शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
देवतातिथिशेषेण यात्रां प्राणस्य संश्रय़ ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
देवतानन्तरं विप्रांस्तपःसिद्धांस्तपोधिकान् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
युधिष्ठिर उवाच
देवतानां च को देवः पितॄणां च तथा पिता |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
देवतानां च सङ्कल्पमनुभावं च धीमताम् |
६१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
देवतानां द्विजानां च वर्तितव्यं यथाविधि ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
देवतानां पितॄणां च भुङ्क्ते दत्त्वा तु यः सदा |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
देवतानां पितॄणां च व्राह्मणानां च पूजने |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
देवतानां पितॄणां च समक्षमरिसूदनः ||
१४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३७
व्यास उवाच
देवतानां पितॄणां च हव्यकव्यविनाशनः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
देवतानां पितॄणां चाप्यनृणश्चानसूय़कः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
देवतानां प्रसादेन सर्वमेतद्भविष्यति ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
देवतानां भय़करः स हतः शूलपाणिना ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४७
नागभार्यो उवाच
देवतानां महाभाग धर्मचर्या न हीय़ते |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
देवतानां मुखं वीर अनलोऽनिलसारथिः ||
७७ ग
वन पर्व
अध्याय
२७७
राजो उवाच
देवतानां यथा वाच्यो न भवेय़ं तथा कुरु ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
देवतानां यथा स्कन्दः सेनानीः प्रभुरव्ययः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
देवतानां यथाकालं प्रसादं प्रतिपालय़ |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
देवतानां समावाय़मेकस्थं पितरं विदुः |
४० क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
देवतानां हि यत्कार्यं मय़ा प्रत्यक्षतः श्रुतम् |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
देवतानामपि रणे सशक्राणां महीपते |
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैश्रवण उवाच
देवतानामभून्मन्त्रः कुशवत्यां नरेश्वर |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
युधिष्ठिर उवाच
देवतानामृषीणां च पितॄणां च महात्मनाम् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
देवतानामृषीणां च वाल्येऽपि स महातपाः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
देवतानामृषीणां च हर्षान्नादो महानभूत् ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
देवताप्रतिमाश्चापि कम्पन्ति च हसन्ति च |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१४
भीष्म उवाच
देवताभिश्च ये सार्धं पितृभिश्चोपभुञ्जते |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१४
भीष्म उवाच
देवताभ्यः पितृभ्यश्च भृत्येभ्योऽतिथिभिः सह |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
देवताभ्यः पितृभ्यश्च संविभागोऽतिथिष्वपि |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
देवताभ्यः सुमनसो यो ददाति नरः शुचिः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
देवताभ्यर्चनपरो द्विजातिजनवत्सलः |
७४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
देवताभ्यो नमस्कृत्य गुरुभ्यश्चैव सर्वशः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
जरासन्ध उवाच
देवतार्थमुपाकृत्य राज्ञः कृष्ण कथं भय़ात् |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
मतङ्ग उवाच
देवतासुरमर्त्येषु यत्पवित्रं परं स्मृतम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०८
गुरुरु उवाच
देवतास्ताः प्रकाशन्ते हृष्टा यान्ति तमीश्वरम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
देवतास्ते प्रय़च्छन्ति समस्ता इति नः श्रुतम् ||
५८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
देवतास्ते प्रय़च्छन्ति सुवर्णं ये ददत्युत |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
देवताय़तनस्थस्तु षड्रात्रेण स मृत्युभाक् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
देवताय़तनस्थाश्च कौरवेन्द्रस्य देवताः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
देवताय़तनानां च पूजा वहुविधास्तथा |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
देवताय़तनानां च पूजां प्रेक्ष्य कृतां द्विजैः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
देवतीर्थे नरः स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत् |
८६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
देवतेव हि सर्वार्थान्कुर्याद्राजा प्रसादितः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
देवतेय़ं गृहस्यास्य शापान्नूनं विरूपिता |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
देवत्वं प्राप्य चेन्द्रत्वं नैव तुष्येस्तथा सति ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
देवत्वं यान्ति कल्याणि शृणु चेदं वचो मम ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
देवत्वमपि च प्राप्ताः संसिद्धाश्च महावलाः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
देवदत्तं च कौन्तेय़ः पाञ्चजन्यं च केशवः ||
११ ग
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
देवदत्तं च पार्थाय़ ददौ शङ्खमनुत्तमम् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१७१
अर्जुन उवाच
देवदत्तं च मे शङ्खं देवः प्रादान्महारवम् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
देवदत्तं महाशङ्खं पूरय़ामास पाण्डवः ||
१० ख