chevron_left  धर्मराजप्रिय़ान्वेषीarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजप्रिय़ान्वेषी हत्वा योधान्वरान्वरान् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
दुर्योधन उवाच
धर्मराजप्रिय़ार्थं वा द्रौपद्या वा न विद्म तत् ||
७२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
धर्मराजप्रय़ोगाच्च दीर्घां निद्रां प्रवेशितः ||
६६ ख
सभा पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजमथामन्त्र्य पृथां च पृथुलोचनः ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजमनुज्ञाप्य पृथां कृष्णां च भारत ||
५२ ख
सभा पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजमनुज्ञाप्य यय़ौ प्राचीं दिशं प्रति ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजमवच्छाद्य सिंहवद्व्यनदन्मुहुः ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजमिदं वाक्यमपदान्तरमव्रवीत् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजमिदं वाक्यमव्रवीत्पुरुषर्षभ ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९
सूत उवाच
धर्मराजमुपेत्येदं वचनं प्रत्यभाषताम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजमुवाचेदं व्रतमादिश्यतां मम ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजवचः श्रुत्वा सारथिर्हय़कोविदः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजविसृष्टेन दिव्येनानादय़न्दिशः ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजश्च तान्सर्वानुपजग्राह पाण्डवः |
८४ क
वन पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजश्च धौम्यश्च निलिल्याते महावने |
१४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजश्च पुत्रस्ते राज्यं प्राणान्धनानि च |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजश्च भीमश्च यमजौ फल्गुनस्तथा |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजश्च भीमश्च सव्यसाची यमावपि |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्ततस्तूर्णमभिगम्य जनार्दनम् |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्तथा षष्ट्या गात्रे शल्यं समर्पय़त् ||
११ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजस्तु तत्रैनं सञ्चस्कारय़िषुस्तदा |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्य चरणौ प्रपेदे शिरसानघ ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १५२
राक्षसा ऊचुः
धर्मराजस्य चात्मानं व्रवीषि भ्रातरं कथम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्य तद्वाक्यं निशम्य शिनिपुङ्गवः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्य तद्वाक्यं निशम्य शिनिपुङ्गवः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजस्य दैतेय़ यादृशीमिह मन्यसे ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजस्य भवनं जग्मतुः परमार्चितौ |
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजस्य वचनं श्रुत्वा यदुकुलोद्वहः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजस्य वचने स्थातव्यमविशङ्कय़ा ||
४८ ग
वन पर्व
अध्याय २३५
अर्जुन उवाच
धर्मराजस्य सन्देशान्मम चेदिच्छसि प्रिय़म् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजाज्ञय़ा चैव स्थिताः स्म समय़े तदा ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजानमासीनं देवराजमिवाश्विनौ ||
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
धर्मराजापराधेन भय़ं नः पुनरागतम् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजाय़ कौन्तेय़ यथा विष्णुः शचीपतेः ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजाय़ तत्सर्वं निवेद्य भरतर्षभ |
५५ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजाय़ तत्सर्वमाचचक्षे परन्तपः ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजाय़ तत्सर्वमिन्द्रप्रस्थगताय़ वै |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ९
सूत उवाच
धर्मराजाय़ुषोऽर्धेन रुरोर्भार्या प्रमद्वरा |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजे अतिप्रीत्या पूर्णचन्द्र इवामले |
९ क
आदि पर्व
अध्याय २०६
अर्जुन उवाच
धर्मराजेन चादिष्टं नाहमस्मि स्वय़ंवशः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजेन तद्वाक्यं नातिशङ्कितुमर्हसि ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजेन सङ्ग्रामस्त्वय़ा कार्यः सदानघ ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजो द्रुतं विद्ध्वा तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
धर्मराजो न सङ्क्रुध्येद्भीमसेनस्त्वमर्षणः |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजो महातेजाः सहर्त्विग्भिर्व्यरोचत ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजो महातेजास्तच्च सस्मार पाण्डवः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजो महाराज स्वेनानीकेन संवृतः |
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजो महाशक्तिं प्राहिणोत्तव सूनवे |
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
धर्मराजो युधां श्रेष्ठो व्रुवन्दुःखमपानुदत् ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
धर्मराजो विशुद्धात्मा तप आतिष्ठदुत्तमम् ||
१३ ख