chevron_left  दुर्योधनस्यarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य पूजां च दृष्ट्वा व्रीडामुपागमन् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य प्रमुखे चिक्षेप गतचेतनम् ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य प्रीत्यर्थं राधेय़ेन दुरात्मना ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य भीमेन मृद्यमानं शिरः पदा |
३० क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य माता च जज्ञातेऽर्थविदावुभौ ||
९४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनस्य यद्वीर त्वय़ा वाचा प्रतिश्रुतम् |
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
दुर्योधनस्य रूपेण शृणु काव्यां गिरं मम ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य वशगाः कृताः कर्ण त्वय़ा पुरा ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य वालिश्यान्नैतदस्तीति चाव्रुवन् ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनस्य वृद्ध्यर्थं पृथिवीं योऽजय़त्प्रभुः |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य शकुनेर्मम दुःशासनस्य च |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य शान्त्यर्थमिति निश्चित्य भूमिपः |
४८ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य शिविरं रङ्गवद्विसृते जने ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य शूरस्य द्रौणेः शारद्वतस्य च |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य शूरस्य शरौघाञ्शीघ्रमस्यतः |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य सङ्ग्रामे तव वुद्धिपराक्रमैः ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्य सचिवा ये केचिदवशेषिताः |
७८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य सचिवैर्देशे देशे यथार्हतः |
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्य सेनासु योत्स्यमानाः प्रहारिणः ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनस्याग्निहोत्रे प्राक्रोशन्भैरवं शिवाः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
दुर्योधनस्यानुमते तवापि विदितं तथा ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्यान्तिकमेत्य शीघ्रं; सम्भाष्य दुःखार्तमुवाच वाक्यम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्यापि तदा कर्णमासाद्य पार्थिव |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय २
वलदेव उवाच
दुर्योधनस्यापि मतं च वेत्तुं; वक्तुं च वाक्यानि युधिष्ठिरस्य |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १
कृष्ण उवाच
दुर्योधनस्यापि मतं यथाव; न्न ज्ञाय़ते किं नु करिष्यतीति |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
दुर्योधनस्यावहासो भीमेन च सभातले ||
१०० ख
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्योत्तमरत्नचित्रं; चिच्छेद पार्थो मुकुटं शरेण |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनहितार्थाय़ के तदास्य पुरोऽभवन् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनहितार्थाय़ जय़ो दैवे प्रतिष्ठितः ||
६४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनहितार्थाय़ भर्तृपिण्डमनुस्मरन् ||
६३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनहिते युक्तमस्मद्युद्धाय़ चोद्यतम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनहिते युक्ता न तथास्मासु भारत |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनहिते युक्ताः समतिष्ठन्त केऽग्रतः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनादनु कृपस्ततः शारद्वतो यय़ौ |
१३ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
दुर्योधनाद्द्रोणसुतात्सैन्धवाच्च महारथात् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनादय़स्त्वन्ये व्राह्मणैः सह सङ्गताः |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनानुजाः सर्वे शूराः सन्त्यक्तजीविताः ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनापराधेन कुलं ते विनशिष्यति ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ५६
विदुर उवाच
दुर्योधनापराधेन कृच्छ्रं प्राप्स्यन्ति सर्वशः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनापराधेन क्षत्रं कृत्स्ना च मेदिनी ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनापराधेन क्षय़ं गच्छन्ति कौरवाः ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनापराधेन प्रजेय़ं विनशिष्यति ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
दुर्योधनापराधेन प्रजेय़ं विनशिष्यति ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
दुर्योधनापराधेन भीमार्जुनवलेन च ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
दुर्योधनापराधेन भीमार्जुनवलेन च ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनापराधेन वसुधा वसुधाधिपाः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनापराधेन शकुनेः सौवलस्य च |
७ क
स्त्री पर्व
अध्याय १३
गान्धार्यु उवाच
दुर्योधनापराधेन शकुनेः सौवलस्य च |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनार्थं तव चाप्रिय़ार्थं; यशोर्थमात्मार्थमपीश्वरार्थम् |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनार्थे योत्स्यामि सत्यमेतदिति प्रभो ||
४४ ग