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वन पर्व
अध्याय २३५
वैशम्पाय़न उवाच
देवराडपि गन्धर्वान्मृतांस्तान्समजीवय़त् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
देवराडपि तं दृष्ट्वा संरव्धमिव फल्गुनम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
भीष्म उवाच
देवर्षिं तु शुको दृष्ट्वा नारदं समुपस्थितम् |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिं पर्यपृच्छन्त यथावृत्तं कुरून्प्रति ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिकल्पा नृपते वहवो राजसत्तमाः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
देवर्षिगणजुष्टोऽपि वेदध्वनिनिराकृतः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिगन्धर्वसमाकुलं त; त्सुपर्णनागासुरसिद्धजुष्टम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
देवर्षिगन्धर्वय़ुतः परमो मेरुरुच्यते |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
देवर्षिचरितं गार्ग्यः कृष्णात्रेय़श्चिकित्सितम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
देवर्षिचरितं राजन्राजर्षिभिरधिष्ठितम् |
१०९ क
वन पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिणा च सहितो लोमशेन महात्मना ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिणा नारदेन देवस्थानेन चैव ह ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६
व्यास उवाच
देवर्षिणा समागम्य नारदेन स पार्थिवः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
देवर्षिनारदप्रोक्तमेतदाचारलक्षणम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९२
उतथ्य उवाच
देवर्षिपितृगन्धर्वाः कीर्तय़न्त्यमितौजसः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
देवर्षिपितृगुर्वर्थं वृद्धातुरवुभुक्षताम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिपितृय़ज्ञार्थमारभ्यन्त तदा क्रिय़ाः |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिभिरसङ्ख्येय़ैस्तथा व्रह्मर्षिभिर्वरैः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिर्नारदो राजन्नाजगाम युधिष्ठिरम् ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
देवर्षिर्लोमशो दृष्टस्ततः प्राप्तोऽस्म्यनुस्मृतिम् |
२० क
सभा पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिर्वासवगुरुर्देवराजाय़ धीमते |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
देवर्षिविषय़ाञ्ज्ञात्वा योगानामपि चेश्वरान् |
९ क
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षिसिद्धचरितानप्सरोगणसेवितान् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९८
कण्व उवाच
देवर्षे नैव मे कार्यं विप्रिय़ं त्रिदिवौकसाम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय २००
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षेरुपविष्टस्य स्वय़मर्घ्यं यथाविधि |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षय़ः पुण्यकृतो व्राह्मणाश्च वहुश्रुताः |
६६ क
वन पर्व
अध्याय ९२
लोमश उवाच
देवर्षय़श्च कार्त्स्न्येन तथा त्वमपि वेत्स्यसे ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २६
व्राह्मण उवाच
देवर्षय़श्च नागाश्च असुराश्च प्रजापतिम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
देवर्षय़श्च मुदितास्ततो जग्मुर्यथागतम् |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
देवर्षय़श्च सिद्धाश्च वृहस्पतिपुरोगमाः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय १५२
राक्षसा ऊचुः
देवर्षय़स्तथा यक्षा देवाश्चात्र वृकोदर |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७
अगस्त्य उवाच
देवर्षय़ो महाभागास्तथा व्रह्मर्षय़ोऽमलाः |
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
देवर्षय़ो ह्यत्र पुण्या व्रह्मराजर्षय़स्तथा |
१९२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
देवलः काश्यपश्चैव हस्तिकाश्यप एव च ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
देवलस्तु यथाशक्ति पूजय़ामास भारत |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
सिद्धा ऊचुः
देवलस्तु वचः श्रुत्वा भूतानां करुणं तथा |
५६ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
देवलस्याश्रमे राजन्न्यवसत्स महाद्युतिः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
देवलो दर्शय़न्नेव नैवाय़ुञ्जत धर्मतः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
भीष्म उवाच
देवलोकं तथा तिर्यङ्मानुष्यमपि चाश्नुते |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
देवलोकं प्रपद्यन्ते ये धर्मं पर्युपासते ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
देवलोकं यय़ुः केचित्केचिद्व्रह्मसदस्तथा |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
देवलोकगतस्यापि नाम तस्य न नश्यति ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
देवलोकच्युताः सर्वे जाय़न्ते तत्र मानवाः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
देवलोकच्युताः सर्वे तथा विरजसो नृप ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
देवलोकप्रतीकाशं सर्वतः सुमनोहरम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
देवलोकमवाप्नोति सप्तरात्रोषितः शुचिः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
देवलोकादिमं लोकं द्रक्ष्यामः पुनरागतम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २५
अर्जुन उवाच
देवलोकाद्व्रह्मलोकं गन्धर्वाप्सरसामपि ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
देवलोकाद्व्रह्मलोकं सञ्चरन्पुण्यकृद्वशी |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
देवलोके नृलोके च सदाचारा वुधैः स्मृताः |
४ क