chevron_left  दिव्यसम्भारसंय़ुक्तैःarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यसम्भारसंय़ुक्तैः कलशैः काञ्चनैर्नृप |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
दिव्यस्त्रीगीतवहुलो मारुतोऽत्र सुखो ववौ ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
दिव्यस्य वा तोय़रसस्य पाना; त्पय़ोदधिभ्यां मथिताच्च मुख्यात् |
७ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
दिव्या आपस्तथौषध्यः श्रद्धा मेधा सरस्वती |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
समुद्र उवाच
दिव्या प्रोवाच मधुरा सर्वलोकपरिश्रुता ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्या मनोरमाः पुण्याः कथाः शुश्राव सा तदा |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
दिव्या माय़ा विहिता भौवनेन; समुच्छ्रिता इन्द्रकेतुप्रकाशा |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
दिव्या राजन्नमस्यन्ति विद्याः सर्वा दिशस्तथा ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
दिव्या वाचश्च विद्याश्च परिपार्श्वचराः कृताः ||
८१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७६
भृगुरु उवाच
दिव्या सरस्वती तत्र सम्वभूव नभस्तलात् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
दिव्या हेममय़ैरुच्चैः पादपैरुपशोभिता ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यां कौरवशार्दूल महतीमद्भुतोपमाम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
दिव्यां देवनदीं पुण्यां त्वत्कृते नृपसत्तम ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
दिव्यां मालामुरसानेकवर्णां; समुद्वहन्तं गुल्फदेशावलम्वाम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १८९
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यां माय़ां तामवाप्याप्रमेय़ां; तां चैवाग्र्यां श्रिय़मिव रूपिणीं च |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्याः सुमनसः पुण्या ववृषे पाकशासनः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय २०६
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्याख्यानानि ये चापि पठन्ति मधुरं द्विजाः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १९
वदान्य उवाच
दिव्याङ्गरागैः पैशाचैर्वन्यैर्नानाविधैस्तथा ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
दिव्यात्मानो महात्मानः सर्वशस्त्रभृतां वराः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
व्राह्मण उवाच
दिव्यादिव्यप्रभावेन भारती गौः शुचिस्मिते |
१८ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यानां च महास्त्राणां विनाशाद्व्रीडितोऽभवत् ||
५४ ख
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यानां तत्र माल्यानां गन्धः पुण्योऽथ सर्वशः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
दिव्यानि कामचारीणि विमानानि सभास्तथा |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यानि चैव पुष्पाणि पुरतः शार्ङ्गधन्वनः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
दिव्यानि चैव माल्यानि सुगन्धीनि नवानि च |
८ क
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
दिव्यानि भक्ष्यभोज्यानि पानानि विविधानि च |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
दिव्यानि भूतानि भय़ावहानि; दृश्यन्ति चैवात्र भय़ानकानि ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
दिव्यानि माल्यानि च तामुपतिष्ठन्ति सर्वशः ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
दिव्यानि राजन्निहितानि चैव; द्रोणेन वीरद्विजसत्तमेन ||
९० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
दिव्यानि सर्वपुष्पाणि प्रववर्षात्र मारुतः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यान्गन्धानुपादाय़ वाय़ुर्योधानसेवत ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि भीष्मस्य द्रोणस्य च महात्मनः |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि मुञ्चन्तं भारद्वाजं महारणे |
४६ क
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि वीभत्सुस्तत्त्वतः प्रतिपत्स्यते ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि सञ्चिन्त्य प्रसन्धाय़ धनञ्जय़ः ||
१११ ख
वन पर्व
अध्याय १७१
अर्जुन उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि सर्वाणि त्वय़ि तिष्ठन्ति भारत |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि सर्वाणि व्रह्मास्त्रादीनि यान्यपि |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
दिव्यान्यस्त्राणि सर्वेषां युधि निघ्नन्तमच्युतम् |
१५५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
दिव्यान्यस्त्राण्यथोत्सृज्य रणे प्राय़ उपाविशत् ||
११९ ख
विराट पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
दिव्यान्यस्त्राण्यवाप्तानि देवरूपेण भास्वता ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
दिव्यान्यस्त्राण्यवाप्याथ ततः प्रत्यागतो वनम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
दिव्यान्युवाह पुष्पाणि कर्मण्याश्चौषधीस्तथा ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्याभरणवस्त्रा च दिव्यस्रगनुलेपना ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
अष्टावक्र उवाच
दिव्याभरणवस्त्रा हि कन्येय़ं मामुपस्थिता ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
दिव्याभरणशोभाभिर्वरस्त्रीभिरलङ्कृतम् |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
दिव्याभिरूपशोभाभिरप्सरोभिः पुरस्कृताम् |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्यामप्सरसं पुण्यां दर्शनीय़ामलम्वुसाम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
दिव्याम्वरधरः श्रीमान्सुमृष्टमणिकुण्डलः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
दिव्याम्वरधरः श्रीमानय़ुतानां शतं समाः ||
८३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
दिव्याम्वरधराः सर्वे सर्वे भ्राजिष्णुकुण्डलाः |
१५ क