chevron_left  दुर्मुखस्यarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखस्य तु भल्लेन सर्वावरणभेदिना |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखाय़ रथं शीघ्रं प्रेषय़ामास पाण्डवः ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखेन महाराज तव पुत्रेण पातितः ||
७० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो दशभिर्वाणैस्तथा दुःशासनोऽष्टभिः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्मुखो दुःसहः कर्ण उलूकोऽथ विविंशतिः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्मुखो दुःसहश्चैव ये चान्ये नानुशव्दिताः |
८३ क
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्मुखो दुःसहश्चैव ये चैवान्ये महारथाः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो दुःसहश्चैव विकर्णश्च शलस्तथा |
६९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो दुर्जय़श्चैव तथा दुर्मर्षणो युवा |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो दुष्प्रधर्षश्च विवित्सुर्विकटः समः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो नवभिर्वाणैर्दुःसहश्चापि सप्तभिः |
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखो नवभिर्वाणैस्ताडय़ामास भारत ||
२१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
दुर्मुखोऽभिमुखः शेते हतोऽरिगणहा रणे ||
७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन इति ख्यातः स ते कार्यं करिष्यति |
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन किमेवं मां वाक्षरैरभिकृन्तसि |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन कुतोमूलं निःश्वसन्निव गच्छसि ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन कुतोमूलं भृशमार्तोऽसि पुत्रक |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन जीवसि चेद्वाचं श्रोत्रसुखां शृणु |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन तदा तात स्मर्तासि वचनं मम ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १९४
कर्ण उवाच
दुर्योधन तव प्रज्ञा न सम्यगिति मे मतिः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन तवामित्रान्प्रख्यातान्युद्धदुर्मदान् |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
दुर्योधन न तेऽमर्षः कार्यः प्रति युधिष्ठिरम् |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन न शोचामि त्वामहं पुरुषर्षभ |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन न शोचामि त्वामहं भरतर्षभ |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५७
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन निवर्तस्व युद्धाद्भरतसत्तम |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
दुर्योधन निवोधेदं कुलार्थे यद्व्रवीमि ते |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन निवोधेदं मद्वाक्यं कुरुसत्तम |
६ क
वन पर्व
अध्याय २४१
कर्ण उवाच
दुर्योधन निवोधेदं यत्त्वा वक्ष्यामि कौरव |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन निवोधेदं यत्त्वा वक्ष्यामि कौरव |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
दुर्योधन निवोधेदं यत्त्वां वक्ष्यामि पुत्रक |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन निवोधेदं वचनं मम पुत्रक |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन निवोधेदं शौरिणोक्तं महात्मना |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
दुर्योधन निशम्यैतत्प्रतिपद्य यथेच्छसि |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १३०
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन ममाप्येतद्धृदि सम्परिवर्तते |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधन महावाहो निवोध वदतां वर |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन महावाहो शृणु वाक्यविदां वर |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन महावाहो साधु सम्यगवेक्ष्यताम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १९५
भीष्म उवाच
दुर्योधन यथा राज्यं त्वमिदं तात पश्यसि |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन विजानीहि यत्त्वां वक्ष्यामि पुत्रक |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधन विजानीहि स्थिरो भव विशां पते |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधन हृषीकेशं प्रपद्यस्व जनार्दनम् |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनं कौरवाणामाधिपत्येऽभ्यषेचय़म् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं ख्यापय़ामो धनं दास्यति पाण्डवः |
३० क
वन पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनं च कर्णं च यो वान्यः प्रतिय़ोत्स्यते ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं च कौरव्यं गदापाणिमवस्थितम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं च त्वरितो विव्याधाष्टभिराशुगैः |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनं च राजानं पुत्रांश्चैव पृथक्पृथक् |
५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनं च राजानं भ्रातॄंश्चास्य शताधिकान् |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं च वाणाभ्यां तीक्ष्णाभ्यां विरथीकृतम् |
२९ क
विराट पर्व
अध्याय ६४
उत्तर उवाच
दुर्योधनं च समरे सनागमिव यूथपम् |
२३ क