chevron_left  दुर्योधनार्थेarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनार्थे शकुनिर्द्यूते निर्जितवान्पुरा |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनाय़ चिक्षेप त्रय़ोदश शिलाशितान् ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनाय़ दास्यामि पृथिवीं हतकण्टकाम् ||
३१ ग
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनाय़ व्यसृजद्भीमो भीमपराक्रमः ||
४३ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनाय़ाभिमुखं प्रय़ातो; भूय़ोऽर्जुनः प्रिय़माजौ चिकीर्षन् ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनाय़ाभिमुखं प्रय़ान्तं; कुरुप्रवीराः सहसाभिपेतुः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनाय़ेषुवरं तं द्रौणिः सप्तधाच्छिनत् ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विदुर उवाच
दुर्योधने च शकुनौ मूढे दुःशासने तथा |
६६ क
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधने चापि विवर्धमाने; कथं न सीदत्यवनिः सशैला ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधने चापि विवर्धमाने; युधिष्ठिरे चासुख आत्तराज्ये |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
दुर्योधने तदा राजन्पतिते तनय़े तव ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधने धार्तराष्ट्रे तद्वचोऽप्रतिनन्दति |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधने परावृत्ते शैनेय़स्तव वाहिनीम् |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधने प्रय़ाते च पृष्ठतः पुरुषर्षभे ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन किं कार्यं द्रक्ष्यध्वं यदि जीवति |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनेन च द्रोणस्तथोक्तः कुरुसंसदि |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय २३
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनेन तत्सर्वं प्राप्तं सूत मय़ा सह ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेन ते तात कथमासीत्समागमः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेन ते वीरा मानिताश्च विशेषतः |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन ते वीरा वार्यमाणाः पुनः पुनः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेन निकृता वर्षमद्य चतुर्दशम् ||
५८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनेन निकृतो मनस्वी; नो चेत्क्रुद्धः प्रदहेद्धार्तराष्ट्रान् ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
दुर्योधनेन पार्थस्तु विवरे सम्प्रदर्शिते |
३२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनेन पृथिवी क्षय़िता वित्तकारणात् |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन प्रकृतां क्षिप्रहस्तेन धन्विना ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
दुर्योधनेन यद्येतत्पापं तेषु पुरा कृतम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेन राजानः प्रय़युः पाण्डवान्प्रति ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
दुर्योधनेन वार्ष्णेय़ विग्रहश्चापि पाण्डवैः ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेन शल्येन सौवलेन च वीर्यवान् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन सम्पृष्ट एतमर्थं पितामहः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन सहसा पाण्डवी पृतना रणे |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेन सहितो द्रोणं रात्रावुपागमत् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४
नारद उवाच
दुर्योधनेन सहितो मुमुदे भरतर्षभ ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेनानुमतानरिघ्ना; न्समुच्चितान्सुरथान्सारभूतान् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनेनैवमुक्तो द्रौणिराहवदुर्मदः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनेऽथ विमुखे राजपुत्रशते हते |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनेय़ं चिन्ता मे शश्वन्नाप्युपशाम्यति |
५ क
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनो गुरुद्वेषी त्यक्ताचारसुहृज्जनः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ५६
विदुर उवाच
दुर्योधनो ग्लहते पाण्डवेन; प्रिय़ाय़से त्वं जय़तीति तच्च |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनो दीनमना विसञ्ज्ञः; पुनः पुनर्न्यश्वसदार्तरूपः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
दुर्योधनो दुर्विषहो दुर्मुखो दुष्प्रधर्षणः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनो धनुश्छित्त्वा धृष्टद्युम्नस्य संय़ुगे |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनो धार्तराष्ट्रो विवर्णः समपद्यत ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
दुर्योधनो न ह्यलमद्य दातुं; जीवंस्तवैतन्नृपते कथञ्चित् |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनो नागकुलस्य मध्ये; महावीर्यः सह सैन्यप्रवीरैः |
९८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनो नाभ्यगृह्णान्मूढः पथ्यमिवौषधम् ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
दुर्योधनो नाम महान्राजासीद्राजसत्तम ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
दुर्योधनो भारतानां कुलघ्नः; सोऽय़ं युक्तो भविता कालहेतुः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनो भीमसेनमभ्यगच्छन्मनस्विनम् |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनो भृशं क्रुद्धः स्वय़ं सौभद्रमभ्ययात् ||
१ ख