शान्ति पर्व
अध्याय
२३५
व्यास उवाच
दश पूर्वान्दश परान्पुनाति च पितामहान् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
दश प्रचेतसः पुत्राः सन्तः पूर्वजनाः स्मृताः |
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
दश मासान्परिधृता जाय़न्ते कुलपांसनाः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
दश मोक्षविदां तद्वद्यान्विभर्ति युधिष्ठिरः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
दश राजन्महावीर्यो भीमं प्राच्छादय़ञ्शरैः ||
१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
दश वर्षसहस्राणि तत्राय़ुर्भरतर्षभ |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
दश वर्षसहस्राणि तपस्तप्त्वा महातपाः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
दश वर्षसहस्राणि तस्य भुङ्क्ते फलं दिवि ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
दश वर्षसहस्राणि तेन देवः समाधिना |
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
दश वर्षसहस्राणि दश वर्षशतानि च ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
दश वर्षसहस्राणि दश वर्षशतानि च |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
दश वर्षसहस्राणि दश वर्षशतानि च |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
दश वर्षसहस्राणि दश वर्षशतानि च |
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
दश वर्षसहस्राणि दशाष्टौ च शतानि च ||
१८ ग
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
दश वर्षसहस्राणि यत्रसाय़ङ्गृहो मुनिः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
दश वर्षसहस्राणि रामो राज्यमकारय़त् ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
दश वर्षसहस्राणि शतानि दश पञ्च च |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
दश वर्षसहस्राणि स जीवेत्स्थिरय़ौवनः ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७
अगस्त्य उवाच
दश वर्षसहस्राणि सर्परूपधरो महान् |
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
दश वर्षाणि विष्ठां स भुङ्क्ते निरय़माश्रितः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
दश वर्षाण्यनन्तानि गोव्रती गोनुकम्पकः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३७
व्यास उवाच
दश वा वेदशास्त्रज्ञास्त्रय़ो वा धर्मपाठकाः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
९७
अगस्त्य उवाच
दश वा शततुल्याः स्युरेको वापि सहस्रवत् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
दश वाजिसहस्राणि हरीणां वातरंहसाम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
दश वालाञ्जले क्रीडन्भुजाभ्यां परिगृह्य सः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०७
गुरुरु उवाच
दश विद्याद्धमन्योऽत्र पञ्चेन्द्रिय़गुणावहाः |
१७ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
दश षट्च सहस्राणि वासुदेवावरोधनम् |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
दशकर्मसुखानर्थानुपाय़ापाय़निर्भय़ः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
दशकल्पशतावृत्तं तदहर्व्राह्ममुच्यते |
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दशकिष्कुसहस्रां तां मापय़ामास सर्वतः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
दशगोसहस्रदः सम्यक्षक्रेण सह मोदते |
५२ क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
दशग्रीवः कामवलो देवानां भय़मादधत् ||
४० ख
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
दशग्रीवश्च वाली च मेघवासा दशावरः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
दशग्रीवस्तु दैत्यानां देवानां च वलोत्कटः |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
२५९
मार्कण्डेय़ उवाच
दशग्रीवस्तु सर्वेषां ज्येष्ठो राक्षसपुङ्गवः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२९९
वैशम्पाय़न उवाच
दशग्रीवो हतश्छन्नं संय़ुगे भीमकर्मणा ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
दशज्योतिः शतज्योतिः सहस्रज्योतिरात्मवान् ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
दशद्वादशभिर्वापि चतुर्विंशात्परं ततः ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
व्रह्मो उवाच
दशद्वादशभिर्वापि चतुर्विंशात्परं ततः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
दशद्वादशवर्षाणां पुंसां पुत्रः प्रजाय़ते ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६६
भीष्म उवाच
दशधर्मगतश्चापि यो धर्मं प्रत्यवेक्षते |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
दशधर्मगतेभ्यो यद्वसु वह्वल्पमेव च |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
दशधा प्रविभक्तस्य धनस्यैष भवेत्क्रमः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५८
गन्धर्व उवाच
दशधा शतधा चैव तच्छीर्णं वृत्रमूर्धनि ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
दशनं चाहिभिः कष्टं दाहं च जतुवेश्मनि ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
दशपस्तेन भर्तव्यस्तेनापि द्विगुणाधिपः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
दशभिः सात्यकिं विद्ध्वा सौमदत्तिरथापरान् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
दशभिः सात्वतस्यार्थे भीमो विव्याध कौरवम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
दशभिः सात्वतस्यार्थे भीमोऽहन्वाह्लिकात्मजम् |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
दशभिः साय़कैश्चान्यैः षड्भिरष्टाभिरेव च ||
२१ ख