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणां सहदेवस्तु विजिग्ये परवीरहा |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१००
नारद उवाच
दक्षिणां हंसका नाम धारय़त्यपरां दिशम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणांश्चैव पाञ्चालान्यावच्चर्मण्वती नदी ||
१५ ग
वन पर्व
अध्याय
२११
मार्कण्डेय़ उवाच
दक्षिणाग्निर्यदा द्वाभ्यां संसृजेत तदा किल |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
दक्षिणाग्रास्ततो दर्भा विष्टरेषु निवेशिताः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
दक्षिणानन्तरो भूत्वा प्रणम्य विधिपूर्वकम् ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणानां च वै दाने कृपं राजा न्ययोजय़त् |
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
दक्षिणानां तथा यज्ञो वेदानामृषय़स्तथा ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०४
नारद उवाच
दक्षिणानां हि सृष्टानामपवर्गेण भुज्यते |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
दक्षिणानामदानं च व्राह्मणस्वाभिमर्शनम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
दक्षिणापथजन्मानः सर्वे तलवरान्ध्रकाः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
दक्षिणाभिः प्रवृत्ताभिर्मम नागां च तत्कृते ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
दक्षिणाभिमुखो रात्रौ तथास्याय़ुर्न रिष्यते ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०४
नारद उवाच
दक्षिणाभिरुपेतं हि कर्म सिध्यति मानवम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणामददद्राजा वाजिमेधमहामखे ||
११० ख
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
दक्षिणामभिगन्तास्मि दिशं कार्येण केनचित् ||
११ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणामवहत्सैन्यः सुग्रीवः सव्यतोऽवहत् |
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
दक्षिणामश्वमेधान्ते कश्यपाय़ाददत्ततः ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
दक्षिणामिति काकुत्स्थो विदित्वास्य तदिङ्गितम् |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
दक्षिणार्थं समानीता राजभिः कांस्यदोहनाः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
भीष्म उवाच
दक्षिणार्थेऽथ ऋत्विग्भ्यो दत्तः पुत्रो निजः किल ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
दक्षिणावर्तिकाः सर्वा वृसीः स्वय़मथाकरोत् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणावृत्त आदित्ये एतन्मे मनसि स्थितम् ||
९६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
दक्षिणावय़वाः केचिद्वेदैर्ये सम्प्रकीर्तिताः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणाय़नमावृत्तो महीं निविशते रविः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
दक्षिणाय़ां तु रक्ताभे अधस्तान्नीलमण्डले |
१२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
पृथिव्यु उवाच
दक्षिणाय़ां यमाय़ेह प्रतीच्यां वरुणाय़ च |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणे च महेष्वासो धृष्टद्युम्नो महावलः ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
दक्षिणे चैव सव्ये च गवामिव वहः कृतः ||
१८ ग
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
दक्षिणे तां करे सुभ्रूं सुन्दो जग्राह पाणिना |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणे तु महाराज सुषेणः सत्यसङ्गरः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणे शृङ्गिणश्चैव श्वेतस्याथोत्तरेण च |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वर्गो उवाच
दक्षिणे सागरानूपे पञ्च तीर्थानि सन्ति वै |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणेन च वीभत्सुः क्रुद्धो रुद्रः पशूनिव ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
दक्षिणेन तु नीलस्य निषधस्योत्तरेण च |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणेन तु नीलस्य निषधस्योत्तरेण तु |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणेन तु नीलस्य मेरोः पार्श्वे तथोत्तरे |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९
युधिष्ठिर उवाच
दक्षिणेन तु पन्थानं यं भास्वन्तं प्रपश्यसि |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणेन तु श्वेतस्य नीलस्यैवोत्तरेण तु |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
दक्षिणेन तु सेनाय़ाः कुरुते कदनं वली |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
दक्षिणेन परिष्वज्य जगाम मृदुगामिनी ||
१०४ ख