chevron_left  तेनarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
तेन ते विशिखा मुक्ता यमदण्डोपमाः शिताः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
तेन ते व्राह्मणाः पूज्याः स्वधर्ममनुतिष्ठता ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
तेन ते श्रावय़िष्यामि यत्तद्व्रह्म सनातनम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
तेन ते सन्धिरेवास्तु विश्वसास्मिन्यथा मय़ि |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४६
भीष्म उवाच
तेन ते समनुज्ञाता व्राह्मणेन भुजङ्गमाः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २९४
शक्र उवाच
तेन ते सर्वमाख्यातमेवमेतन्न संशय़ः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
तेन ते सर्वलोकेषु दीप्यते प्रथितं यशः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०
ऋषय़ ऊचुः
तेन ते सह शक्रेण सन्धिर्भवतु शाश्वतः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तेन ते हूय़मानस्य राष्ट्रस्यास्य क्षय़ो महान् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
तेन तेन प्रदहतो भगवन्तौ यदिच्छतः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २८९
व्राह्मण उवाच
तेन तेन वशे भद्रे स्थातव्यं ते भविष्यति ||
१७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २२
गान्धार्यु उवाच
तेन तेन विकर्षन्ति पश्य कालस्य पर्ययम् ||
३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तेन व्यदृश्यन्त समुपेता नराधिपाः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
तेन तेन शरीरेण तत्तत्फलमुपाश्नुते ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
तेन तेन शरीरेण तत्तत्फलमुपाश्नुते ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९९
मनुरु उवाच
तेन तेन शरीरेण तत्तत्फलमुपाश्नुते ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४२
सूत उवाच
तेन तेन शरीरेण तदवश्यमुपाश्नुते |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
तेन तेन स्म दीर्यन्ते सर्वसैन्यानि भारत ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
तेन तेनाभ्यवर्तन्त कुर्वन्तो व्याकुला दिशः ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
तेन तेनासि सम्पन्ना समुपेता च भामिनी ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
तेन तेनैव धावन्ति मनोमारुतरंहसः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
तेन तेनैव प्रीय़न्ते पितरो देवतास्तथा ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय ८
सुदेष्णो उवाच
तेन तेनैव सम्पन्ना काश्मीरीव तुरङ्गमा ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १६६
अर्जुन उवाच
तेन तेषां प्रणुन्नानामाशुत्वाच्छीघ्रगामिनाम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
शक्र उवाच
तेन तेऽहं वले वज्रं न विमुञ्चामि मूर्धनि ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय २२०
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्यक्तानसन्त्याज्यानृषीनण्डगतान्वने |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
तेन त्वं छिन्नमूलेन कं तोषय़ितुमर्हसि |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अकृतव्रण उवाच
तेन त्वं निर्जिता भद्रे यस्मान्नीतासि भामिनि |
११ क
वन पर्व
अध्याय ५८
दमय़न्त्यु उवाच
तेन त्वं पूजितो राजन्सुखं वत्स्यसि नो गृहे ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्वं यज राजेन्द्र शृणु चेदं वचो मम ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्वं व्रह्मणा तात संय़ुक्तः सुसमाहितः ||
९ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १८१
भीष्म उवाच
तेन त्वभिहतो गाढं वाणच्छेदवशं गतः |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
तेन त्वमासां माहात्म्यं न वेत्थ शृणु तत्प्रभो |
१५ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्वमेवं गमितो मय़ा श्रेय़ोर्थिना नृप ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
तेन त्वा मर्षय़े शक्र दुर्मर्षणतरस्त्वय़ा ||
८० ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
तेन त्वां दुरवापात्मञ्शप्स्ये चक्रगदाधर ||
३९ ख
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्वां नाभिधावन्ति गन्धर्वाः सूर्यवर्चसः ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
महेश्वर उवाच
तेन त्वां परिपृच्छामि धर्मज्ञे धर्मवादिनि |
६ क
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तेन त्वां भ्रंशय़िष्यामि जीवितात्पर्वताश्रय़ ||
२० ग
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
सञ्जय़ उवाच
तेन दग्धानि सैन्यानि पृष्ठतोऽनुदहाम्यहम् ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
तेन दत्तानि दानानि पापेन हतवुद्धिना |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
तेन दासीसहस्रेण सार्धं शर्मिष्ठय़ा तदा |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
तेन दीप्तांशुजालेन निर्दग्धा दानवास्तदा |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५
भीष्म उवाच
तेन दुर्वारितास्त्रेण निमित्तचपलेषुणा |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
तेन दुष्टस्वभावेन जात्यन्धास्ते भवन्ति ह ||
४९ ख
विराट पर्व
अध्याय ३९
अर्जुन उवाच
तेन देवमनुष्येषु जिष्णुनामास्मि विश्रुतः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
तेन देवमनुष्येषु निरय़े चोपपद्यते ||
३७ ख
विराट पर्व
अध्याय ३९
अर्जुन उवाच
तेन देवमनुष्येषु वीभत्सुरिति मां विदुः ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय ३९
अर्जुन उवाच
तेन देवमनुष्येषु सव्यसाचीति मां विदुः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९१
उतथ्य उवाच
तेन देवासुरा राजन्नीताः सुवहुशो वशम् ||
२४ ख