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द्रोण पर्व
अध्याय ७७
वासुदेव उवाच
दिष्ट्या जानाति सङ्ग्रामे योद्धव्यं हि त्वय़ा सह |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या जीवति सङ्ग्रामे सव्यसाची धनञ्जय़ः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय १९८
धृतराष्ट्र उवाच
दिष्ट्या जीवन्ति ते पार्था दिष्ट्या जीवति सा पृथा |
५ क
वन पर्व
अध्याय २३६
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या जीवसि गान्धारे दिष्ट्या नः सङ्गमः पुनः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या जय़सि कौन्तेय़ दिष्ट्या ते शत्रवो जिताः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या जय़सि कौरव्य दिष्ट्या भीष्मो निपातितः |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या जय़सि गोविन्द दिष्ट्या कर्णो निपातितः ||
३३ ग
शल्य पर्व
अध्याय ५९
युधिष्ठिर उवाच
दिष्ट्या जय़सि दुर्धर्ष दिष्ट्या शत्रुर्निपातितः ||
४४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या जय़सि राजेन्द्र दिष्ट्या वर्धसि पाण्डव ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या जय़सि राजेन्द्र शत्रूञ्शत्रुनिसूदन |
१० क
स्त्री पर्व
अध्याय २४
गान्धार्यु उवाच
दिष्ट्या तत्काञ्चनं छत्रं यूपकेतोर्महात्मनः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १८३
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या तस्मात्पावकात्सम्प्रमुक्ता; यूय़ं सर्वे पाण्डवाः शत्रुसाहाः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या तात मनस्तेऽद्य स्वधर्ममनुवर्तते |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या तु पुरुषव्याघ्रो वलवान्सत्यविक्रमः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
कङ्क उवाच
दिष्ट्या ते जीवितः पुत्रः श्रूय़ते पार्थिवर्षभ ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ६३
कङ्क उवाच
दिष्ट्या ते निर्जिता गावः कुरवश्च पराजिताः |
२० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
दिष्ट्या ते प्रतिकर्तव्ये मतिर्जातेय़मच्युत |
१ क
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या ते भरतश्रेष्ठ समाप्तोऽय़ं महाक्रतुः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
दिष्ट्या ते वर्तते वुद्धिर्युद्धाय़ैव महाभुज ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वं क्षुधितस्याद्य देवैर्भक्षो महाभुज |
१० क
विराट पर्व
अध्याय २१
भीमसेन उवाच
दिष्ट्या त्वं दर्शनीय़ोऽसि दिष्ट्यात्मानं प्रशंससि |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
दिष्ट्या त्वं न सृगालो वै न कृमिर्न च मूषकः |
१७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वं पार्थ कुशली मत्तमातङ्गगामिनम् |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वद्य महावाहो धृतराष्ट्रः प्रय़ाचति |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
दिष्ट्या त्वमपि जानीषे क्षत्रधर्मं सुय़ोधन |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या त्वमपि जानीषे योद्धुं न त्वद्य मोक्ष्यसे ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वमसि कल्याण षष्ठे काले ममान्तिकम् |
३ क
विराट पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वां पार्थ पश्यामि स्वागतं ते धनञ्जय़ |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्विदं सर्वराज्ञां संनिधावद्य वर्तते ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३६
पौरा ऊचुः
दिष्ट्या त्विदानीं पापात्मा दग्धोऽय़मतिदुर्मतिः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्विदानीं भर्तुर्मे कुन्त्यामप्यस्ति सन्ततिः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
वासुदेव उवाच
दिष्ट्या त्विदानीं सम्प्राप्त एष ते वाणगोचरम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय २३६
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या त्वय़ा जिताश्चैव गन्धर्वाः कामरूपिणः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
दिष्ट्या त्वय़ार्जितं वित्तं प्रतिपाणाय़ नैषध |
१२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या दिष्ट्येति चान्योन्यं समेत्योचुर्महारथाः ||
१४८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या दिष्ट्येति राजेन्द्र प्रीत्या चेदमुवाच ह ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या दुर्योधनः पापो निहतः सानुगो युधि |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
गालव उवाच
दिष्ट्या दृष्टोऽसि मे पुत्र कृतविद्य इहागतः ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
दिष्ट्या देवि प्रसन्ना त्वं दर्शनं चागता मम |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या द्रक्ष्यामि तां कुन्तीं वर्तय़न्तीं तपस्विनीम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १९८
धृतराष्ट्र उवाच
दिष्ट्या द्रुपदकन्यां च लव्धवन्तो महारथाः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२४
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या द्रोणो जितः सङ्ख्ये हार्दिक्यश्च महावलः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय १७१
युधिष्ठिर उवाच
दिष्ट्या धनञ्जय़ास्त्राणि त्वय़ा प्राप्तानि भारत |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १९५
भीष्म उवाच
दिष्ट्या धरन्ति ते वीरा दिष्ट्या जीवति सा पृथा |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या न युद्धमनसः सह दामोदरेण ते ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या न विमतिं काञ्चिद्भजित्वा तु पराजितः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२३
भीष्म उवाच
दिष्ट्या नाभिभवन्ति त्वां दैवस्तेऽय़मनुग्रहः |
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या नाहं जितः सङ्ख्ये परान्प्रेष्यवदाश्रितः |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या नाहं परावृत्तो युद्धे कस्याञ्चिदापदि |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या नाहं परावृत्तो वैरात्प्राकृतवज्जितः |
२६ क