शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
देवान्मनुष्यान्गन्धर्वानत्यरिच्यन्त दक्षिणाः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
देवान्यज्ञमुषश्चान्यान्सृजन्पञ्चदशोत्तरान् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
देवान्यज्ञैरृषीन्वेदैरर्चित्वा चैव यत्नतः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
देवान्रजस्तमश्चैव समाविविशतुस्तदा |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
देवान्रथवरं कृत्वा विनिय़ुज्य च सर्वशः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
देवान्वाग्भिः पितृनद्भिस्तर्पय़ित्वाजगाम ह ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
देवान्सन्तापय़ंस्तत्र महादेवो धृतव्रतः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
देवान्सन्त्रासय़ंश्चापि दैत्यांश्चापि प्रहर्षय़न् ||
६१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११४
वृहस्पतिरु उवाच
देवापि मार्गे मुह्यन्ति अपदस्य पदैषिणः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
देवापि मार्गे मुह्यन्ति अपदस्य पदैषिणः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
देवापि मार्गे मुह्यन्ति अपदस्य पदैषिणः ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
देवापि मार्गे मुह्यन्ति अपदस्य पदैषिणः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
देवापिः खलु वाल एवारण्यं प्रविवेश |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
देवापिः शन्तनुश्चैव वाह्लीकश्च महारथः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
देवापिरभवज्ज्येष्ठो वाह्लीकस्तदनन्तरम् |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३९
जनमेजय़ उवाच
देवापिश्च कथं व्रह्मन्विश्वामित्रश्च सत्तम |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
देवापिश्च महाराज व्राह्मण्यं प्रापतुर्महत् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
देवापिस्तु प्रवव्राज तेषां धर्मपरीप्सय़ा |
५३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
देवापिस्तु महातेजास्त्वग्दोषी राजसत्तमः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
देवारण्यानि सर्वाणि प्रिय़ाणि च दिवौकसाम् |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
देवारण्यान्यतिक्रम्य पर्वतांश्च वहूंस्ततः |
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
देवारण्येषु पुण्येषु तथा पर्वतसानुषु |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
देवार्थं पितृय़ज्ञार्थमन्नं श्रद्धाकृतं मय़ा |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
दुर्योधन उवाच
देवार्हा मानुषा भोगाः प्राप्ता असुलभा नृपैः |
४९ क
वन पर्व
अध्याय
१०९
लोमश उवाच
देवाश्च ऋषय़श्चैव वसन्त्यद्यापि भारत |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
देवाश्च गर्हां गच्छन्ति धर्मो नास्तीति चोच्यते ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
देवाश्च दानवाश्चैव तथा व्रह्मर्षय़ोऽमलाः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
देवाश्च नरदेवाश्च तुल्या इति विशां पते ||
१४० ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
देवाश्च यत्नात्पश्यन्ति दिव्यं तेजोमय़ं शिवम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
देवाश्च युय़ुधानस्य गन्धर्वाश्च विशां पते |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
इन्द्र उवाच
देवाश्च वहु मन्यन्ते धर्मकामं नरेश्वरम् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
देवाश्च शप्ता रुद्राण्या प्रजोच्छेदे पुरा कृते |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६
वृहस्पतिरु उवाच
देवाश्च सर्वे नहुषं भय़ार्ता; न पश्यन्तो गूढरूपाश्चरन्ति ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
देवाश्च सर्वे राजेन्द्र प्रभासं प्राप्य पुष्कलम् |
७१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९
अग्निरु उवाच
देवाश्च सर्वे वशगास्तस्य राज; न्सन्देशं त्वं शृणु मे देवराज्ञः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
देवाश्चापि भृशं त्रस्तास्तथा सर्वे महर्षय़ः ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
देवाश्चाप्यद्रवन्सर्वे ततो भीता दिशो दश ||
४० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
देवाश्चाप्यस्य नाश्नन्ति पापस्य व्राह्मणद्विषः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५६
भीष्म उवाच
देवाश्चित्तममन्यन्त सदृशं यज्ञकर्मणि ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
देवाश्चैवोत्तरेणासन्सर्वतस्त्वृषय़ोऽभवन् ||
२१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३८
कुन्त्यु उवाच
देवाश्चैश्वर्यवन्तो वै शरीराण्याविशन्ति वै ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
देवासुरं च सङ्ग्रामं सोऽपश्यदुदय़े गिरौ ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
देवासुरगणाध्यक्षो देवासुरगणाग्रणीः ||
१४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
देवासुरगुरुर्देवः सर्वभूतनमस्कृतः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
देवासुरगुरुर्देवो देवासुरनमस्कृतः ||
१४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् |
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
देवासुरमनुष्याणां न प्रकाशो भवेदिति ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
देवासुरमनुष्याणां यच्च गुह्यं सनातनम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
देवासुरमनुष्याश्च गन्धर्वोरगराक्षसाः |
४३ क