द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
देवदत्तस्य घोषेण गाण्डीवनिनदेन च ||
१४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
देवदत्तां पतिर्भार्यां वेत्ति धर्मस्य शासनात् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८१
भृगुरु उवाच
देवदानवगन्धर्वदैत्यासुरमहोरगाः |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
देवदानवगन्धर्वमनुष्यपतगोरगाः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वा नागा यक्षाः पतत्रिणः |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
देवदानवगन्धर्वाः किंनरोरगराक्षसाः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
देवदानवगन्धर्वाः पिशाचोरगराक्षसाः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वाः पिशाचोरगराक्षसाः |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वाः पिशाचोरगराक्षसाः |
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वाः सर्व एवावतस्थिरे |
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
भीष्म उवाच
देवदानवगन्धर्वान्पिशाचोरगराक्षसान् ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वान्विजेतारो ह्यविस्मिताः |
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
सञ्जय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वास्त्रस्ता आसन्विशां पते |
५ क
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
देवदानवगन्धर्वैः पूजितं शाश्वतीः समाः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
देवदानवगन्धर्वैः पूजितं शाश्वतीः समाः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
देवदानवगन्धर्वय़क्षकिम्पुरुषैर्युधि |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
देवदानवगन्धर्वय़क्षराक्षसपन्नगाः |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
देवदानवनागानां सर्वेषामीश्वरो हि सः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४४
व्रह्मो उवाच
देवदानवभूतानां पिशाचोरगरक्षसाम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
देवदानवभूतानां सद्यस्तुष्टिकरः स्मृतः |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
५९
जनमेजय़ उवाच
देवदानवसङ्घानां गन्धर्वाप्सरसां तथा |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
देवदानवसिद्धानां तथा वैश्रवणस्य च |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२१३
कन्यो उवाच
देवदानवय़क्षाणां किंनरोरगरक्षसाम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
देवदानवय़क्षाणां भय़ं जनय़ते महत् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
देवदानवय़क्षाणां मानवानां च साधनम् ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
देवदानवय़क्षाणां सर्पगन्धर्वरक्षसाम् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
देवदानवय़क्षाणामृषीणां रक्षसां तथा |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
देवदारुमय़ौ द्वौ तु यूपौ कुरुपतेः क्रतौ |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
देवदारुवने स्नात्वा धूतपाप्मा कृतोदकः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
देवदुन्दुभय़श्चैव नेदुः स्वय़मुदीरिताः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
देवदुन्दुभय़श्चैव प्रावाद्यन्त महास्वनाः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
देवदुन्दुभय़श्चैव सम्प्रणेदुर्महास्वनाः |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
देवदुन्दुभय़ो नेदुः पुष्पवर्षं पपात च ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
देवदुन्दुभय़ो नेदुः पुष्पवर्षाणि चापतन् |
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
देवदुन्दुभय़ो नेदुर्ववौ च पवनः शिवः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
देवदूत नमस्तेऽस्तु गच्छ तात यथासुखम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
देवदूतो विमानेन मुद्गलं प्रत्युपस्थितः ||
३० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
देवदूतोऽव्रवीच्चैनमेतावद्गमनं तव ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
देवदेवः शिवः शर्वो जागर्ति सततं प्रभुः |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
देवदेवप्रसादाच्च क्षिप्रं फलमवाप्यते ||
११२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
देवदेवमुखोऽसक्तः सदसत्सर्वरत्नवित् ||
१०५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
देवदेवर्षिराचष्ट नारदः सर्वलोकदृक् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
देवदेवस्य ते पार्थ व्याख्यातं शतरुद्रिय़म् ||
१०१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३
शल्य उवाच
देवदेवेन सङ्गम्य विष्णुना प्रभविष्णुना |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२९८
युधिष्ठिर उवाच
देवदेवो मय़ा दृष्टो भवान्साक्षात्सनातनः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
देवदेवोऽसि देवानामिति द्वैपाय़नोऽव्रवीत् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
देवद्रव्यविनाशेन व्रह्मस्वहरणेन च |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
देवद्विजातिपूजाय़ां रतो भरतसत्तम ||
१३५ ग
सभा पर्व
अध्याय
५३
शकुनिरु उवाच
देवनाद्विनिवर्तस्व यदि ते विद्यते भय़म् ||
१२ ख