chevron_left  वृथामरणमर्हस्त्वंarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
वृथामरणमर्हस्त्वं वृथाद्य न भविष्यसि ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १४२
भीम उवाच
वृथामरणमर्हस्त्वं वृथाद्य न भविष्यसि ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
कश्यप उवाच
वृथामांसं समश्नातु वृथादानं करोतु च |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
वृथामांसान्यभुञ्जानः शूद्रो वैश्यत्वमृच्छति ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय १४२
भीम उवाच
वृथामांसैर्वृथा पुष्टो वृथा वृद्धो वृथामतिः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
वृथामृत्युं न कुर्वीरंस्त्वत्कृते मधुसूदन ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
वृथारम्भाश्च ये केचिद्वृथादानानि यानि च |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १७१
और्व उवाच
वृथारोषप्रतिज्ञो हि नाहं जीवितुमुत्सहे |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धं मां हतपुत्रं च धर्मपत्न्या सहानय़ा |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ६
धृतराष्ट्र उवाच
वृद्धं मामभ्यनुज्ञातुं त्वमर्हसि जनाधिप ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
वृद्धं मामभ्यसूय़न्ति पुत्रा मन्युपराय़णाः |
९८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
वृद्धं वलं न हन्तव्यं नैव स्त्री न च वै द्विजः |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६३
धृतराष्ट्र उवाच
वृद्धं शान्तनवं भीष्मं तितिक्षस्व पितामहम् ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
वृद्धः किल समुद्रान्ते कश्चिद्धंसोऽभवत्पुरा |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
वृद्धक्षत्रः सैन्धवस्य पिता जगति विश्रुतः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
वृद्धक्षत्रस्य दाय़ादं पितुरत्यन्तवैरिणम् |
६१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
वृद्धक्षत्रस्य दाय़ादमाससाद परन्तपः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
वृद्धक्षत्रस्य नृपतेरलक्षितमरिन्दम ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
वृद्धक्षत्रो वनं यातस्तपश्चेष्टं समास्थितः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विदुर उवाच
वृद्धप्रज्ञः पुण्यमेव नित्यमारभते नरः ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
वृद्धमृद्धं गुणैः सर्वैर्ययातिमिव नाहुषम् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
राजन्य उवाच
वृद्धरूपोऽसि चण्डाल वालवच्च विचेष्टसे |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
वृद्धवालजडान्धेषु सुप्तभीतोत्थितेषु च ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
वृद्धवालातुरकृशास्त्वाकाशे प्रभविष्णवः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
वृद्धवालातुरैर्वैद्यैर्ज्ञातिसम्वन्धिवान्धवैः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
वृद्धवालानुपादाय़ चातुर्वर्ण्यसमागमे ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१५
प्रह्राद उवाच
वृद्धशुश्रूषय़ा शक्र पुरुषो लभते महत् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धश्च मान्यः पृथिवीपतीनां; पितामहो रामजनार्दनाभ्याम् ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११
भीष्म उवाच
वृद्धसेविषु दान्तेषु सत्त्वज्ञेषु महात्मसु ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १४
गान्धार्यु उवाच
वृद्धस्यास्य शतं पुत्रान्निघ्नंस्त्वमपराजितः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
वृद्धां पर्यङ्कमासीनां सर्वाभरणभूषिताम् ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वृद्धां प्रव्रजितां चैव तथैव च पतिव्रताम् |
१२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
वृद्धाः स्त्रिय़ो याश्च गुणोपपन्ना; या ज्ञाय़न्ते सञ्जय़ मातरस्ताः |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
वृद्धानपृष्ट्वा सन्देहं महच्छ्वभ्रमितोऽर्हति |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
वृद्धानां भारतप्तानां स्त्रीणां वालातुरस्य च |
१२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
वृद्धानां वचनं श्रुत्वा यो ह्युत्थानं प्रय़ोजय़ेत् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
वृद्धानां व्रुवतां तात श्रुतं मे यत्प्रभाषसे |
१० क
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धानुशासने तात तिष्ठतः सत्यशीलिनः ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धानुशासने मग्नाः सत्यव्रतपराय़णाः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय २३१
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धान्दुर्योधनामात्यान्भीमसेनोऽभ्यभाषत ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
वृद्धान्नातिवदेज्जातु न च सम्प्रेषय़ेदपि |
२० क
वन पर्व
अध्याय २८४
कर्ण उवाच
वृद्धान्वालान्द्विजातींश्च मोक्षय़ित्वा महाभय़ात् ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
वृद्धाभिश्चाभिरामाभिः परिचारार्थमच्युतः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
वृद्धावमन्तुः परुषस्य चैव; किं ते चिरं मामनुवृत्य रूक्षम् ||
१०३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वृद्धाय़ भारतप्ताय़ गर्भिण्यै दुर्वलाय़ च ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय १९६
द्रोण उवाच
वृद्धिं च परमां व्रूय़ात्तत्संय़ोगोद्भवां तथा ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वृद्धिं दृष्ट्वा समुद्राणां क्षय़ं तेषां तथा पुनः |
४७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ११
धृतराष्ट्र उवाच
वृद्धिक्षय़ौ च विज्ञेय़ौ स्थानं च कुरुनन्दन |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
वृद्धिमाकाङ्क्षता नित्यं गावः कार्याः प्रदक्षिणाः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८०
पराशर उवाच
वृद्धे वृद्धिमवाप्नोति सलिले सलिलं यथा ||
२० ख