chevron_left  देव्यास्तीर्थेarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
देव्यास्तीर्थे नरः स्नात्वा लभते रूपमुत्तमम् ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
देव्यास्तु दक्षिणार्धेन रथावर्तो नराधिप |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय ८
सुदेष्णो उवाच
देव्यो देवेषु विख्यातास्तासां त्वं कतमा शुभे ||
१४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
देवय़क्षोरगनृणां भूतानामथ रक्षसाम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
देवय़ानचरो विष्णोः पितृय़ानश्च तामसः |
३० क
वन पर्व
अध्याय ११४
लोमश उवाच
देवय़ानस्तस्य पन्थाश्चक्षुश्चैव प्रकाशते ||
१२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४२
सूत उवाच
देवय़ाना हि पन्थानः श्रुतास्ते यज्ञसंस्तरे ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
कपिल उवाच
देवय़ाना हि पन्थानश्चत्वारः शाश्वता मताः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ७२
कच उवाच
देवय़ानि तथैव त्वं नैवं मां वक्तुमर्हसि ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ७४
शुक्र उवाच
देवय़ानि विजानीहि तेन सर्वमिदं जितम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ७४
शुक्र उवाच
देवय़ानि विजानीहि तेन सर्वमिदं जितम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७५
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ानी नृपश्रेष्ठ पितरं वाक्यमव्रवीत् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ानी प्रजातासौ वृथाहं प्राप्तय़ौवना |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ानीं च दय़ितां सुतां तस्य महात्मनः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ानेन नाकस्य पृष्ठमाप्नोति भारत ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्यथ भूय़ोऽपि वाक्यं पितरमव्रवीत् |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्यपि तं विप्रं निय़मव्रतचारिणम् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्या तु सहितः स नृपो नहुषात्मजः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ७७
शर्मिष्ठो उवाच
देवय़ान्या भुजिष्यास्मि वश्या च तव भार्गवी |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्यां महाराज शर्मिष्ठाय़ां च जज्ञिरे ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्यां हि तुष्टाय़ां विद्यां तां प्राप्स्यसि ध्रुवम् ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्यामजाय़ेतां यदुस्तुर्वसुरेव च |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्याश्च राजेन्द्र शर्मिष्ठाय़ाश्च तत्कृते ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्याश्च संय़ोगं यय़ातेर्नाहुषस्य च ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
देवय़ान्याश्चानुमते तां सुतां वृषपर्वणः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
देशं कालं च विज्ञाय़ कार्याकार्यविनिश्चय़े ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
देशं कालं समासाद्य विक्रमेत विचक्षणः |
२८ क
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
देशं किम्पुरुषावासं द्रुमपुत्रेण रक्षितम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
देशं तं मापय़ामासुर्यज्ञाय़तनकारणात् |
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०५
नारद उवाच
देशं पारं पृथिव्या वा गच्छ गालव माचिरम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
देशं विरजसं पश्य मेरोः शिखरमुत्तमम् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
दुर्योधन उवाच
देशः कालस्तथाय़ुक्तो न हि नार्हति केशवः |
३ क
वन पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
देशकाल इहाय़ातुं देवगन्धर्वय़ोषिताम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
देशकाल उपस्पृश्य तथा सुन्दरिकाह्रदे |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
देशकालप्रतीक्षे यो दस्योर्दर्शय़ते नृपः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४५
व्रह्मो उवाच
देशकालविचारीदं श्रमव्याय़ामनिस्वनम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
देशकालविधानज्ञान्भर्तृकार्यहितैषिणः |
२२ क
स्त्री पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
देशकालविभागं च परं श्रेय़ः स विन्दति ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
देशकालान्तरप्रेप्सुः कृत्वा शक्रः पराक्रमम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
देशकालाभ्यतीतो हि विक्रमो निष्फलो भवेत् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
देशकालावभिप्रेतौ ताभ्यां फलमवाप्नुय़ात् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
देशकालावुपाय़ांश्च मङ्गलं स्वस्ति वृद्धय़े |
४९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
ऋषय़ ऊचुः
देशकालावुभौ केचिन्नैतदस्तीति चापरे |
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
देशकालेन संय़ुक्तं युद्धं विजय़दं भवेत् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
देशकालोचितं वाक्यमव्रवीत्प्रीतमानसः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
देशकालोपपन्नेन साध्वन्नेनाप्यतर्पय़न् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
देशकालोपसम्पन्ना दोग्ध्री क्षान्तातिवत्सला |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
देशकालौ तु सम्प्रेक्ष्य योद्धव्यमिति मे मतिः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय २९
प्रह्लाद उवाच
देशकालौ तु सम्प्रेक्ष्य वलावलमथात्मनः |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
देशकालौ विदित्वैव वेत्स्यध्वं परमां मुदम् ||
१९ ख