वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
दृष्ट्वा त्वग्निरथर्वाणं ततो वचनमव्रवीत् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा त्वदीय़ा राजेन्द्र समन्तात्पर्यवारय़न् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
दृष्ट्वा त्वमात्मनात्मानं निरात्मा भव सर्ववित् ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा त्वरितमाय़ान्तं भीमं युद्धाभिनन्दिनम् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा त्वां निर्दहेदद्य क्रोधदीप्तेन चक्षुषा ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा त्वां पाण्डवैर्वीरैर्भ्रातृभिः सह सङ्गतम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा त्वां मम सञ्जाता त्वय़्यनुक्रोशिनी मतिः ||
१०८ ख
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
दृष्ट्वा दिग्वाससं भूमौ स्थितं दीनमधोमुखम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुःशासनं राजा तथा शरशताचितम् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनं कृष्णस्त्वतिक्रान्तं सहानुगम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनं तत्र कृष्णय़ोः प्रमुखे स्थितम् ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनं राजन्मैत्रेय़ं कोप आविशत् ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनं राजा कुन्तीपुत्रस्तथागतम् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनं हृष्टाः सर्वे पाण्डवसैनिकाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनः क्षिप्रमुपाय़ात्तममर्षितः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनस्तूर्णं स्वसैन्यं समचूचुदत् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनेनोरू द्रौपद्या दर्शितावुभौ ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनो मन्दो भृशं तप्स्यति पातितम् ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनो राजन्रणे पार्थस्य विक्रमम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनो राजा इदं वचनमव्रवीत् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सात्यकिरु उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनो राजा पश्चात्तापं गमिष्यति ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सात्यकिरु उवाच
दृष्ट्वा दुर्योधनो राजा सन्तप्स्यति महामृधे ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा दुहितरं काव्यो देवय़ानीं ततो वने |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणं छाद्यमानं तैर्भास्करमिवाम्वुदैः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणं ततः शूरः सत्यजित्सत्यविक्रमः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणस्य कर्माणि तथारूपाणि मारिष ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणस्य विक्रान्तं पाण्डवान्भय़माविशत् |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणाय़ पाञ्चाल्यं व्रजन्तं युद्धदुर्मदम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रोणोऽव्रवीद्योधान्पर्याप्नुत नराधिपम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा द्रोणोऽव्रवीद्राजन्धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रौणिरसम्भ्रान्तमसम्भ्रान्ततरोऽभ्ययात् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा द्रौणेर्महत्कर्म वासवस्येव संय़ुगे ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
दृष्ट्वा द्वेषात्प्राहसन्त सुहृत्सम्भाविता ह्यपि ||
७७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा ध्वजाग्रं पार्थानां धार्तराष्ट्रो महामनाः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा नगरकल्पं तमुद्धूतं सैन्यसागरम् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा नातिप्रभं सोमं तथा सूर्यं च पार्थिव |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा निपतितं वीरं च्युतं चन्द्रमिवाम्वरात् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
दृष्ट्वा निर्वेदमापन्नो व्यासवाक्यप्रचोदितः |
२२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा निवर्तितं रामं सुहृद्वाक्येन तेन वै |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा निवारितान्देवान्माधवेनार्जुनेन च |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा निवृत्तमादित्यं प्रवृत्तं चोत्तराय़णम् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
दृष्ट्वा न्यवर्तय़ंस्तात किं कार्यमिति चाव्रुवन् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
दृष्ट्वा पप्रच्छुरन्योन्यं यय़ातिं नृपतिं प्रति ||
२० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
दृष्ट्वा परिपतन्त्येताः प्रगृह्य सुभुजा भुजान् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा परिवृतं राजन्भीमसेनः किरीटिनम् ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वा पाण्डुं च माद्रीं च शय़ानौ धरणीतले |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा पार्थं तदाय़स्तं चिन्तापरिगतं तदा ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा पार्थं महावाहुं भीष्माय़ोद्यन्तमाहवे ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा पार्थं महावाहुं भीष्माय़ोद्यन्तमाहवे ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
धृतराष्ट्र उवाच
दृष्ट्वा पार्थांश्च सङ्ग्रामे युद्धाय़ समवस्थितान् |
३३ क