भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ं महावाहुमभ्यभाषत भारत ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ं वाक्यमुवाच चेदं; युधिष्ठिरः कर्णशराभितप्तः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ं शोचमानाः साश्रुकण्ठाः सुदुःखिताः ||
३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ः स्थास्यति वारितो मय़ा; जनार्दनो नैव विरोधमिच्छति |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़गृहानेव यय़ौ कृष्णस्तु वीर्यवान् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़भय़ात्कर्णमुज्जिहीर्षुर्महारथः ||
८८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़मपश्याम चतुर्दन्तमिव द्विपम् ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़मपश्याम नलिनीमिव कुञ्जरम् ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़मभिप्रेक्ष्य धर्मराजोऽव्रवीदिदम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१६२
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़मभिप्रेक्ष्य विनीतं स्थितमन्तिके ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ममित्रघ्नं रुदन्तं भरतर्षभ ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ममित्रघ्नमेकवीरमुवाच ह ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़मुपाजग्मुरादित्याः कर्णतोऽभवन् ||
३९ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़युगान्तार्कः संशप्तकमहार्णवम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़रथं तूर्णं शरवर्षैरवाकिरत् ||
४९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़रथं शीघ्रं शरवर्षैरवाकिरत् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़रथं शीघ्रं सर्वतः समुपाद्रवन् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़रथं हित्वा राधेय़ं प्रत्युदीय़युः ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़रथे तूर्णं पातय़न्ति स्म संय़ुगे ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़वचः श्रुत्वा धर्मराजो युधिष्ठिरः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़वचः श्रुत्वा हर्षोत्सिक्तमना भृशम् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़विय़ोगाच्च राज्यनाशाच्च दुःखिताः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़शरव्याप्तं पितरं ते महाव्रतम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़शराभ्यस्तैः स्तीर्णा भूर्वरवारणैः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़शराभ्यस्तैः स्यन्दनाश्वनरद्विपैः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़शरैर्नुन्नाः प्राद्रवन्त दिशो दश ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़शरैर्भग्नं द्रवमाणमितस्ततः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
धृतराष्ट्र उवाच
धनञ्जय़श्च किं चक्रे मम सैन्येषु सञ्जय़ |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
३९
उत्तर उवाच
धनञ्जय़श्च केनासि प्रव्रूहि मम तत्त्वतः |
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२३५
चित्रसेन उवाच
धनञ्जय़श्च ते रक्ष्यः सह भ्रातृभिराहवे |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१६२
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़श्च तेजस्वी प्रणिपत्य पुरन्दरम् |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
धनञ्जय़श्च व्यजने भीमसेनश्च पाण्डवः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
कण्व उवाच
धनञ्जय़श्चेन्द्रसुतो न हन्यातां तु कं रणे ||
३२ ख
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़सखा चात्र नित्यमास्ते स्म तुम्वुरुः ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़सखा यश्च धनञ्जय़हितश्च यः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
धनञ्जय़सखात्मानं दर्शय़ामास वै तदा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
युधिष्ठिर उवाच
धनञ्जय़समं युद्धे त्वां वय़ं तात संय़ुगे |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्ततः कृष्णमव्रवीत्पश्य केशव |
१५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्तथा यान्तं पृष्ठतो द्रौणिमभ्ययात् |
९२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
धनञ्जय़स्तस्य शरैश्च दारिता; हताश्च पेतुर्नरवाजिकुञ्जराः ||
५४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
धृतराष्ट्र उवाच
धनञ्जय़स्तात युधां प्रणेता; दुरात्मनां जीवितच्छिन्महात्मा ||
१ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़स्तु दैवं तन्मनसाचिन्तय़त्प्रभुः |
६२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
धनञ्जय़स्तु श्रुत्वैतत्केशवस्य महात्मनः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
धृतराष्ट्र उवाच
धनञ्जय़स्तु सङ्क्रुद्धः प्रविष्टो मामकं वलम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्ते न्यपतन्पृथिव्यां; महाहय़स्तक्षकपुत्रपक्षाः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्य गात्रेषु शूराः परिघवाहवः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्य च रणे जय़माशास्तवान्विभुः ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़स्य नृपते तन्मे निगदतः शृणु ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सात्यकिरु उवाच
धनञ्जय़स्य पदवीं धर्मराजस्य शासनात् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्य रूपेण विक्रमेण श्रुतेन च |
१० क