शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनेन यत्कृष्णा एकवस्त्रा रजस्वला |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनेन संय़ुक्तः कर्णेन परिवर्धितः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनेन समरे रथिनो विरथीकृताः |
९२ क
सभा पर्व
अध्याय
६०
दुर्योधन उवाच
दुःशासनैष मम सूतपुत्रो; वृकोदरादुद्विजतेऽल्पचेताः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
दुःशासनो दुर्मुखश्च दुःसहश्च विशां पते ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो दुर्विषहः सुवाहुर्दुष्प्रधर्षणः |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो दुर्विषहो दुर्मुखो दुःसहस्तथा ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२३१
वैशम्पाय़न उवाच
दुःशासनो दुर्विषहो दुर्मुखो दुर्जय़स्तथा |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो द्वादशभिः कृपः शारद्वतस्त्रिभिः |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
६०
दुर्योधन उवाच
दुःशासनो नाथवतीमनाथव; च्चकर्ष वाय़ुः कदलीमिवार्ताम् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो निकुम्भश्च कुण्डभेदी उरुक्रमः ||
८४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो भारत भारती च; संशप्तकानां पृतना समृद्धा |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो भृशं क्रुद्धो युद्धाय़ार्जुनमभ्ययात् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो भृशोद्विग्नः प्राद्रवद्गजसंवृतः ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज कश्मलं चाविशन्महत् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज धृष्टद्युम्नमय़ोधय़त् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज पाण्डवं विशिखैस्त्रिभिः |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज भीमसेनेन पातितः ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज भ्राता भ्रातरमभ्ययात् ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज भय़ं त्यक्त्वा महारथः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज यत्तो यत्तमवारय़त् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज सव्यसाचिनमावृणोत् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महाराज सात्यक्तिं पर्यवारय़त् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो महेष्वासो वारय़ामास संय़ुगे ||
१७ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२३
कुन्त्यु उवाच
दुःशासनो यदा मौढ्याद्दासीवत्पर्यकर्षत |
११ क
वन पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
दुःशासनो याचतु भीमसेनं; सभामध्ये द्रुपदस्यात्मजां च ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो विकर्णश्च तथैव च विविंशतिः |
१२१ ख
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
दुःशासनो विकर्णश्च दुःसहोऽथ विविंशतिः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
दुःशासनो विकर्णश्च पाण्डवानानय़न्त्विह ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
दुःशासनो विकर्णश्च ये चान्ये धृतराष्ट्रजाः |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो विकर्णश्च रथानास्थाय़ सत्वराः |
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
दुःशासनो विशस्तश्च विकर्णश्च महावलः ||
४५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो वृतः सैन्यैः स्थितो व्यूहस्य पृष्ठतः ||
१९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनो वृषसेनो मद्रराजस्त्वमेव च |
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दुःशासनोऽथ शकुनिर्न निद्रामुपलेभिरे ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनोऽपि परय़ा शक्त्या पार्थमवारय़त् |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
दुःशासनौघं शलशल्यमत्स्यं; सुषेणचित्राय़ुधनागनक्रम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
दुःशीलोऽथाकृतात्मा च नृशंसः कितवस्तथा |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
दुःषन्त शतधा मूर्धा ततस्तेऽद्य फलिष्यति ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
दुःषन्तं शूरभीमौ च प्रपूर्वं वसुमेव च |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
दुःषन्तः खलु विश्वामित्रदुहितरं शकुन्तलां नामोपय़ेमे |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
दुःषन्तश्च ततो राजा पुत्रं शाकुन्तलं तदा |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
दुःषन्ताद्भरतो जज्ञे विद्वाञ्शाकुन्तलो नृपः |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
दुःषन्तेन करूषेण रामालर्कनलैस्तथा |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
दुःषन्तो भरतश्चैव चक्रवर्ती महाय़शाः ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
वासुदेव उवाच
दुःषासनश्च कर्णश्च शकुनिश्च ससैन्धवः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
दुःसहं चैव समरे भीमसेनोऽभ्यवर्तत ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
दुःसहं वज्रिणा सङ्ख्ये पराजिग्ये भृगोः सुतम् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
दुःसहः पञ्चदशभिर्विव्याधोरसि सात्यकिम् ||
३१ ख